Breastfeed In Public Places: पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर एक्ट्रेस राधिका आप्टे की एक तस्वीर खूब वायरल हो रही है, जिसमें देखा जा सकता है कि वो एक वॉशरूम में ब्रेस्ट मिल्क पंप कर बोतल में भरती हुई नजर आ रही हैं. इस तस्वीर को देखने के बाद लोगों को समझ आ रहा है कि तमाम वर्किंग मॉम्स को कैसे इस समस्या से गुजरना पड़ता है. ऐसे में ये जानना भी जरूरी है कि भारत में कितनी महिलाओं को पब्लिक प्लेस में ब्रेस्ट फीडिंग करवानी पड़ती है. हालांकि इसके लिए देश में अभी वैसा माहौल नहीं बना है, जैसा दुनिया के बाकी देशों में देखा जाता है.
सिर्फ इतनी महिलाओं को मिलती है जगहबच्चे के पैदा होने के बाद उसके लिए मां का दूध किसी अमृत से कम नहीं होता है, एक्सपर्ट्स मानते हैं कि जन्म के एक घंटे के भीतर स्तनपान कराने से नवजात शिशु को मौत के खतरे से रोका जा सकता है. अब बात करते हैं कि भारत में सार्वजनिक स्थानों पर ब्रेस्ट फीडिंग कितनी बड़ी चुनौती है. भारत में सिर्फ 6% महिलाएं ही अपने बच्चों को दूध पिलाने के लिए ऐसी जगह खोज पाती हैं, जहां वो बिना किसी परेशानी के ब्रेस्ट फीडिंग करवा सकते हैं.
सर्वे में सामने आए थे आंकड़ेइसके लिए एक पैन-इंडिया सर्वे किया गया था, जिसमें बताया गया कि अपनी कार में (90%), सार्वजनिक परिवहन (78%), रेस्तरां (56%), कार पार्किंग (49%), ट्रायल रूम (47%), वॉशरूम (44%), धार्मिक स्थल (41%), पार्क (32%) और ब्रेस्ट फीडिंग रूम में 6% लोगों ने बच्चों को दूध पिलाया है. सबसे ज्यादा परेशानी उन महिलाओं को झेलनी पड़ी, जिन्होंने एक पेड़ के नीचे, पासपोर्ट ऑफिस के वेटिंग रूम में, बैंक की लाइन में लगकर या फिर वॉशरूम या बस स्टॉप पर ब्रेस्ट फीडिंग करवाई.
महिलाओं को होती है हिचकिचाहटइस सर्वे में बताया गया कि लगभग 81% महिलाएं ब्रेस्ट फीडिंग के लिए उचित स्थानों की कमी के कारण सार्वजनिक स्थलों पर अपने बच्चों को दूध पिलाने में असहज महसूस करती हैं. जब भी वो ऐसा करने की कोशिश करती हैं तो लोग उन्हें घूरते हैं, वहीं साफ सफाई की भी समस्या होती है. हालांकि गांव और छोटे कस्बों में ये चीजें महिलाओं के लिए काफी आम हैं. महिलाएं अपने रोजमर्रा के कामों के साथ-साथ बच्चे को दूध पिलाने का काम भी करती हैं. जिसमें उन्हें कोई शर्मिंदगी महसूस नहीं होती है और न ही कोई हिचकिचाहट होती है.
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