Muharram 2026: दुनिया में सबसे ज्यादा जनवरी-फरवरी वाले अंग्रेजी कैलेंडर का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन धार्मिक और सांस्कृतिक तौर भी और भी कई अन्य कैलेंडर हैं, जिनका लोग इस्तेमाल करते हैं. उन्हीं में से एक है इस्लाम धर्म का हिजरी कैलेंडर. दुनियाभर के मुस्लिम लोग इसी कैलेंडर के अनुसार अपने ईद, बदरीद, मुहर्रम और हज जैसी चीजों की तारीखें तय करते हैं. लेकिन क्या आपको पता है कि यह कैलेंडर हमारे अंग्रेजी कैलेंडर से कितना अलग होता है और इसमें अंग्रेजी कैलेंडर के जैसे दिन नहीं होते हैं. इसमें महीनों की गिनती और नए दिन की शुरुआत का समय भी पूरी तरह से अलग होता है. चलिए जानें.

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चंद्रमा की चाल

आम अंग्रेजी कैलेंडर जिसे ग्रेगोरियन कैलेंडर भी कहा जाता है, वह सूर्य की परिक्रमा पर आधारितो होता है, जबकि हिजरी कैलेंडर पूरी तरह से चंद्रमा की चाल यानि लूनर साइकिल पर काम करता है. धरती का चक्कर लगाते हुए चांद का आकार जैसे-जैसे घटता और बढ़ता है, उसी आधार पर हिजरी कैलेंडर की तारीखें घटती और बढ़ती हैं. इसीलिए इसे पूरी तरह से चांद पर आधारिक पंचांग यानि लूनर कैलेंडर कहा जाता है. 

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हिजरी कैलेंडर में एक साल में कितने दिन?

दिनों की संख्या के मामले में हिजरी कैलेंडर अंग्रेजी कैलेंडर से काफी पीछे है. जहां अंग्रेजी कैलेंडर में एक साल में 365 या लीप ईयर में 366 दिन होते हैं, वहीं हिजरी कैलेंडर में साल में कुल 354 या 355 दिन ही होते हैं. यानि कि सामान्य ग्रेगोरियन कैलेंडर के मुकाबले हिजरी कैलेंडर 11 से 12 दिन छोटा होता है. इसीलिए हर साल ईद और मोहर्रम जैसे त्योहार अंग्रेजी कैलेंडर की तारीखों के हिसाब से 10-11 दिन पहले आ जाते हैं.

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कैसे बनते हैं महीने?

हिजरी कैलेंडर में भी अंग्रेजी कैलेंडर की तरह कुल 12 महीने होते हैं, लेकिन यहां 31 दिनों का कोई महीना नहीं होता है. चंद्र चक्र के अनुसार हिजरी कैलेंडर का हर महीना या तो 29 दिनों का होता है या तो 30 दिनों का. अमावस्या के बाद जब आसमान में पहली बार नया और बारीक चांद दिखाई देता है, उसे इस्लाम में हिलाल कहा जाता है, उसी शाम से नया इस्लामी महीना माना जाता है.

कैसे तय होते हैं महीने के दिन? 

अगर किसी महीने की 29वीं तारीख की शाम को नया चांद दिखता है, तो वहीं महीना खत्म मान लेते हैं और अगला दिन नए महीने की पहली तारीख होता है. लेकिन अगर खराब मौसम की वजह से चांद नहीं दिखता है तो उस माह के 30 दिन पूरे किए जाते हैं. इसके बाद तो बिना चांद देखे ही 31वां दिन अपने आप नए महीने की पहली तारीख बन जाता है.

राज 12 बजे के बाद नहीं बदलती तारीख

ग्रेगोरियन कैलेंडर में रात 12 बजे के बाद अगली तारीख लग जाती है, लेकिन हिजरी कैलेंडर में ऐसा नहीं होता है. इसमें नए दिन की शुरुआत सूरज डूबने के साथ हो जाती है. अगर आज शाम को सूर्यास्त के बाद नया चांद दिखाई दे जाता है तो इस्लामिक मान्यता के अनुसार उसी शाम से अगले की तारीख लग जाती है और महीना भी शुरू हो जाता है.

ऋतुओं के साथ बदलता सफर

हिजरी कैलेंडर हर साल अंग्रेजी कैलेंडर 11 दिन पीछे चला जाता है. इसलिए लिए इसके महीने किसी एक खास मौसम में बंधकर नहीं रहते हैं. इसीलिए कई बार ऐसा होता है कि मुस्लिम समाज के लोग कड़ाके की ठंड में रोजे रखते हैं तो कभी तपती कड़क धूप में रोजे रखने होते हैं. करीब 33 साल के चक्र में यब कैलेंडर वापस से घूमकर उसी जगह आ जाता है.

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