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राघव चड्ढा को राज्यसभा से कितनी सैलरी मिलती है, जानें हर महीने की कमाई?

पंजाब से राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा का नाम वोटर लिस्ट से हटने को लेकर विवाद जारी है, जिसने सांसदों के वेतन और मिलने वाली सुविधाओं पर बहस छेड़ दी है. आइए जानें कि राघव चड्ढा की सैलरी कितनी है.

आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पंजाब से राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा इन दिनों दिल्ली और पंजाब की राजनीति में खासे चर्चा में बने हुए हैं. पंजाब में पार्टी की सरकार बनने के बाद उन्होंने दिल्ली की विधायकी छोड़कर उच्च सदन का रुख किया और मोहाली में अपना वोट ट्रांसफर कराया. हालांकि SIR अभियान के दौरान ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से नाम हटने के बाद विवाद पैदा हो गया, जिसे उन्होंने राजनीतिक दुर्भावना बताया. राजनीतिक हलचलों के बीच आम जनता में यह जानने की उत्सुकता भी बढ़ गई है कि एक राज्यसभा सांसद के रूप में राघव चड्ढा को हर महीने कितना वेतन और भत्ते मिलते हैं.

उच्च सदन का कार्यकाल और संरचना

भारतीय संसद में जनप्रतिनिधियों के कार्यकाल की व्यवस्था दोनों सदनों में अलग-अलग तय की गई है. जहां जनता द्वारा सीधे चुने जाने वाले लोकसभा सदस्यों का कार्यकाल 5 वर्षों का होता है, वहीं उच्च सदन यानी राज्यसभा के सांसदों की अवधि 6 साल निर्धारित है. राज्यसभा की एक बड़ी खासियत यह है कि यह एक स्थायी निकाय है, जो कभी भंग नहीं होता. इसमें प्रत्येक 2 वर्ष के अंतराल पर लगभग एक-तिहाई सदस्य सेवानिवृत्त हो जाते हैं और उनकी जगह नए सदस्यों का चुनाव संपन्न होता है.

सांसद का मासिक वेतन 

संसदीय सुधारों और समय-समय पर होने वाले संशोधनों के तहत जनप्रतिनिधियों के वेतनमान में परिवर्तन किए जाते हैं. संसद सदस्यों के वेतन, भत्ते और पेंशन (संशोधन) अधिनियम, 2025 के लागू होने के बाद राज्यसभा सदस्यों के मूल वेतन में बढ़ोतरी दर्ज की गई है. वर्ष 2018 के संशोधन में जो बुनियादी वेतन 1,00,000 रुपये तय किया गया था, वह मार्च 2025 से बढ़कर 1,24,000 रुपये प्रति माह हो चुका है. यह नया ढांचा लोकसभा और राज्यसभा दोनों ही सदनों के सदस्यों पर समान रूप से लागू होता है.

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राघव चड्ढा को राज्यसभा से कितनी सैलरी मिलती है, जानें हर महीने की कमाई? 

दैनिक भत्ता, निर्वाचन क्षेत्र और कार्यालय खर्च

वेतन के अलावा सांसदों को संसदीय कामकाज के संचालन के लिए विभिन्न मदों में भत्ते दिए जाते हैं. संसद सत्र या संसदीय समिति की बैठकों में हिस्सा लेने के लिए प्रतिदिन 2,500 रुपये का दैनिक भत्ता मिलता है, जो सत्र शुरू होने से 3 दिन पहले और समाप्त होने के 3 दिन बाद तक लागू रहता है. इसके लिए बायोमेट्रिक या रजिस्टर पर हस्ताक्षर करना अनिवार्य है. इसके अतिरिक्त, अपने क्षेत्र के लोगों से संपर्क बनाए रखने के लिए 87,000 रुपये का निर्वाचन क्षेत्र भत्ता और कार्यालय रखरखाव हेतु 70,000 रुपये का ऑफिस अलाउंस प्रदान किया जाता है. साथ ही, सत्र के दौरान दैनिक खर्चों के लिए 2,000 रुपये का अतिरिक्त प्रावधान भी मौजूद है.

यात्रा, आवास, मुफ्त सुविधाएं और पूर्व सांसदों की पेंशन

सरकार सांसदों को आवागमन और बुनियादी सुविधाओं के लिए व्यापक प्रबंध उपलब्ध कराती है. प्रत्येक सांसद को अपने और परिवार के लिए प्रतिवर्ष 34 मुफ्त घरेलू हवाई यात्राएं और असीमित प्रथम श्रेणी ट्रेन यात्रा की सुविधा मिलती है. नई दिल्ली में उनकी वरिष्ठता के आधार पर मुफ्त हॉस्टल कमरा, फ्लैट या बंगला आवंटित किया जाता है. यदि कोई सांसद सरकारी आवास नहीं लेता, तो वह मासिक हाउसिंग अलाउंस का दावा कर सकता है. इसके अलावा, सालाना 50,000 यूनिट बिजली, 4,000 किलोलीटर पानी, 1,50,000 टेलीफोन कॉल्स और 1,500 रुपये प्रति माह ब्रॉडबैंड इंटरनेट का लाभ मिलता है. मेडिकल सुरक्षा के तहत सीजीएचएस के जरिए क्लास-1 अधिकारी स्तर की सुविधाएं दी जाती हैं. वहीं पूर्व सांसदों की पेंशन भी बढ़ाकर 31,000 रुपये तय की गई है, जिसमें 5 साल से अधिक सेवा पर प्रति वर्ष 2,500 रुपये की अतिरिक्त बढ़ोतरी होती है.


राघव चड्ढा को राज्यसभा से कितनी सैलरी मिलती है, जानें हर महीने की कमाई?

राज्यसभा के विशेषाधिकार और अनूठी संवैधानिक शक्तियां

संसदीय व्यवस्था में राज्यसभा सांसदों के पास कई विधायी, वित्तीय, संवैधानिक संशोधन और कार्यपालिका से जुड़ी शक्तियां होती हैं. हालांकि, राज्यों का प्रतिनिधित्व करने के कारण उच्च सदन को दो ऐसे विशिष्ट अधिकार प्राप्त हैं जो निचले सदन यानी लोकसभा के पास भी नहीं हैं. संविधान के अनुच्छेद 249 के तहत राज्यसभा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत से राज्य सूची के किसी भी विषय को राष्ट्रीय महत्व का घोषित कर सकती है, जिस पर संसद कानून बना सकती है. इसके अतिरिक्त, अनुच्छेद 312 के अंतर्गत दो-तिहाई बहुमत से नई अखिल भारतीय सेवाएं गठित करने का प्रस्ताव पारित करने का एकाधिकार केवल राज्यसभा के पास ही है.

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About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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