Deur Kothar Stupa: मध्य प्रदेश अपने पुराने बौद्ध स्थलों के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है. अब राज्य के एक और पुराने स्तूप की चर्चा हो रही है. यह जगह रीवा जिले में है और इसका नाम देउर कोठार है. दावा किया जाता है कि यहां का स्तूप सांची के मशहूर स्तूप से भी बड़ा और पुराना हो सकता है. देउर कोठार में कई बौद्ध स्तूप हैं. यह जगह साल 1982 में सामने आई थी. माना जाता है कि इसे सम्राट अशोक के समय यानी तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व में बनाया गया था.

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कैसे मिली इस जगह की जानकारी?

देउर कोठार मध्य प्रदेश के रीवा जिले में है. यह पूरा इलाका करीब 3 किलोमीटर में फैला हुआ है. माना जाता है कि पुराने समय में यहां से एक बड़ा व्यापारिक रास्ता गुजरता था, जिसे 'दक्षिणापथ' कहा जाता था.

इस जगह की खोज पुरातत्वविद पी.के. मिश्रा ने साल 1982 में की थी. उस समय डॉ. फणि कांत मिश्रा भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यानी ASI के भोपाल कार्यालय में काम करते थे. उनका कहना था कि यहां मिले पुराने लेख और खंभों के हिस्सों को देखकर लगता है कि यह स्तूप सांची के स्तूप से भी पुराना हो सकता है. यह जगह सारनाथ और सांची के बीच एक खास जगह पर भी स्थित है.

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खुदाई में क्या-क्या मिला?

साल 1999-2000 में यहां खुदाई की गई थी. इस दौरान कई पुराने दरवाजों के हिस्से, पुराने लेख, पत्थर की पट्टियां, खंभे और बर्तनों के टुकड़े मिले. इन चीजों को देखकर जानकारों ने माना कि पुराने समय में यह जगह भरहुत और सांची जैसी बड़ी और खास जगह रही होगी.

यहां चार मठ, 33 स्तूप और 63 चट्टानों के नीचे बनी पुरानी जगहें भी मिली हैं. मुख्य स्तूप की ऊंचाई 9 मीटर से ज्यादा है. यह ईंटों से बना है, जबकि बाकी स्तूप पत्थरों से बनाए गए हैं.

यहां मिली ईंटें भी खास हैं. इनमें कमल और फूलों जैसी अलग-अलग आकृतियां बनी हुई हैं. इनसे पता चलता है कि उस समय बौद्ध कला में ऐसी चीजों का इस्तेमाल किया जाता था. यहां 30 फीट ऊंचा एक बड़ा हिस्सा भी मिला है, जो स्तूप के चारों ओर बनी रेलिंग का हिस्सा माना जाता है.

सांची से इसकी तुलना क्यों होती है?

सांची का महास्तूप देश के सबसे मशहूर बौद्ध स्तूपों में से एक है. इसका व्यास करीब 36.6 मीटर और ऊंचाई करीब 16.46 मीटर है.

देउर कोठार में मिले पुराने सामान और पूरे इलाके को देखकर जानकारों का मानना है कि यह जगह भी अपने समय में काफी बड़ी और खास रही होगी. इसी वजह से देउर कोठार की तुलना सांची से की जाती है. इसे सांची से भी पुराना या बड़ा होने की बात भी कई बार सामने आई है. हालांकि इस बात को लेकर अभी और जांच की जरूरत है.

देउर कोठार क्यों खास?

देउर कोठार सिर्फ पुराने स्तूपों की जगह नहीं है. यह इस बात की जानकारी भी देता है कि पुराने समय में मध्य प्रदेश के इस इलाके में बौद्ध धर्म कितना फैला हुआ था.

यहां मिले पुराने ब्राह्मी लेखों से पता चलता है कि सम्राट अशोक के समय यह इलाका बौद्ध धर्म और व्यापार के लिए काफी खास रहा होगा. यहां बहुत पुरानी चट्टानों और गुफाओं पर बने चित्र भी मिले हैं. इससे पता चलता है कि इस जगह का इतिहास बौद्ध धर्म से भी पहले का हो सकता है.

इस जगह को बचाने की जरूरत

इतना पुराना और खास होने के बावजूद देउर कोठार को अभी और देखभाल की जरूरत है. पिछले कई सालों में यहां बड़े स्तर पर काम नहीं हो पाया है. इसके कारण यहां मौजूद कुछ पुराने हिस्सों को नुकसान पहुंचने का खतरा है.

जानकारों का मानना है कि अगर इस जगह की सही तरीके से देखभाल की जाए और आगे भी खुदाई की जाए, तो भारत के पुराने बौद्ध इतिहास के बारे में और जानकारी मिल सकती है. इससे मध्य प्रदेश में घूमने आने वाले लोगों के लिए भी यह जगह एक खास पर्यटन स्थल बन सकती है.

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