Lok Sabha Rule 66: महिलाओं के लिए आरक्षण और परिसीमन जैसे जरूरी और लंबे समय से अटके सुधारों को पास करने की कोशिशों के बीच केंद्र सरकार एक नई कानूनी रणनीति बना रही है. इस योजना के तहत केंद्र सरकार लोकसभा के नियम 66 को निलंबित करने पर विचार कर रही है. आइए जानते हैं कि क्या होता है यह नियम और आखिर केंद्र सरकार इसे निलंबित क्यों करना चाहती है.
क्या कहता है नियम 66?
नियम 66 इस बात को तय करता है कि लोकसभा में निर्भर या फिर संबंधित बिलों पर कैसे विचार किया जाएगा. इस नियम के मुताबिक अगर कोई एक बिल दूसरे पर निर्भर है तो उस पर तब तक चर्चा या उसे पास नहीं किया जा सकता जब तक कि मुख्य बिल सदन द्वारा पहले ही मंजूर न कर लिया गया हो. आसान शब्दों में कहें तो अगर बिल 'B' को पास होने के लिए बिल 'A' का पहले पास होना जरूरी है, तो बिल 'B' को अपनी बारी का इंतजार करना होगा.
कैसे होती है कानूनी प्रक्रिया प्रभावित?
सामान्य परिस्थितियों में नियम 66 कानून बनाने के लिए एक व्यवस्थित और क्रमबद्ध अप्रोच को पक्का करता है. यह संबंधित कानून पर विचार करने से पहले इस बात को पक्का करके भ्रम और कानूनी जटिलताओं को रोकता है कि बुनियादी कानून पहले ही पास हो जाए. हालांकि यह व्यवस्था को बनाए रखता है लेकिन जब कई बिल आपस में जुड़े होते हैं तो यह प्रक्रिया को धीमा भी कर देता है.
सरकार क्यों करना चाहती है निलंबित?
सरकार पूरी प्रक्रिया की देरी से बचने के लिए इस नियम को निलंबित करने की योजना बना रही है. इसका मुख्य मकसद संविधान (131वां संशोधन) बिल 2026, परिसीमन बिल और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) बिल को एक साथ एक ही पैकेज के रूप में पेश करना और पास करना है.
महिलाओं के लिए आरक्षण
इस कदम के पीछे एक बड़ा कारण नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लागू करने की योजना है. यह लोकसभा और राज्य विधानसभा में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण का प्रावधान करता है. क्योंकि यह नीति परिसीमन प्रक्रिया से जुड़ी है इस वजह से दोनों सुधारों को एक साथ आगे बढ़ना जरूरी है. किसी के साथ समय भी काफी ज्यादा अहम है. सरकार चाहती है कि ये सुधार 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले लागू हो जाएं. बिलों को एक साथ पास करने से समय बचेगा और यह भी पक्का हो जाएगा कि महिलाओं के लिए आरक्षण समेत नई व्यवस्था अगले आम चुनावों तक लागू हो जाए.
यह भी पढ़ें: अभी कितनी लोकसभा सीटों पर महिला सांसदों का कब्जा, आजादी के बाद कितनी बढ़ी या घटी इनकी संख्या
