इजरायल में कैसी है मुस्लिमों की हालत, इस देश में कितनी है हिंदुओं की आबादी?
ऐसे समय में यह जानना भी जरूरी हो जाता है कि इजरायल के अंदर अलग-अलग धर्मों के लोग किस स्थिति में रहते हैं, खासकर मुस्लिम और हिंदू समुदाय. इजरायल एक ऐसा देश है जहां धर्म और राजनीति का गहरा संबंध है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 25 और 26 फरवरी को इजरायल दौरे पर रहेंगे. इस बीच एक बार फिर इस देश की राजनीति, समाज और धार्मिक स्थिति पर ध्यान गया है. प्रधानमंत्री मोदी की मुलाकात इजरायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu और राष्ट्रपति Isaac Herzog से होनी है. ऐसे में यह जानना भी जरूरी हो जाता है कि इजरायल के अंदर अलग-अलग धर्मों के लोग किस स्थिति में रहते हैं, खासकर मुस्लिम और हिंदू समुदाय. इजरायल एक ऐसा देश है जहां धर्म और राजनीति का गहरा संबंध है. यह देश दुनिया भर के यहूदियों के लिए एक राष्ट्रीय मातृ भूमि के रूप में स्थापित हुआ था, लेकिन आज यहां कई धर्मों के लोग साथ-साथ रहते हैं. तो आइए जानते हैं कि इजरायल में मुस्लिमों की स्थिति कैसी है और हिंदू आबादी कितनी है.
इजरायल का मुख्य धर्म क्या है?
इजरायल में सबसे बड़ा धर्म यहूदी धर्म है. यहां की लगभग 73 प्रतिशत आबादी खुद को यहूदी मानती है. यहूदी धर्म न सिर्फ समाज बल्कि देश की पहचान और नीतियों पर भी गहरा प्रभाव डालता है. इसके अलावा इजरायल में इस्लाम और ईसाई धर्म के मानने वाले लोग भी बड़ी संख्या में रहते हैं. हालांकि देश में सभी धर्मों को मानने की आजादी है, लेकिन यहूदी परंपराओं का प्रभाव सार्वजनिक जीवन में साफ दिखाई देता है.
इजरायल में मुस्लिमों की आबादी कितनी है?
इजरायल के केंद्रीय सांख्यिकी ब्यूरो के अनुसार, 2024 के अंत तक इजरायल में मुस्लिमों की आबादी लगभग 18 लाख से ज्यादा है. यह कुल जनसंख्या का करीब 18 प्रतिशत है. मुस्लिम समुदाय इजरायल का सबसे बड़ा धार्मिक अल्पसंख्यक है. इनकी ज्यादातर आबादी अरब मूल की है. बड़ी संख्या में मुस्लिम लोग यरुशलम और उत्तरी इलाकों में रहते हैं. यरुशलम शहर में ही लगभग 3.8 लाख से ज्यादा मुस्लिम निवास करते हैं. मुस्लिम आबादी अपेक्षाकृत युवा है. लगभग 31 प्रतिशत मुस्लिम बच्चे 14 साल से कम उम्र के हैं. वहीं 65 साल से ज्यादा उम्र के लोगों की संख्या कम है. परिवारों का आकार भी आमतौर पर बड़ा होता है, करीब 27 प्रतिशत मुस्लिम परिवारों में 6 या उससे ज्यादा सदस्य होते हैं.
इजरायल में कैसी है मुस्लिमों की हालत?
इजरायल के मुस्लिम नागरिकों को वोट देने, चुनाव लड़ने और संसद में प्रतिनिधित्व का अधिकार है. वे देश के नागरिक हैं और कानून के अनुसार उन्हें समान अधिकार प्राप्त हैं. हालांकि कानूनी अधिकार बराबर हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर मुस्लिम समुदाय को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है. जैसे शिक्षा और रोजगार के अवसरों में असमानता, आवास और बुनियादी सुविधाओं की कमी, कुछ क्षेत्रों में विकास की धीमी रफ्तार, वहीं इजरायल और फिलिस्तीन के बीच तनाव और समय-समय पर होने वाली हिंसक घटनाओं का असर आम नागरिकों पर भी पड़ता है. हवाई हमलों और झड़पों की वजह से मुस्लिम और अन्य समुदायों के लोगों को भी असुरक्षा का सामना करना पड़ता है. कई मिश्रित शहरों में यहूदी और मुस्लिम समुदाय साथ-साथ रहते हैं और रोजमर्रा की जिंदगी में आपसी सहयोग भी देखने को मिलता है.
इजरायल में हिंदुओं की आबादी कितनी है?
इजरायल में हिंदू आबादी बहुत कम है. 2020 के आंकड़ों के अनुसार यहां लगभग 11,000 से 12,000 हिंदू रहते हैं. यह कुल जनसंख्या का करीब 0.1 प्रतिशत से भी कम हिस्सा है. यहां हिंदू समुदाय में भारत से गए प्रवासी, आईटी, स्वास्थ्य और अन्य क्षेत्रों में काम करने वाले पेशेवर, छात्र या कुछ विदेशी कामगार लोग शामिल हैं. यहां हिंदू समुदाय छोटा जरूर है, लेकिन शांतिपूर्ण ढंग से अपने धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं का पालन करता है. बड़े पैमाने पर कोई सामाजिक या राजनीतिक प्रभाव नहीं है, भारतीय समुदाय की मौजूदगी लगातार बनी हुई है.
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Source: IOCL
























