Y+ Security Cover: शिव सेना (UBT) में चल रही राजनीतिक उठापटक के बीच महाराष्ट्र सरकार ने 6 बागी लोकसभा सांसदों को Y+ सुरक्षा देने का फैसला किया है. यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब उनके राजनीतिक भविष्य और एकनाथ शिंदे के गुट में शामिल होने की संभावनाओं को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक महाराष्ट्र के गृह विभाग ने राज्य पुलिस को इन सांसदों की सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने का निर्देश दिया है. इसी बीच आइए जानते हैं कि इस सुरक्षा का खर्च कौन उठाएगा.
कौन उठाएगा इस सुरक्षा का खर्च?
Y+ सुरक्षा का पूरा खर्च महाराष्ट्र सरकार द्वारा उठाया जाएगा. भारत के सुरक्षा प्रोटोकॉल सिस्टम के तहत जब खुफिया एजेंसियों द्वारा खतरे के आकलन के हिसाब से आधिकारिक तौर पर सुरक्षा दी जाती है तो इसका पूरा खर्च सरकार ही उठाती है. इसमें तैनात कर्मियों की सैलरी, गाड़ी का खर्च, पेट्रोल-डीजल का खर्च, कम्युनिकेशन के उपकरण, रहने की पूरी व्यवस्था और दूसरी लॉजिस्टिक्स जरूरतों को शामिल किया जाता है. इस वजह से इसका पूरा वित्तीय बोझ गृह विभाग और पुलिस प्रशासन के जरिए राज्य के खजाने पर पड़ता है.
Y+ सुरक्षा क्यों दी गई?
रिपोर्ट्स के मुताबिक खुफिया एजेंसियों द्वारा इन छह सांसदों को होने वाले खतरे के स्तर का आकलन करने के बाद सुरक्षा बढ़ाने की सिफारिश की गई थी. दरअसल यह राजनीतिक तनाव तब बढ़ा जब इन सांसदों ने कथित तौर पर शिवसेना (UBT) की संसदीय बैठक में हिस्सा नहीं लिया. इस वजह से यह अटकलें लगाई जाने लगी कि वे एकनाथ शिंदे के गुट में शामिल हो सकते हैं. रिपोर्ट्स में सांसदों, उनके घर और गाड़ियों कोई नुकसान पहुंचाने और उनके खिलाफ विरोध प्रदर्शन या धमकियों की संभावना का संकेत दिया गया था.
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Y+ सिक्योरिटी का क्या मतलब है?
यह सुरक्षा भारत की मान्यता प्राप्त सुरक्षा श्रेणियों में से एक है और यह माध्यम से उच्च स्तर के खतरे का सामना कर रहे लोगों को काफी सुरक्षा देती है. इस व्यवस्था के तहत आमतौर पर लगभग 11 सुरक्षाकर्मी तैनात किए जाते हैं. इसी के साथ सुरक्षा टीम में एक या फिर दो हथियारबंद कमांडो भी शामिल हो सकते हैं. साथ ही बाकी कर्मी राज्य पुलिस या फिर दूसरे सुरक्षा बलों से लिए जाते हैं. इसी के साथ घर पर और यात्रा के दौरान 24 घंटे सुरक्षा दी जाती है. सुरक्षा टीम हर गतिविधि पर नजर रखती है और स्थानीय पुलिस के साथ तालमेल बिठाती है.
सुरक्षा कवर कैसे तय किया जाता है?
सुरक्षा सिर्फ राजनीतिक आधार पर नहीं दी जाती. इसकी श्रेणी को तय करने में इंटेलिजेंस ब्यूरो और स्टेट इंटेलिजेंस डिपार्टमेंट जैसी एजेंसियों की बड़ी भूमिका होती है. ये एजेंसी खतरे के आकलन की एक रिपोर्ट तैयार करती हैं. ये एजेंसी इस बात का आकलन करती हैं कि क्या किसी व्यक्ति को राजनीतिक गतिविधियों, सार्वजनिक पहचान, कानूनी विवाद या फिर दूसरी वजह से कोई खतरा है. अगर खतरा असली और सार्वजनिक जिम्मेदारियों से जुड़ा हुआ माना जाता है तो आमतौर पर सरकार के खर्चे पर सुरक्षा दी जाती है.
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