LPG Supply Crisis: मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव ने दुनिया के सबसे अहम जरूरी सप्लाई मार्गों में से एक को बाधित कर दिया है. इस तनाव का असर होर्मुज स्ट्रेट से भारत में आ रही एलपीजी सप्लाई पर पड़ रहा है. यह संघर्ष 47 दिनों से ज्यादा समय से चल रहा है. इस वजह से सप्लाई चेन पर काफी ज्यादा दबाव पड़ा है. अब इस मार्ग को फिर से खोलने पर चर्चा तेज हो रही है. मगर लोगों के मन में एक सवाल उठ रहा है कि इसके बाद भारत में एलपीजी की सप्लाई को सामान्य होने में कितना समय लगेगा? आइए जानते हैं क्या है इस सवाल का जवाब.

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धीरे-धीरे सुधार 

भले ही होर्मुज स्ट्रेट फिर से खुल जाए मगर एलपीजी की सप्लाई रातों-रात सामान्य नहीं होगी. विशेषज्ञों का ऐसा कहना है कि शिपमेंट के बैकलॉग, लॉजिस्टिक्स में देरी और बंदरगाहों पर भीड़भाड़ की वजह से उपभोक्ताओं को उपलब्धता में कोई वास्तविक सुधार देखने में कई दिन से लेकर कुछ हफ्ते तक का समय लग सकता है. 

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शिपिंग में देरी से सप्लाई धीमी होगी 

सामान्य परिस्थितियों में भी पश्चिम एशिया से एलपीजी के शिपमेंट को भारत पहुंचने में समय लगता है. अभी जहाज फंसे हुए हैं और उनका शेड्यूल बिगड़ गया है. इस वजह से सुधार की प्रक्रिया में और देरी होगी. मंजूरी मिलने के बाद भी जहाजों को अपनी यात्रा पूरी करनी होगी और माल उतारना होगा.

बैकलॉग में बढ़ोतरी 

अभी लगभग 15 भारतीय ध्वज वाले जहाज होर्मुज में फंसे हुए हैं. जब तक इन जहाजों को मंजूरी नहीं मिल जाती और वे फिर से चलना शुरू नहीं कर देते तब तक बैकलॉग का असर सप्लाई पर पड़ता रहेगा. 

खाड़ी देशों से इंपोर्ट पर निर्भरता 

भारत अपनी एलपीजी का लगभग 60% हिस्सा इंपोर्ट करता है. इसका एक बड़ा हिस्सा ऐतिहासिक रूप से होर्मुज के रास्ते से ही आता रहा है. हालांकि इंपोर्ट के स्रोतों में विविधता लाने के प्रयास चल रहे हैं, लेकिन खाड़ी देशों से आयात में अचानक आई गिरावट ने सप्लाई में एक ऐसा अंतर पैदा कर दिया है जिसे तुरंत भरा नहीं जा सकता. 

आपूर्तिकर्ता देशों में उत्पादन को लेकर अनिश्चितता

एक और अहम वजह कतर जैसे देशों में एलपीजी उत्पादन सुविधाओं की स्थिति है. अगर वहां का बुनियादी ढांचा क्षतिग्रस्त हो गया है या फिर उत्पादन कम हो गया है तो पूरी सप्लाई वापस से चालू करने में कई महीने लग सकते हैं. सबसे खराब स्थिति में पूरी स्थिति सामान्य होने में एक महीने से लेकर 1 साल तक का समय लग सकता है.

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