PM Modi Appeal: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की देशवासियों से हालिया अपील ने देशभर में नई चर्चा छेड़ दी है. मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और विदेशी मुद्रा भंडार पर बढ़ते दबाव के बीच पीएम मोदी ने लोगों से 1 साल तक गैर जरूरी सोने की खरीदारी टालने, विदेशी यात्राएं कम करने और जरूरत पड़ने पर वर्क फ्रॉम होम अपनाने की अपील की है.
उन्होंने कहा कि मुश्किल समय में जिम्मेदारी से जीना भी देशभक्ति का हिस्सा है. पीएम मोदी के अपील के बाद देश के उन दिनों की चर्चा फिर से शुरू हो गई है, जब संकट के समय प्रधानमंत्री ने जनता से त्याग, सादगी और संयम की अपील की थी. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि देश के कौन-कौन से पीएम जनता से त्याग की मांग कर चुके हैं और किसने जनता से क्या अपील की थी.
पीएम मोदी ने लोगों से क्या-क्या अपील की?
हैदराबाद में आयोजित एक कार्यक्रम में पीएम मोदी ने लोगों से कई अहम अपील की. उन्होंने कहा कि लोग जहां संभव हो वहां सार्वजनिक परिवहन और कार पुलिंग अपनाएं, ताकि ईंधन की बचत हो सके. इसके अलावा उन्होंने गैर जरूरी विदेशी यात्राएं टालने, डेस्टिनेशन वेडिंग से बचने, खाने के तेल की खपत कम करने और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता घटाने की बात कही.
पीएम मोदी ने वोकल फॉर लोकल और आत्मनिर्भरता पर भी जोर दिया. आपको बता दे कि पीएम मोदी ने यह बात ऐसे समय में कहीं जब ईरान युद्ध और कच्चे तेल की कीमतों के कारण भारत के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ रहा है. दरअसल भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोना खरीदने वाला देश है और देश में इस्तेमाल होने वाला ज्यादातर सोना विदेश से आयात किया जाता है. हर बार जब भारत सोना खरीदता है तो उसका भुगतान डॉलर में करना पड़ता है. यही वजह है कि सरकार अब सोने की खरीद को सीधे देश की अर्थव्यवस्था और विदेशी मुद्रा भंडार से जोड़कर देख रही है.
पूर्व पीएम लाल बहादुर शास्त्री ने भी मांगा था देश से त्याग
पीएम मोदी की अपील के बाद देश के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का दौर भी याद किया जा रहा है. 1965 में भारत-पाकिस्तान युद्ध और खाद्यान्न संकट के दौरान शास्त्री जी ने देशवासियों से सप्ताह में एक दिन उपवास रखने की अपील की थी. उन्होंने सिर्फ लोगों से अपील ही नहीं की बल्कि इसकी शुरुआत अपने परिवार से की. बताया जाता है कि उन्होंने अपने सरकारी आवास के लोन में खुद हल चलाकर गेहूं बोया था. उसे दौर में उनका दिया गया नारा जय जवान जय किसान देश की आत्मनिर्भरता का प्रतीक बन गया था.
वहीं, लाल बहादुर शास्त्री की पत्नी ललिता शास्त्री ने एक इंटरव्यू में बताया था कि युद्ध के समय उनके घर में बहुत सादगी का माहौल था .पूरा परिवार एक वक्त का भोजन छोड़ देता था, ताकि अन्न बचाया जा सके. उस समय देशभर में लोग सोमवार को उपवास रखते थे और कई रेस्टोरेंट तक बंद रहते थे. कहा जाता है कि शास्त्री जी ने जो अपील देश से कि उसे पहले खुद अपने जीवन में लागू किया था.
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1962 के युद्ध में इंदिरा गांधी ने भी किया था कुछ ऐसा ही
भारत चीन युद्ध के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने लोगों से सेना की मदद के लिए दान देने की अपील की थी. उसे दौरान इंदिरा गांधी ने अपने सारे गहने राष्ट्रीय सुरक्षा कोष में दान कर दिए थे. बताया जाता है कि उनके दान किए गए गहनों का वजन करीब 336 ग्राम था. इसके बाद देशभर में महिलाओं ने अपने गहने तक दान करने शुरू कर दिए थे. बच्चे अपनी गुल्लक तोड़कर सेना सहायता कोष में पैसे जमा कर रहे थे. वहीं फिल्म इंडस्ट्री के कई बड़े कलाकार भी सेना की मदद के लिए आगे आए थे.
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