Jag Vikram LPG Tanker: होर्मुज स्ट्रेट से कितनी LPG लेकर आ रहा 'जग विक्रम', इससे कितने दिन चलेगा भारत का काम
Jag Vikram LPG Tanker: अमेरिका और ईरान के बीच हुए 14 दिनों के सीजफायर का बड़ा फायदा भारत को मिला है. भारतीय एलपीजी टैंकर 'जग विक्रम' गैस लेकर होर्मुज स्ट्रेट पार कर चुका है.

- भारतीय एलपीजी टैंकर 'जग विक्रम' ने सुरक्षित रूप से होर्मुज स्ट्रेट पार किया.
- टैंकर 20,000 टन एलपीजी लेकर भारत की ओर तेजी से बढ़ रहा है.
- होर्मुज स्ट्रेट पश्चिम एशिया में तनाव के कारण अत्यधिक खतरनाक मार्ग था.
- यह आपूर्ति भारत की रसोई गैस की जरूरतों को पूरा करने में सहायक होगी.
Jag Vikram LPG Tanker: पश्चिम एशिया में जारी भारी तनाव और युद्ध के बाद जब अमेरिका-ईरान के बीच दो हफ्ते के सीजफायर का एलान हुआ, तो दुनिया ने राहत की सांस ली. इसी कूटनीतिक सफलता के बीच भारत के लिए एक बड़ी खबर आई है. भारतीय एलपीजी टैंकर 'जग विक्रम' ने सुरक्षित रूप से दुनिया के सबसे खतरनाक और महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते होर्मुज स्ट्रेट को पार कर लिया है. यह जहाज भारत के लिए गैस की वह संजीवनी लेकर आ रहा है, जिसकी कमी से देश में रसोई गैस का संकट खड़ा हो सकता था. आइए जानें कि इससे भारत का काम कितने दिन चलेगा.
होर्मुज स्ट्रेट से भारत के लिए निकली बड़ी राहत
भारतीय ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से शनिवार की सुबह एक बड़ी कामयाबी लेकर आई. भारतीय एलपीजी टैंकर 'जग विक्रम' ने सफलतापूर्वक होर्मुज स्ट्रेट को पार कर लिया है. पश्चिम एशिया में जारी जंग के कारण यह समुद्री रास्ता पूरी तरह से जहाजों के लिए असुरक्षित और लगभग बंद हो गया था, लेकिन अमेरिका और ईरान के बीच हुए दो हफ्ते के संघर्ष विराम ने एक खिड़की खोल दी, जिसका लाभ उठाते हुए भारत का यह टैंकर अब सुरक्षित रूप से ओमान की खाड़ी में पहुंच चुका है और तेजी से भारतीय तट की ओर बढ़ रहा है.
कितनी एलपीजी गैस लेकर आ रहा जग विक्रम?
'जग विक्रम' एक मध्यम आकार का गैस कैरियर जहाज है, जिसकी कुल क्षमता करीब 26,000 टन की है. जानकारी के अनुसार, इस समय यह जहाज लगभग 20,000 टन एलपीजी (रसोई गैस) लेकर आ रहा है. भारत जैसे बड़ी आबादी वाले देश के लिए यह मात्रा बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह न केवल सप्लाई चेन को सुचारू बनाए रखती है, बल्कि बाजार में गैस की किल्लत की किसी भी आशंका को भी खत्म कर देती है. यह जहाज शुक्रवार रात से शनिवार सुबह के बीच इस अहम रास्ते से गुजरने में सफल रहा.
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क्यों खतरनाक है होर्मुज स्ट्रेट का रास्ता?
दुनिया के नक्शे पर होर्मुज स्ट्रेट एक बहुत ही संकरा, लेकिन रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण जलमार्ग है. दुनिया के कुल कच्चे तेल की सप्लाई का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी छोटे से रास्ते से होकर गुजरता है. ईरान और ओमान के बीच स्थित यह मार्ग युद्ध के दौरान सबसे पहले प्रभावित होता है. जब इजरायल और ईरान से जुड़ी जंग शुरू हुई थी, तब इस रास्ते पर जहाजों की आवाजाही लगभग ठप हो गई थी, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में कोहराम मच गया था और तेल-गैस की कीमतें आसमान छूने लगी थीं.
भारत के लिए क्यों जरूरी थी यह गैस?
भारत अपनी रसोई गैस और ईंधन की जरूरतों के लिए खाड़ी देशों पर बहुत ज्यादा निर्भर है. होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने का सीधा मतलब था कि भारत आने वाले गैस टैंकर या तो फंस जाते या उन्हें बहुत लंबा रास्ता तय करना पड़ता, जिससे परिवहन लागत बढ़ जाती. 'जग विक्रम' का सुरक्षित निकलना इस बात का संकेत है कि सीजफायर के दौरान भारत अपनी रुकी हुई सप्लाई को तेजी से बहाल कर रहा है. यह 20 हजार टन गैस देश के उन करोड़ों घरों के लिए राहत की खबर है जो पूरी तरह एलपीजी सिलेंडर पर निर्भर हैं.
इससे कितने दिन चलेगा भारत का काम?
इतने टन गैस से भारत का काम कितने दिन चलने वाला है, इसका गणित थोड़ा रोचक है. भारत की विशाल आबादी और खपत को देखते हुए एक अकेले टैंकर की गैस का प्रभाव इस प्रकार है-
दैनिक घरेलू खपत: भारत में रोजाना लगभग 51.5 लाख घरेलू सिलेंडरों की डिलीवरी होती है. एक मानक सिलेंडर में 14.2 किलो गैस होती है.
कितने दिन चलेगा काम: 20,400 टन गैस का मतलब है लगभग 14.3 लाख सिलेंडर (20,400,000 किलो / 14.2 किलो). अगर केवल इस जहाज की गैस पर निर्भर रहें, तो यह पूरे भारत की घरेलू खपत का लगभग 6.5 से 7 घंटे (एक दिन का करीब 28% हिस्सा) का काम चला सकती है.
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Source: IOCL




























