Premium Petrol India: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव की वजह से वैश्विक ईंधन आपूर्ति पर पड़ रहे असर के बीच भारतीय उपभोक्ताओं को अब एक और झटका लगा है. दरअसल पेट्रोल की कीमत बढ़ गई हैं. 20 मार्च 2026 से तेल कंपनियों ने प्रीमियम पेट्रोल की कीमतों में लगभग ₹2.09 से ₹2.35 की बढ़ोतरी की है. इससे एक आम सवाल उठ रहा है कि आखिर प्रीमियम पैट्रोल रेगुलर पेट्रोल से किस तरह अलग होता है? आइए जानते हैं क्या है इस सवाल का जवाब.

Continues below advertisement

मुख्य अंतर ऑक्टेन रेटिंग में है 

रेगुलर और प्रीमियम पेट्रोल के बीच सबसे बड़ा अंतर ऑक्टेन रेटिंग का होता है. यह रेटिंग बताती है कि कोई ईंधन इंजन में होने वाली नॉकिंग को कितनी अच्छी तरह से रोक सकता है. भारत में रेगुलर पेट्रोल की ऑक्टेन रेटिंग आमतौर पर 87 से 91 के बीच होती है. दूसरी तरफ प्रीमियम पेट्रोल की रेटिंग ज्यादा होती है. यह आमतौर पर 91 से 95 के बीच होती है. यह ज्यादा ऑक्टेन ईंधन को इंजन के अंदर आसानी से जलने में मदद करता है. इससे समय से पहले होने वाला दहन रुक जाता है. 

Continues below advertisement

ऐसे एडिटिव्स जो इंजन को साफ रखते हैं 

एक और मुख्य अंतर है एडिटिव्स की मौजूदगी. रेगुलर पेट्रोल में सिर्फ बुनियादी सफाई करने वाले एजेंट होते हैं. लेकिन प्रीमियम पेट्रोल में उन्नत डिटर्जेंट और एडिटिव्स होते हैं जो इंजन को सक्रिय रूप से साफ करते हैं. यह रसायन कार्बन जमाव को हटाने, कीचड़ बनने से रोकने और फ्यूल इंजेक्टर व वॉल्व जैसे जरूरी पुर्जों को लंबे समय तक बेहतर स्थिति में रखने में मदद करते हैं. 

इससे क्या पड़ता है फर्क? 

ज्यादातर रोजमर्रा के वाहनों के लिए रेगुलर पेट्रोल बिल्कुल ठीक काम करता है. इसे ऐसे इंजन के लिए डिजाइन किया गया है जिनका कम्प्रेशन रेशियो कम होता है और जिन्हें ज्यादा ऑक्टेन वाले ईंधन की जरूरत नहीं होती. 

लेकिन प्रीमियम पैट्रोल खासतौर पर ज्यादा परफॉर्मेंस वाले या ज्यादा कम्प्रेशन वाले इंजन के लिए बनाया गया है. लग्जरी गाड़ियां और स्पोर्ट्स वाहन में ऐसे इंजन पाए जाते हैं. ऐसे इंजन में यह परफॉर्मेंस को बेहतर बना सकते हैं. इसी के साथ ऐसा कहा जाता है कि प्रीमियम पैट्रोल हमेशा बेहतर माइलेज देता है. लेकिन यह इंजन के प्रकार पर निर्भर करता है. 

प्रीमियम पैट्रोल इतना महंगा क्यों है? 

प्रीमियम पेट्रोल की ज्यादा कीमत उसके रिफायनिंग प्रोसेस और उसमें मिलाए गए केमिकल्स की वजह से होती है. ज्यादा ऑक्टेन वाला फ्यूल बनाने और उसमें एडवांस्ड एडिटिव्स मिलने से रेगुलर पेट्रोल के मुकाबले इसकी कीमत बढ़ जाती है.

यह भी पढ़ें:  राष्ट्रपति होते हुए भी अपनी मर्जी से पैसा खर्च क्यों नहीं कर सकते डोनाल्ड ट्रंप, क्यों मांगने पड़े 200 अरब डॉलर?