China Tuition Ban: दुनिया भर में प्राइवेट इंस्टीट्यूशन एक काफी बड़ी इंडस्ट्री बन चुकी है. हालांकि एक देश ऐसा भी है जिसने मुनाफे पर आधारित प्राइवेट ट्यूशन पर पूरी तरह से बैन लगाकर एक अनोखा कदम उठाया है. चीन ने कड़े नियम लागू करके देश के अरबों डॉलर के प्राइवेट ट्यूशन सेक्टर को बंद कर दिया है. यह कदम चीन ने 2021 में लिया था. 

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क्यों उठाया गया यह फैसला? 

चीन की लीडरशिप का ऐसा मानना था कि प्राइवेट ट्यूशन इंडस्ट्री इतनी बड़ी हो चुकी है कि यह परिवारों पर काफी ज्यादा फाइनेंशियल और साइकोलॉजिकल दबाव डाल रही है. सरकार ने यह नतीजा निकाला कि ट्यूशन कंपनियां शिक्षा को एक महंगा मुकाबला बना रही हैं. इसे कई परिवार नहीं संभाल सकते. इसी वजह से बीजिंग ने डबल रिडक्शन पॉलिसी के तहत बड़े सुधार पेश किया. इसे स्कूली छात्रों के लिए होमवर्क और ऑफ केंपस ट्यूशन दोनों को कम करने के लिए डिजाइन किया गया था. 

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चीन में गिरती जन्म दर पर चिंता 

इस फैसले के पीछे सबसे बड़ी वजहों में से एक चीन में घटती जन्म दर थी.  बच्चों को पालने का खर्च काफी ज्यादा बढ़ गया था. खासकर शहरी इलाकों में जहां परिवार बच्चों को एग्जाम में सफल बनाने के लिए प्राइवेट ट्यूशन पर काफी ज्यादा पैसे खर्च कर रहे थे.

अधिकारियों का ऐसा मानना था कि महंगे ट्यूशन की वजह से युवा जोड़े बच्चे पैदा नहीं कर रहे थे. मुनाफे पर आधारित ट्यूशन सर्विस पर बैन लगाकर, सरकार का मकसद परिवारों पर पैसे का बोझ कम करना और जन्म दर को बढ़ावा देना था.

स्टूडेंट पर पढ़ाई का दबाव कम करना 

एक और बड़ी चिंता चीनी स्टूडेंट पर पड़ने वाला काफी ज्यादा पढ़ाई का दबाव था. कई बच्चे दिन में स्कूल जाते थे और फिर शाम और वीकेंड ट्यूशन क्लास में बिताते थे. इस मुश्किल शेड्यूल की वजह से स्टूडेंट के पास आराम, खेल या फिर सोशल एक्टिविटी के लिए काफी कम समय बचता था. अधिकारियों का ऐसा कहना था कि इस सिस्टम ने पढ़ाई को चूहे की दौड़ बना दिया है.

पॉलिसी के तहत सख्त नियम 

नए नियमों ने वीकेंड, पब्लिक होलीडे और गर्मी और सर्दी की छुट्टियों में मैथ, साइंस और भाषा जैसे स्कूल के मुख्य सब्जेक्ट के लिए प्राइवेट ट्यूशन पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया था. इसका मकसद था कि स्टूडेंट को आराम करने और दूसरी एक्टिविटी करने के लिए सही समय मिले.

विदेशी इन्वेस्टमेंट और ऑनलाइन ट्यूशन पर रोक 

चीन ने अपने एजुकेशन सेक्टर में विदेशी दखल पर भी सख्त कंट्रोल लागू किया. ट्यूटरिंग कंपनियों में विदेशी इन्वेस्टमेंट पर पूरी तरह बैन लगा दिया गया और विदेशी टीचरों द्वारा पढ़ाई जाने वाली ऑनलाइन क्लास पर काफी ज्यादा रोक लगा दी गई.

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