देश के नाम संबोधन ने कब-कब देश की जनता को चौंकाया, जानें जवाहरलाल नेहरू से लेकर PM मोदी तक का इतिहास
PM Modi Address To Nation LIVE: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज रात 8:30 बजे देश को संबोधित करने वाले हैं. इसी बीच आइए जानते हैं देश में प्रधानमंत्रियों के संबोधन के इतिहास के बारे में.

- प्रधानमंत्री मोदी राष्ट्र को संबोधित करेंगे, महिला आरक्षण बिल पर है चर्चा।
- आजादी से अब तक, राष्ट्र के नाम संबोधन निर्णायक रहे हैं।
- युद्ध, संकट, सुधार, आपातकाल, आर्थिक और परमाणु परीक्षण की घोषणाएं हुईं।
- मोदी ने नोटबंदी, अनुच्छेद 370, कृषि कानून वापसी की घोषणा की।
PM Modi Address To Nation: महिला आरक्षण बिल को लेकर चल रहे गरमागरम राजनीतिक माहौल के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज रात 8:30 बजे देश को संबोधित करने वाले हैं. आपको बता दें कि यह बिल लोकसभा में पास नहीं हो पाया. इसी बीच लोगों के मन में इस संबोधन को लेकर काफी उत्सुकता है. आइए जानते हैं कि देश में कब-कब प्रधानमंत्री के संबोधन ने जनता को चौंकाया है.
निर्णायक पल की एक परंपरा
आजादी के बाद से देश के नाम संबोधन सिर्फ रूटीन भाषण नहीं रहे हैं. चाहे युद्ध का समय हो, कोई संकट हो या फिर कोई बड़ा सुधार इन भाषणों ने अक्सर नागरिकों को हैरान किया है.
जवाहरलाल नेहरू का देश को संबोधन
भारत का पहला और शायद सबसे यादगार संबोधन 14 अगस्त 1947 की आधी रात को हुआ था. जवाहरलाल नेहरू ने ट्रिस्ट विद डेस्टिनी वाला एक भाषण दिया था. यह सिर्फ एक प्रतीकात्मक भाषण नहीं था. बल्कि इसने एक नए राष्ट्र के जन्म की घोषणा की थी और आजाद भारत की भावनात्मक नींव रखी थी.
युद्ध के समय दिए गए भाषणों ने राष्ट्रीय मनोबल बढ़ाया
गंभीर संघर्षों के दौरान प्रधानमंत्रियों ने देश को एकजुट करने के लिए राष्ट्रीय संबंधों का सहारा लिया. 1965 के युद्ध के दौरान लाल बहादुर शास्त्री का नारा 'जय जवान जय किसान' सैनिकों और किसानों दोनों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना. वहीं कारगिल युद्ध के समय अटल बिहारी वाजपेयी के संदेश ने नागरिकों को भारत की ताकत और संकल्प का भरोसा दिलाया.
आपातकाल की घोषणा ने सबको चौंकाया
सबसे नाटकीय और विवादित पलों में से एक 1975 में आया था. इंदिरा गांधी ने देर रात देश को संबोधित करते हुए आपातकाल की घोषणा की थी. रातों-रात नागरिकों की आजादी पर पाबंदी लगा दी गई थी और शासन प्रशासन में आए इस अचानक बदलाव से पूरा देश हक्का-बक्का रह गया था.
आर्थिक और रणनीतिक घोषणाएं
प्रधानमंत्रियों ने इन संबोधनों का इस्तेमाल बड़े नीतिगत बदलावों की घोषणा करने के लिए भी किया. मनमोहन सिंह के नेतृत्व में 1991 में हुए आर्थिक सुधारों ने भारत की अर्थव्यवस्था का कायाकल्प कर दिया. वहीं अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा 1998 में पोखरण परमाणु परीक्षण की घोषणा ने भारत को एक परमाणु शक्ति के रूप में स्थापित किया. इस घोषणा ने भारत देश के साथ-साथ पूरी दुनिया को भी हैरान किया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस परंपरा को एक नए मुकाम पर पहुंचाया. वे अक्सर ही बड़े फैसलों की घोषणा करने के लिए अचानक देश को संबोधित करते हैं. 2016 में रात 8:00 हुई नोटबंदी की घोषणा ने पूरे देश को रातों-रात चौंका दिया था. ठीक इसी तरह अनुच्छेद 370, मिशन शक्ति, कृषि कानून की वापसी और जीएसटी सुधारों जैसी नैतिक पहलों से जुड़ी सभी घोषणाएं सीधे संबोधन के जरिए ही की गई.
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Source: IOCL




























