Iceland Energy: मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव का असर कच्चे तेल की सप्लाई पर पड़ा है. इसी बीच कुछ देशों ने अपने यहां तेल के भंडार ना होने के बावजूद भी काफी ज्यादा प्रगति हासिल की है. आइसलैंड और कोस्टा रिका जैसे देशों ने जीवाश्म इंधनों पर अपनी निर्भरता कम करके और लगभग पूरी तरह से नवीकरणीय ऊर्जा की तरफ मुड़कर आधुनिक अर्थव्यवस्था खड़ी की है. तेल की दौलत पर निर्भर रहने के बजाय इन देशों ने जियोथर्मल एनर्जी, जलविद्युत,‌ ग्रीन टेक्नोलॉजी और टिकाऊ बुनियादी ढांचे में भारी निवेश किया है. 

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आइसलैंड पृथ्वी के नीचे की गर्मी का इस्तेमाल करता है 

आइसलैंड की सफलता के पीछे सबसे बड़ी वजह उसका विशाल जियोथर्मल एनर्जी संसाधन है. क्योंकि यह देश एक ज्वालामुखी सक्रिय क्षेत्र में स्थित है इस वजह से पृथ्वी की सतह के नीचे काफी भारी मात्रा में गर्मी मौजूद है. आइसलैंड ने इस प्राकृतिक भूवैज्ञानिक गतिविधि को ऊर्जा के एक प्रमुख स्रोत में बदल दिया है. भूमिगत गर्म पानी और भाप को पाइपलाइन के जरिए से थर्मल पावर प्लांट तक पहुंचाया जाता है. यहां उनका इस्तेमाल बिजली और हीटिंग पैदा करने के लिए किया जाता है. दरअसल आइसलैंड के 90% से ज्यादा घरों को तेल आधारित प्रणालियों के बजाय प्राकृतिक रूप से गर्म जियोथर्मल पानी का इस्तेमाल करके गर्म किया जाता है. 

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नदियां और हिमनद भारी मात्रा में बिजली पैदा करते हैं

जलविद्युत, आइसलैंड और कोस्टा रिका में ऊर्जा उत्पादन का एक जरूरी स्तंभ है. दोनों देशों में भरपूर वर्षा होती है और यहां ऐसी नदियां हैं जो हिमनदों और पहाड़ी इलाकों से पोषित होती हैं. इन नदियों का इस्तेमाल बड़े जलविद्युत संयंत्रों को चलाने के लिए किया जाता है. यह भारी मात्रा में स्वच्छ बिजली पैदा करते हैं. 

पेट्रोल की खपत में भारी गिरावट 

जैसे-जैसे नवीकरणीय ऊर्जा का इस्तेमाल बढ़ा, पेट्रोल और डीजल पर निर्भरता धीरे-धीरे कम होती गई. आइसलैंड में इलेक्ट्रिक वाहन तेजी से आम होते जा रहे हैं और सरकारों ने ग्रीन एनर्जी से चलने वाली सार्वजनिक परिवहन प्रणालियों को सक्रिय रूप से प्रोत्साहित किया है.

कार्बन तटस्थ नीति

खास तौर से कोस्टा रिका ने अपनी पर्यावरणीय नीतियों और कार्बन तटस्थ लक्ष्यों के लिए अंतरराष्ट्रीय पहचान हासिल की है. इस देश ने उत्सर्जन कम करने, जंगलों की रक्षा करने और नवीकरणीय ऊर्जा प्रणालियों का विस्तार करने पर केंद्रित योजनाओं को शुरू किया है. ऐसी नीतियों ने विदेशी निवेश, पर्यटन और अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरणीय साझेदारियों को आकर्षित करने में मदद की है.

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