हम दिन भर में हजारों शब्द बोलते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि वह कौन सा शब्द है जो पूरी दुनिया की जुबान पर सबसे ऊपर रहता है? ताज्जुब की बात यह है कि दुनिया में सबसे ज्यादा बोला जाने वाला यह शब्द किसी गंभीर दर्शन या प्राचीन ग्रंथ से नहीं निकला, बल्कि इसकी शुरुआत एक मामूली मजाक और गलत स्पेलिंग से हुई थी. आज यह शब्द भाषा की सीमाओं को तोड़कर हर देश और हर संस्कृति का हिस्सा बन चुका है. आइए जानते हैं दो अक्षरों के इस जादुई शब्द के पीछे का दिलचस्प इतिहास क्या है.

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दुनिया का सबसे लोकप्रिय शब्द 

दुनिया भर में हजारों भाषाएं और बोलियां मौजूद हैं, लेकिन OK एक ऐसा शब्द है, जिसने सबको एक सूत्र में पिरो दिया है. चाहे आप अंग्रेजी जानते हों या नहीं, लेकिन OK का मतलब हर कोई समझता है. इसे दुनिया का सबसे अधिक बोला और समझा जाने वाला शब्द माना जाता है. हम अपनी बातचीत में इसका इस्तेमाल इतनी बार करते हैं कि हमें इसका अहसास भी नहीं होता है. यह शब्द सहमति जताने, किसी बात की पुष्टि करने या सब कुछ ठीक है बताने का सबसे सरल जरिया है. 

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मजाक से हुई इस शब्द की शुरुआत

OK शब्द की उत्पत्ति की कहानी आपको हैरान कर देगी. इसकी शुरुआत साल 1839 में अमेरिका के बोस्टन शहर से हुई थी. उस दौर में लेखकों और पत्रकारों के बीच शब्दों को मजाकिया अंदाज में गलत स्पेलिंग के साथ लिखने का एक अजीब फैशन चल पड़ा था. लोग शब्दों के शॉर्ट फॉर्म के साथ प्रयोग कर रहे थे. इसी चलन के दौरान 'All Correct' को मजाकिया लहजे में 'Oll Korrect' लिखा गया और यहीं से जन्म हुआ 'OK' का.

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अखबार के पन्नों से कब निकला ओके?

इतिहासकारों के अनुसार, OK शब्द पहली बार सार्वजनिक रूप से 'बोस्टन मॉर्निंग पोस्ट' (Boston Morning Post) अखबार में इस्तेमाल किया गया था. 23 मार्च 1839 को छपे एक लेख में संपादक ने 'Oll Korrect' के संक्षिप्त रूप के तौर पर 'OK' का प्रयोग किया था. उस समय किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था कि अखबार के एक कोने में मजाक में लिखा गया यह छोटा सा शब्द एक दिन पूरी दुनिया की भाषा का सबसे जरूरी हिस्सा बन जाएगा.

ग्लोबल कैसे हुआ ओके?

अखबार के बाद इस शब्द को असली पहचान मिली साल 1840 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव से. उस समय राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार मार्टिन वान ब्यूरन का उपनाम 'ओल्ड किंडरहुक' (Old Kinderhook) था. उनके समर्थकों ने चुनाव प्रचार के दौरान 'OK' क्लब बनाया और नारा दिया 'OK is OK'. इस राजनीतिक अभियान ने 'OK' शब्द को घर-घर पहुंचा दिया. चुनाव के शोर-शराबे में यह शब्द अमेरिका के कोने-कोने में गूंज उठा और लोगों की जुबान पर चढ़ गया.

टेलीग्राफ और तकनीक का मिला साथ

जब दुनिया में संचार के माध्यम विकसित हुए, तो OK को पंख लग गए. पहले टेलीग्राफ के जरिए संदेश भेजने के दौरान कम शब्दों का इस्तेमाल जरूरी होता था, वहां 'OK' सबसे सटीक और छोटा विकल्प साबित हुआ. इसके बाद रेडियो, टेलीफोन और इंटरनेट के दौर ने इसे वैश्विक पहचान दिला दी. आज कंप्यूटर प्रोग्रामिंग से लेकर चैटिंग और रोजमर्रा की आम बातचीत तक, 'OK' के बिना संवाद अधूरा लगता है. इसकी सरलता ने ही इसे हर भाषा के साथ घुलने-मिलने में मदद की.

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