Milk Price Hike: मुंबई में ग्राहकों के लिए सितंबर की शुरुआत दूध की कीमतों में भारी बढ़ोतरी के साथ हुई है. 1 सितंबर 2026 से शहर में डेयरी से सीधे सप्लाई किए जाने वाले खुले भैंस के दूध की कीमत ₹9 प्रति लीटर बढ़ गई है. यही वजह है कि डेयरी ऑपरेटरों के लिए थोक कीमत ₹93 से बढ़कर ₹102 प्रति लीटर हो गई है. इसने एक बार फिर पूरे भारत में दूध की कीमत में बड़े अंतर और इस सवाल की तरफ ध्यान खींचा है कि ग्राहक असल में दूध और डेयरी उत्पाद पर कितना जीएसटी देते हैं.
पूरे भारत में दूध की कीमत अलग-अलग क्यों होती है?
पूरे देश में दूध की कीमतें एक जैसी नहीं होती. वे कई वजहों पर निर्भर होती हैं. इनमें पशु चारे की उपलब्धता और लागत, मजदूरी का खर्चा, परिवहन, स्थानीय मांग और बेचे जा रहे दूध के प्रकार शामिल हैं.
मुंबई में खुले भैंस के दूध की ऊंची कीमत चर्चा का विषय बनी हुई है. मुंबई मिल्क प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन से मिली जानकारी के मुताबिक इसकी दर ₹102 प्रति लीटर तक पहुंच गई है. श्रम की ज्यादा लागत और पशु चारे की महंगी या फिर सीमित सप्लाई इस बढ़ोतरी के मुख्य कारणों में से हैं.
हरियाणा और पंजाब जैसे उत्तरी राज्यों में स्थानीय दूध समिति और दूसरे समूहों ने भी मांग की है कि दूध की कीमतें लगभग ₹100 प्रति लीटर तय की जाए. हालांकि पैकेट बंद ब्रांडेड दूध आमतौर पर कम कीमत पर मौजूद होते हैं.
क्या ताजा दूध टैक्स फ्री है?
ग्राहकों के लिए सबसे जरूरी बातों में से एक यह है कि ताजा और पाश्चुरीकृत दूध आमतौर पर जीएसटी से मुक्त होता है जब इसे छूट के दायरे में आने वाले खुले या फिर पैकेट बंद रूप में बेचा जाता है. सरकार ने जरूरी डेयरी उत्पादों को जीएसटी के दायरे से बाहर रखा है. साथ ही उन्हें सबसे कम टैक्स श्रेणी में भी रखा गया है ताकि टैक्स की वजह से बुनियादी पोषण अनावश्यक रूप से महंगा ना हो जाए.
अल्ट्रा हाई टेंपरेचर दूध भी जीरो जीएसटी श्रेणी में आता है
अल्ट्रा हाई टेंपरेचर दूध लंबे समय तक चलने वाला दूध है जिसे खोलने से पहले पारंपरिक रेफ्रिजरेशन के बिना लंबे समय तक स्टोर किया जा सकता है.
रिपोर्ट के मुताबिक सितंबर 2025 से अल्ट्रा हाई टेंपरेचर दूध पर जीएसटी दर 5% से घटकर 0% कर दी गई थी. इसका मतलब है कि ग्राहक योग्य अल्ट्रा हाई टेंपरेचर दूध पर जीएसटी नहीं देते हैं.
पनीर, दही और लस्सी का क्या?
पनीर और छेना पर भी अनुकूल जीएसटी व्यवस्था लागू की गई है. पहले की 5% दर की तुलना में अब पहले से पैक और लेबल वाले पनीर को 0% जीएसटी में रखा गया है. इसी तरह बिना ब्रांडिंग या पैकेजिंग के बिकने वाले खुले दही, लस्सी और छाछ पर जीएसटी नहीं लगता है. हालांकि ग्राहक को इन प्रोडक्ट्स और उनके पैक्ड या फिर वैल्यू-एडेड वर्जन के बीच अंतर समझना चाहिए.
किन डेयरी प्रोडक्ट्स पर 5% जीएसटी लगता है?
कई प्रोसेस्ड डेयरी प्रोडक्ट्स 5% जीएसटी स्लैब में आते हैं. इनमें मक्खन, घी और कुछ डेयरी स्प्रेड शामिल हैं. इन पर टैक्स की दर 12% से घटकर 5% कर दी गई है. चीज को भी 5% वाली कैटेगरी में रखा गया है. इसी तरह लागू क्लासिफिकेशन के तहत मिल्क पाउडर और कंडेंस्ड मिल्क पर भी 5% जीएसटी लगता है. पैक्ड और फ्लेवर्ड डेयरी प्रोडक्ट्स पर भी 5% जीएसटी लग सकता है. इसमें बोतल बंद फ्लेवर्ड मिल्क और पहले से पैक्ड लस्सी और दही शामिल हैं.
आइसक्रीम के बारे में क्या?
आइसक्रीम जीएसटी में कटौती का एक और बड़ा उदाहरण है. रिपोर्ट के मुताबिक आइसक्रीम और फ्रोजन डेयरी डेजर्ट पर टैक्स की दर 18% से घटाकर 5% कर दी गई है. इसका मतलब है कि हालांकि आम ताजा दूध को ज्यादातर जीएसटी के दायरे से बाहर रखा गया है लेकिन प्रोसेस्ड और वैल्यू एडेड डेयरी प्रोडक्ट्स पर उनके क्लासिफिकेशन के आधार पर जीएसटी लग सकता है.
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ब्रांडेड दूध की कीमत कितनी?
बड़े नेशनल ब्रांड के पैक्ड दूध की कीमत मुंबई में खुले भैंस के दूध की ₹102 प्रति लीटर की दर से काफी कम हो सकती है. रिपोर्ट्स के मुताबिक अमूल और मदर डेयरी जैसे ब्रांड के फुल क्रीम दूध की कीमत देश के अलग-अलग हिस्सों में लगभग ₹66-₹68 प्रति लीटर है. टोन्ड मिल्क आमतौर पर लगभग ₹54 से ₹56 प्रति लीटर में मिलता है.
यह अंतर बताता है कि एक जैसे प्रोडक्ट की तुलना करना क्यों जरूरी है. खुला भैंस का दूध, पैक्ड फुल क्रीम दूध और टोन्ड मिल्क अलग-अलग प्रोडक्ट्स हैं. जिनकी प्रोडक्शन और डिस्ट्रीब्यूशन की लागत भी अलग-अलग होती है.
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