पाकिस्तान से एक और महिला अब हिंदुस्तान आ पहुंची. ये महिला यहां अपने मंगेतर के साथ शादी के बंधन में बंधने के लिए आई है. महिला ने वैलिड वीजा पर वाघा-अटारी बॉर्डर से हिंदुस्तान में प्रवेश किया था. ये महिला पाकिस्तान के कराची की रहने वाली बताई जा रही है और महिला का नाम जावेरिया खानम बताया जा रहा है. इस महिला का कहना है कि वह यहां अपने परिवार वालों की मर्जी से आई है. उसे भारत के युवक के साथ शादी करनी है. लेकिन आज हम आपको बताएंगे कि कैसे पाकिस्तान में मुसलमान शादी करते हैं. क्या वहां भारत से अलग रिवाज होते हैं, आइए जानते हैं.
बता दें कि इस्लाम में निकाह एक शादी का कानूनी अनुबंध है. जिसका मतलब दूल्हे और दुल्हन के बीच एक करार नामा है. निकाह के लिए पुरुष और महिला दोनों की अनुमति होना आवश्यक है. रिपोर्ट्स के अनुसार विवाह से पहले पाकिस्तान में सगाई की रस्म अदा होती है ये एक औपचारिक समारोह जोड़े की आधिकारिक सगाई का प्रतीक होता है. इसमें दूल्हे का परिवार दुल्हन के परिवार से मिलने जाता है और उपहार और मिठाइयां दी जाती हैं. इस दरमियां शादी की तारीख तय की जाती है.
इसके बाद निकाह नामा होता है जोकि कानूनी दस्तावेज दूल्हा और दुल्हन के अधिकारों और जिम्मेदारियों को रेखांकित करता है. इस पर दोनों ही परिवार हस्ताक्षर करते हैं और इसके साक्षी इमाम होते हैं. फिर शादी से पहले होने वाले कार्यक्रम आयोजित होते हैं. जिसमें मेहंदी, संगीत, नृत्य जैसे कार्यक्रम शामिल होते हैं.
इमाम पढ़ते हैं आयतें
वहीं, विवाह समारोह में दूल्हा अपने परिवार और दोस्तों के साथ एक भव्य तरीके से विवाह स्थल पर पहुंचता है. जहां पर संगीत, नृत्य और पारंपरिक कार्य होते हैं. इस दौरान इमाम द्वारा निकाह कराया जाता है. वह कुरान की आयतें पढ़ते हैं और जोड़े को शपथ दिलाता है. निकाह के बाद दुल्हन दूल्हे के परिवार के साथ उनके घर के लिए रवाना होती है. शादी हो जाने के बाद दूल्हे का परिवार एक कार्यक्रम का आयोजन करता है जिसे वलीमा भी कहा जाता है. फिर शादी के चौथे दिन दुल्हन का परिवार लड़के के घर आता है और उन्हें उपहार और आशीर्वाद प्रदान करता है.
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