Women Reservation Bill: नारी शक्ति वंदन अधिनियम से कितना अलग कांग्रेस का महिला आरक्षण बिल? राहुल गांधी ने किया जिक्र
Women Reservation Bill: संसद में बहस के दौरान राहुल गांधी ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर अपने विचार रखे. आइए जानते हैं कि कांग्रेस के महिला आरक्षण बिल से कितना अलग है नारी शक्ति वंदन अधिनियम.

- राहुल गांधी ने महिला आरक्षण बिल पर सरकार की आलोचना की।
- सरकार का बिल जनगणना और परिसीमन के बाद लागू होगा।
- कांग्रेस ओबीसी महिलाओं के लिए अतिरिक्त आरक्षण की मांग कर रही है।
- दोनों बिलों में 15 साल के लिए 33% आरक्षण का प्रस्ताव है।
Women Reservation Bill: संसद में एक गरमागरम बहस के दौरान राहुल गांधी ने सरकार के नारी शक्ति वंदन अधिनियम की कड़ी आलोचना की. उन्होंने तर्क दिया कि यह महिलाओं के लिए असली आरक्षण बिल नहीं है और यह महिलाओं के वास्तविक सशक्तिकरण में देरी करता है. उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि वह UPA के जमाने में प्रस्तावित बिल के पुराने स्वरूप को वापस लाएं. इसी बीच आइए जानते हैं कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम से कितना अलग था कांग्रेस का महिला आरक्षण बिल.
देरी बनाम तत्काल कार्यान्वयन
सबसे बड़ा अंतर समय को लेकर है. नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 अपने कार्यान्वयन को अगली जनगणना और परिसीमन प्रक्रिया के पूरा होने से जोड़ता है. इसका मतलब है कि वह शायद 2029 के लोकसभा चुनाव के आसपास ही लागू हो पाएगा. इसके उलट कांग्रेस के नेतृत्व वाली UPA सरकार के 2010 के महिला आरक्षण बिल में कोई भी ऐसी शर्त नहीं थी. उसे पारित होने के तुरंत बाद ही लागू किया जा सकता था.
ओबीसी आरक्षण पर बहस
2023 का यह कानून 33% के कुल कोटे के अंदर सिर्फ एससी और एसटी महिलाओं के लिए ही आरक्षण का प्रावधान करता है. लेकिन इसमें ओबीसी महिलाओं के लिए किसी अलग कोटे को शामिल नहीं किया गया है. राहुल गांधी द्वारा उठाया गया एक प्रमुख तर्क यह है कि आरक्षण को लागू करने से पहले जाति जनगणना कराना जरूरी है. राहुल गांधी का कहना है कि बिना जाति जनगणना के यह बिल ओबीसी महिलाओं के साथ अन्याय है.
कांग्रेस इस पर कड़ा विरोध जताते हुए ओबीसी महिलाओं के लिए कोटे के अंदर कोटा की मांग कर रही है. दिलचस्प बात यह है कि यह प्रावधान कांग्रेस के अपने 2010 के बिल का हिस्सा नहीं था.
जनगणना और परिसीमन की भूमिका
मौजूदा कानून के तहत आरक्षण का प्रावधान नई जनगणना के आंकड़ों और निर्वाचन क्षेत्र के नए सिरे से निर्धारण पर निर्भर करता है. कांग्रेस का यह तर्क है कि महिलाओं के आरक्षण को परिसीमन से जोड़ने से न्याय मिलने में देरी होती है. इसी के साथ इसका इस्तेमाल अलग-अलग क्षेत्र के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को बदलने के लिए भी किया जा सकता है.
अवधि और सीटों का रोटेशन एक जैसा
कांग्रेस के 2010 के बिल और 2023 के कानून दोनों में ही लोकसभा और राज्य विधानसभा में महिलाओं के लिए 15 साल की अवधि तक 33% आरक्षण का प्रस्ताव किया गया है. इन दोनों में ही सीटों के रोटेशन की व्यवस्था भी शामिल है. इसके तहत आरक्षित सीट समय-समय पर बदलती रहती है.
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Source: IOCL



























