नेपाल की राजनीति में एक बार फिर हलचल मची हुई है. हाल ही में जेल से रिहा होने के बाद राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) के अध्यक्ष और पूर्व उपप्रधानमंत्री रबी लामिछाने एक बार फिर सुर्खियों में आ गए हैं. उन्हें नेपाल के अगले प्रधानमंत्री के रूप में देखा जा रहा है, लेकिन नेपाल का नागरिकता कानून उनके इस सपने में सबसे बड़ा रोड़ा बन सकता है. आइए जानते हैं कैसे दोहरी नागरिकता का यह मुद्दा रबी लामिछाने के राजनीतिक भविष्य को प्रभावित कर सकता है.

दोहरी नागरिकता ने बढ़ाई मुश्किल

कभी नेपाल के लोकप्रिय टीवी होस्ट रहे रबी लामिछाने ने 2022 में राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी की स्थापना की थी. इसके बाद उन्हें दिसंबर 2022 में उपप्रधानमंत्री और गृहमंत्री का पद मिला. लेकिन उनकी यह सफलता ज्यादा दिन नहीं टिकी. जनवरी 2023 में नेपाल की सुप्रीम कोर्ट ने दोहरी नागरिकता के आरोप में उनकी सांसदी, मंत्री पद और पार्टी अध्यक्ष का पद रद्द कर दिया. क्या कहता है कानून

दरअसल, रबी लामिछाने पर आरोप था कि उन्होंने 2014 में अमेरिकी नागरिकता हासिल की थी. नेपाल का नागरिकता कानून स्पष्ट है कि कोई भी व्यक्ति जो किसी अन्य देश की नागरिकता लेता है, वह नेपाल की नागरिकता खो देता है. लामिछाने ने दावा किया कि उन्होंने 2018 में अमेरिकी नागरिकता छोड़ दी थी, लेकिन इसके बाद उन्होंने नेपाली नागरिकता के लिए दोबारा आवेदन नहीं किया. सुप्रीम कोर्ट ने इसे आधार बनाकर उनके सभी सार्वजनिक पदों को अवैध घोषित कर दिया. हालांकि, उन्होंने साल 2023 में फिर से नेपाली नागरिकता हासिल की और अपनी पार्टी की कमान संभाली. लेकिन अगर लामिछाने फिर से अमेरिकी नागरिकता की जिद पर अड़ते हैं तो वो पीएम या डिप्टी पीएम नहीं बन पाएंगे क्योंकि उनकी इस राह में रोड़ा बनेगा नेपाल का नागरिकता कानून. 

दोहरी नागरिकता को लेकर नियम

नेपाल के संविधान के अनुसार, दोहरी नागरिकता रखने वाला व्यक्ति प्रधानमंत्री, डिप्टी प्रधानमंत्री या कोई अन्य उच्च सार्वजनिक पद नहीं संभाल सकता है. यह कानून उन लोगों पर भी लागू होता है, जिन्होंने विदेशी नागरिकता छोड़ दी हो, लेकिन नेपाली नागरिकता को दोबारा हासिल करने की प्रक्रिया पूरी नहीं की हो.

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