अक्सर पार्टियों या दोस्तों के साथ बैठकों में जब बीयर के साथ चखने के रूप में मूंगफली परोसी जाती है, तो कई बार लोग छिला हुआ और भुना हुआ मूंगफली का दाना बीयर के गिलास में डाल देते हैं. शायद आपने ध्यान दिया हो कि वह सीधे नीचे बैठने के बजाय लगातार ऊपर-नीचे होने लगता है. आम देखने वालों को यह नजारा किसी डांस की तरह लग सकता है और इसे 'मूंगफली का बीयर डांस' भी कहा जाता है. हालांकि, इस दिलचस्प प्रक्रिया के पीछे कोई तिलस्म नहीं बल्कि भौतिक विज्ञान के स्पष्ट नियम काम करते हैं, जिन पर शोधकर्ता भी अध्ययन कर चुके हैं.
मूंगफली डूबने के साथ होती है शुरुआत
जब आप साबुत और छिली हुई मूंगफली को बीयर में गिराते हैं, तो वह शुरुआत में सीधे गिलास के तल में जाकर बैठ जाती है. इसका कारण दोनों के घनत्व में मौजूद अंतर है. मूंगफली का घनत्व बीयर के तरल से अधिक होता है, जिसके चलते उसका अपना वजन उसे नीचे खींच लेता है. लेकिन तली में पहुंचते ही एक नई प्रक्रिया शुरू हो जाती है, जो मूंगफली की आगे की हलचल तय करती है.
गैस के बुलबुले बनने की प्रक्रिया
बीयर को जब बोतल या कैन की सील खोलकर खुले गिलास में उड़ेला जाता है, तो उसमें घुली हुई कार्बन डाइऑक्साइड गैस दबाव कम होने के कारण बाहर निकलने का रास्ता खोजती है. मूंगफली की खुरदरी और असमान सतह इस गैस को एकत्र होने के लिए एक प्राकृतिक आधार प्रदान करती है. वैज्ञानिक शब्दावली में इस जगह को न्यूक्लिएशन साइट कहा जाता है. मूंगफली के तली में बैठते ही बीयर में मौजूद गैस के सूक्ष्म बुलबुले उसकी बाहरी त्वचा पर तेजी से जमा होने लगते हैं.
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ऊपर की तरफ क्यों उछलती है मूंगफली?
वैसे तो एक अकेला मूंगफली का दाना बीयर से भारी होता है, लेकिन जब उसके चारों तरफ बड़ी संख्या में कार्बन डाइऑक्साइड के छोटे-छोटे बुलबुले चिपक जाते हैं, तो समीकरण बदल जाता है. मूंगफली और बुलबुलों का यह संयुक्त ढांचा बीयर के तरल की तुलना में हल्का हो जाता है. इससे उस पर ऊपर की ओर लगने वाला प्लवन बल बढ़ जाता है. नतीजतन बुलबुले मूंगफली को अपने साथ खींचते हुए धीरे-धीरे सतह की तरफ ले आते हैं.
सतह पर पहुंचते ही फिर शुरू हो जाता है डांस
जैसे ही मूंगफली तैरते हुए बीयर के ऊपरी हिस्से तक पहुंचती है, वहां आते ही हवा के संपर्क में आने से उसके ऊपर चिपके बुलबुले फटने लगते हैं. जब मूंगफली पानी की सतह पर थोड़ी हिलती या पलटती है, तो उसके निचले हिस्से के बुलबुले भी फूटकर हवा में विलीन हो जाते हैं. गैस का सहारा छूटते ही मूंगफली का वजन फिर से भारी हो जाता है और वह दोबारा पेंदे की ओर डूबने लगती है. नीचे पहुंचते ही उस पर नए बुलबुले चिपकते हैं और यह चक्र फिर चालू हो जाता है.
कब खत्म होता है यह सिलसिला?
मूंगफली का यह डांस हमेशा जारी नहीं रहता है, समय बीतने के साथ जैसे-जैसे बीयर में घुली कार्बन डाइऑक्साइड गैस पूरी तरह उड़ जाती है और नए बुलबुलों का बनना बंद हो जाता है, मूंगफली की यह हलचल भी थम जाती है. इसके बाद वह बिना किसी गति के गिलास के निचले हिस्से में स्थिर होकर बैठ जाती है. बीयर में गैस की मात्रा जितनी ज्यादा होगी, बुलबुले बनने और मूंगफली के ऊपर-नीचे होने की प्रक्रिया उतनी ही देर तक चलती रहेगी.
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