Weird Rules Country: दुनिया के कई हिस्सों में पर्सनल स्टाइल खुद को एक्सप्रेस करने का एक तरीका है. पियर्सिंग, रंगे हुए बाल और ट्रेंडी हेयरस्टाइल रोजाना के फैशन चॉइस है. लेकिन नॉर्थ कोरिया में आपके बाल कटवाने से लेकर एक्सेसरीज तक सब कुछ सरकारी कंट्रोल में है. यहां पर स्पाइकी हेयर स्टाइल, मुलेट, रंगे हुए बाल और ज्यादातर बॉडी पियर्सिंग पर आधिकारिक तौर पर बना है. 

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क्यों है यह बैन

नॉर्थ कोरिया सरकार पश्चिम फैशन ट्रेंड्स को पूंजीवादी भ्रष्टाचार के रूप में देखती है. अधिकारियों का ऐसा मानना है कि हेयर स्टाइल, पियर्सिंग, स्किनी जींस और मॉडर्न ग्रूमिंग स्टाइल व्यक्तिवाद को बढ़ावा देते हैं. यह सरकार की सख्त समाजवादी विचारधारा से टकराता है. यहां पर विदेशी फैशन को जहर बताया गया है. अधिकारियों का मानना है कि इससे सरकार के प्रति वफादारी कमजोर हो सकती है. 

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सिर्फ सरकार द्वारा मंजूर हेयर स्टाइल की अनुमति 

नॉर्थ कोरिया में नागरिकों को सरकार द्वारा मंजूर हेयर स्टाइल की एक तय लिस्ट में से चुनना होता है. रिपोर्ट्स के मुताबिक पुरुषों को लगभग 15 स्टाइलों में से चुनने की अनुमति है और महिलाओं के पास 28 तक ऑप्शन है. यहां पर पुरुषों के लिए बालों की लंबाई आमतौर पर 5 सेंटीमीटर से ज्यादा नहीं हो सकती. हालांकि कभी-कभी बड़ी उम्र के पुरुषों को थोड़े लंबे बाल रखने की अनुमति दी जाती है. इतना ही नहीं बल्कि पुरुषों को किम जोंग उन के खास हेयर स्टाइल की कॉपी करने की भी मनाही है ताकि उनका लुक खास और अधिकार का प्रतीक बना रहे. 

बॉडी पियर्सिंग को पश्चिमी प्रतीक माना जाता है 

महिलाओं के लिए साधारण कान के पियर्सिंग को कुछ मामलों में बर्दाश्त किया जा सकता है लेकिन बॉडी पियर्सिंग पर सख्त मनाई है. नाक की बाली, होंठ के पियर्सिंग, भौंहों के स्टड और नाभि की पियर्सिंग, सभी को पश्चिम या साम्राज्यवादी प्रभाव का संकेत माना जाता है.

कैसे लागू होता है यह नियम 

नॉर्थ कोरिया दिखावे से जुड़े नियमों को लागू करने के लिए एक बड़े निगरानी सिस्टम को बनाकर रखता है. यहां पर फैशन पुलिस सड़कों, बाजारों और पब्लिक ट्रांसपोर्ट पर गश्त लगते हैं. यह फैशन पुलिस लोगों को रोककर उनके हेयर स्टाइल, कपड़े और एक्सेसरीज की जांच करती है. अगर कोई भी नियम का उल्लंघन करते हुए पाया जाता है तो उसे मौके पर ही पूछताछ के लिए हिरासत में ले लिया जाता है. 

अपराधियों पर जुर्माना लगाया जाता है या फिर उन्हें वैचारिक पुनर्शिक्षा के लिए भेज दिया जाता है. इतना ही नहीं बल्कि उनसे जबरदस्ती मजदूरी भी करवाई जा सकती है. इसी के साथ कुछ मामलों में तो नियम तोड़ने वालों को लाउडस्पीकर पर उनके नाम पता और काम करने की जगह बात कर सार्वजनिक रूप से शर्मिंदा तक किया जाता है.

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