Pm Modi Melbourne: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस वक्त ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में हैं. वहां उन्होंने एक भव्य कार्यक्रम में भारतीय समुदाय को संबोधित किया. इस ऐतिहासिक मौके पर ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज की मौजूदगी में करीब 30 हजार प्रवासी भारतीयों ने पीएम मोदी का जोरदार स्वागत किया. अपने संबोधन में पीएम ने गर्व के भारत की तकनीकी और विनिर्माण क्षमता का जिक्र करके हुए चिप से लेकर शिप तक के निर्माण की बात की है. आज के दौर में भारत सेमीकंडक्टर चिप और विशालकाय जहाजों के निर्माण के मामले में न सिर्फ तेजी से आगे बढ़ रहा है, बल्कि रक्षा और तकनीक के क्षेत्र में भी पूरी तरह से आत्मनिर्भर बन रहा है. चलिए जानें कि भारत में कौन-कौन सी चिप और शिप बनती हैं.

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अंतरिक्ष की दुनिया में स्वदेशी चिप का जलवा

भारत ने चिप निर्माण के क्षेत्र में अपनी ताकत का लोहा मनवाना शुरू कर दिया है. इसरो की सेमीकंडक्टर लैब ने देश की पहली पूरी तरह से स्वदेशी 32-बिट प्रोसेसर चिप ‘विक्रम’ को तैयार किया है. यह कोई साधारण चिप नहीं, बल्कि अंतरिक्ष के बेहद खतरनाक रेडिएशन और माइनस 55 डिग्री सेल्सियस से लेकर 125 डिग्री सेल्सियस तक के जानलेवा तापमान को भी आसानी से सहन कर सकती है. इस स्वदेशी तकनीक का इस्तेमाल हमारे उपग्रहों औप सबसे चुनौतीपूर्ण अंतरिक्ष अभियानों में रॉकेट में मुख्य रूप से किया जा रहा है.

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गुजरात और असम बने सेमीकंडक्टर के हब

देश में वाणिज्यिक और आम इस्तेमाल होने वाली चिप्स के निर्माण को रफ्तार देने के लिए गुजरात औप असम में बड़े-बड़े उद्योग स्थापित किए गए हैं. गुजरात के साणंद में माइक्रोन और सीजी सेमी जैसी बड़ी कंपनियों के प्लांट में रोजाना लाखों की संख्या में चिप्स की असेंबली और पैकेजिंग का काम किया जा रहा है. वहीं असम के जागीरोड में टाटा ग्रुप का एक बड़ा प्लांट इस काम को आगे बढ़ा रहा है. ये चिप्स हमारे रोजमर्रा के इस्तेमाल वाले वाहनों, 5जी नेटवर्क और स्मार्ट उपकरणों के साथ-साथ बड़ी औद्योगिक मशीनों को सुचारू रूप से चलाने में मदद करती हैं.

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सबसे एडवांस आधुनिक 2-नैनोमीटर AI चिप तैयार

भारत सिर्फ साधारण चिप्स तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह भविष्य की सबसे आधुनिक तकनीकों पर भी बहुत तेजी से काम कर रहा है. भारतीय इंजीनियरों ने दुनिया की सबसे एडवांस और आधुनिक 2-नैनोमीटर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस चिप की डिजाइनिंग सफलतापूर्वक पूरी कर ली है. यह भारत की तकनीकी क्षमता का वो शानदार प्रमाण है जो दुनिया के गिने-चुने देशों के पास ही उपलब्ध है. जल्द ही इस तकनीक का बड़े पैमाने पर उत्पादन से भारत वैश्विक स्तर पर अन्य देशों पर अपनी पूर्ण निर्भरता को खत्म कर देगा.

समंदर के सीने पर स्वदेशी शिप का पहरा

तकनीक के साथ-साथ भरत समंदर की लहरों पर राज करने के लिए विशाल जहाजों यानी शिप के निर्माण में भी एक वैश्विक महाशक्ति बन चुका है. भारतीय नौसेना आज रक्षा जहाजों के निर्माण में 70 फीसदी से भी ज्यादा आत्मनिर्भर हो चुकी है. इसका सबसे बड़ा और जीता-जागता उदाहरण देश में पूरी तरह से निर्मित पहला विमान वाहक पोत आईएनएस विक्रांत है. इसे बेहद जटिसल युद्धपोतों की श्रेणी में गिना जाता है. इसके अलावा, भारतीय शिपयार्डों में आईएनएस नीलगिरी और आईएनएस कोलकाता जैसे खतरनाक स्टील्थ फ्रिगेट और विध्वंसक जहाजों का निर्माण लगातार किया जा रहा है. 

भारतीय शिपयार्डों में पनडुब्बी रोधी शिप का निर्माण

देश की तटीय सीमाओं की अचूक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भारत अब परमाणु पनडुब्बियों जैसे आईएनएस अरिहंत और पनडुब्बी रोधी पोतों के निर्माण में पूरी तरह से महारत हासिल कर चुका है. कोचीन शिपयार्ड और मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स जैसे भारतीय संस्थानों में इस समय करीब 60 से अधिक अत्याधुनिक युद्धपोतों को बनाने का काम चल रहा है. सबसे खास बात यह है कि इन महाकाय युद्धपोतों को बनाने के लिए जरूरी विशेष दर्जे का स्टील भी अब विदेश से नहीं आता, बल्कि भारत की सरकारी कंपनी सेल से सहयोग से स्वदेश में ही तैयार किया जाता है.

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