बिना बताए दूसरे राज्य से आरोपियों को लाए पुलिस तो क्या वह भी हो सकती है गिरफ्तार? जान लें कानून
एक राज्य की पुलिस दूसरे राज्य में जाकर गिरफ्तारी कर सकती है, लेकिन उसे पहले स्थानीय पुलिस को बताना और मजिस्ट्रेट से ट्रांजिट रिमांड लेना जरूरी है. आइए जानें कि इसके लिए और क्या-क्या नियम हैं.

शिमला में यूथ कांग्रेस के तीन कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी को लेकर दिल्ली और हिमाचल प्रदेश पुलिस के बीच टकराव हुआ. जानकारी के अनुसार मंगलवार रात दिल्ली और हरियाणा पुलिस की टीम ने रोहड़ू इलाके से तीन लोगों को हिरासत में लिया और उन्हें दिल्ली ले जाने लगी. बुधवार सुबह हिमाचल पुलिस ने रास्ते में दिल्ली पुलिस की गाड़ियों को रोककर पूछताछ की. मामला शिमला जिला अदालत तक जा पहुंचा.
हिमाचल पुलिस ने आरोप लगाया कि बिना पूर्व सूचना और अनुमति के गिरफ्तारी की गई. ऐसे में देर रात तक कानूनी बहस चली और अंत में दिल्ली पुलिस को ट्रांजिट रिमांड मिल गया, जिसके बाद आरोपियों को दिल्ली ले जाया गया. ऐसे में सवाल है कि क्या पुलिस दूसरे राज्य से आरोपी को बिना बताए ले आए तो क्या वो भी गिरफ्तार हो सकती है, चलिए जानें.
दूसरे राज्य से गिरफ्तारी के नियम क्या हैं?
भारत में एक राज्य की पुलिस दूसरे राज्य में जाकर गिरफ्तारी कर सकती है, लेकिन इसके लिए कानूनी प्रक्रिया का पालन जरूरी है. दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) और सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के तहत कुछ अनिवार्य कदम तय हैं. सुप्रीम कोर्ट ने डी.के. बसु बनाम राज्य मामले में गिरफ्तारी को लेकर स्पष्ट गाइडलाइन दी थीं. इन दिशा-निर्देशों का पालन हर राज्य की पुलिस को करना होता है.
इंटर-स्टेट गिरफ्तारी की कानूनी प्रक्रिया
पहला, जिस राज्य में गिरफ्तारी करनी है वहां के स्थानीय थाने को पहले सूचना देना जरूरी है. कई मामलों में स्थानीय पुलिस की मदद भी ली जाती है. दूसरा यह कि गिरफ्तारी के बाद आरोपी को उस राज्य के नजदीकी मजिस्ट्रेट के सामने पेश करना होता है. वहां से ट्रांजिट रिमांड लिया जाता है. ट्रांजिट रिमांड एक कानूनी अनुमति होती है, जिसके जरिए आरोपी को दूसरे राज्य ले जाया जा सकता है. तीसरा यह कि गिरफ्तारी की पूरी एंट्री स्थानीय पुलिस स्टेशन की डायरी में दर्ज की जाती है.
चौथा नियम यह है कि गिरफ्तारी करने वाले पुलिस अधिकारी वर्दी में हों, उनके पास पहचान पत्र हो और वे अपनी पहचान स्पष्ट करें. इन नियमों का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि किसी व्यक्ति के अधिकारों का उल्लंघन न हो और गिरफ्तारी पारदर्शी तरीके से हो सके.
नियम तोड़ने पर क्या हो सकता है?
अगर कोई पुलिस टीम बिना स्थानीय पुलिस को बताए और बिना ट्रांजिट रिमांड लिए आरोपी को दूसरे राज्य ले जाती है, तो ऐसी गिरफ्तारी अवैध मानी जा सकती है. ऐसी स्थिति में संबंधित पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई हो सकती है. स्थानीय पुलिस उन अधिकारियों के खिलाफ अपहरण, गैरकानूनी हिरासत या गलत तरीके से बंधक बनाने जैसे आरोप दर्ज कर सकती है.
सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का उल्लंघन अदालत की अवमानना माना जा सकता है. इसके अलावा विभागीय जांच और निलंबन जैसी कार्रवाई भी संभव है.
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Source: IOCL


























