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Live in relationship law: शादीशुदा होते हुए भी क्या दूसरी औरत के साथ लिव-इन में रह सकता है पुरुष, जानें क्या है कानून?

कविता गाडरी   |  प्रांजुल श्रीवास्तव  |  28 Mar 2026 05:54 PM (IST)

live in relationship law: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि अगर शादीशुदा पुरुष किसी बालिग महिला के साथ उसकी सहमति से लिव-इन रिलेशनशिप में रहता है तो इसे अपराध नहीं माना जा सकता.

Live in relationship law: शादीशुदा होते हुए भी क्या दूसरी औरत के साथ लिव-इन में रह सकता है पुरुष, जानें क्या है कानून?

भारत में लिव इन रिलेशनशिप कानून

live in relationship law: हमारे भारतीय समाज में शादी को एक मजबूत और भरोसेमंद रिश्ता माना जाता है, लेकिन बदलते कानूनी दृष्टिकोण ने इस विषय पर नई बस छेड़ दी है. अब सवाल उठने लगा है कि क्या शादीशुदा पुरुष किसी दूसरी महिला के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रह सकता है और यह कानूनी अपराध है या नहीं? इसे लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक अहम टिप्पणी की है. इलाहाबाद हाई कोर्ट ने साफ कहा है कि अगर कोई शादीशुदा पुरुष किसी बालिग महिला के साथ उसकी सहमति से लिव-इन रिलेशनशिप में रहता है तो इसे अपराध नहीं माना जाए माना जा सकता. ऐसे में चलिए अब आपको बताते हैं कि शादीशुदा होते हुए भी पुरुष दूसरी औरत के साथ लिव-इन में रह सकता है और इसे लेकर कानून क्या कहता है.   ये भी पढ़ें-Donald Trump On NATO: जिस नाटो पर 'लाल' हो रहे ट्रंप, कभी उससे अलग हो गया था यह देश; क्या था कारण?

इलाहाबाद हाईकोर्ट का आया बड़ा फैसला   अदालत ने स्पष्ट किया है कि जब कानून के तहत कोई अपराध नहीं बनता तो सामाजिक नैतिकता या धारणा अदालत के फैसले को प्रभावित नहीं कर सकती. यह मामला उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले से जुड़ा है. जहां एक महिला के परिवार ने आरोप लगाया था कि एक शादीशुदा पुरुष से उसे बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया. इस पर पुलिस ने मामला दर्ज किया था. हालांकि कोर्ट में दोनों पक्षों ने बताया कि वह बालिग है और अपनी मर्जी से साथ रह रहे हैं. महिला ने यह भी कहा कि उसके परिवार से जान का खतरा है. इस पर अदालत ने मामले को गंभीर मानते हुए याचिका स्वीकार की और उसे कपल को राहत दी. हाई कोर्ट ने आदेश दिया कि अगले निर्देश तक याचिकाकर्ताओं को गिरफ्तार नहीं किया जाएगा. साथ ही पुलिस को उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया. इसके अलावा अदालत ने अपनी फैसले में कहा कि नैतिकता और कानून अलग-अलग विषय है, अगर कोई संबंध दो बालिगों की सहमति से बना है और उसमें कोई कानूनी अपराध नहीं है तो सिर्फ सामाजिक सहमति के आधार पर कार्रवाई नहीं की जा सकती है.

पहले क्या था कानून?

भारतीय दंड संहिता की धारा 497 के तहत पहले व्यभिचार को अपराध माना जाता था. इस धारा के अनुसार, शादीशुदा पुरुष और महिला के बीच बाहरी संबंधों को अपराध माना जाता था. अगर कोई शादीशुदा व्यक्ति किसी दूसरे के साथ संबंध बनाता तो उसके खिलाफ केस दर्ज हो सकता था. हालांकि इस कानून को लेकर   यह भी दलील दी जाती रही है कि यह महिलाओं को पति की संपत्ति मानता है, लेकिन 2018 में  जोसेफ शाइन बनाम भारत संघ मामले में सुप्रीम कोर्ट के जजों की संविधान पीठ ने इस पर 158 साल के पुराने कानून को असंवैधानिक घोषित कर दिया. कोर्ट ने कहा था कि पति अपनी पत्नी का मालिक नहीं है और दो वयस्कों के बीच सहमति से बने संबंधों को अपराध नहीं माना जा सकता. वहीं कोर्ट के अनुसार व्यभिचार अपराध नहीं है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है की पत्नी के पास कोई अधिकार नहीं है. ऐसे मामलों में पत्नी तलाक की मांग कर सकती है और भरण-पोषण का अधिकार भी रखती है. साथ ही आपको बता दें कि बिना तलाक लिए दूसरी शादी करना अब भी कानूनन अपराध है.

बीएनएस के अनुसार अब क्या है स्थिति?

नए कानून भारतीय न्याय संहिता यानी बीएनएस में भी व्यभिचार को अपराध के रूप में शामिल नहीं किया गया है. यानी सहमति से बने लिव-इन संबंधों पर आपराधिक कार्रवाई का प्रावधान नहीं है. हालांकि किसी महिला को बहला-फुसलाकर ले जाने या जबरन संबंध बनाने जैसे मामलों में बीएनएस की धारा 87 लागू हाे सकती है जिसमें 10 साल की सजा, जुर्माना या दोनों ही हो सकते हैं.  

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Published at: 28 Mar 2026 05:54 PM (IST)
Tags:allahabad high courtlive in relationshiplive in relationship law in Indiamarried man live in legality
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