Largest Temple Bell: आपने अक्सर ध्यान दिया होगा कि आप जब भी किसी मंदिर में जाते हैं, तो सबसे पहले मंदिर में सुनाई देने वाली घंटियों की ध्वनि को हिंदू धर्म में बहुत शुभ माना जाता है. कहा जाता है कि मंदिर में घंटा बजाने से वातावरण पवित्र होता है और भक्तों की उपस्थिति भगवान तक पहुंचती है. वहीं हमारे देश में लाखों मंदिरों में विशाल घंटों की स्थापना की गई है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि हमारे देश में सबसे बड़ा घंटा किस मंदिर में लगा है. अगर नहीं जानते तो चलिए आज हम आपको बताते हैं कि देश के किस मंदिर में सबसे बड़ा घंटा लगा है और इसकी आवाज कितने किलोमीटर तक गूंजती है. 

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मंदसौर के पशुपतिनाथ मंदिर में लगा है सबसे बड़ा घंटा 

मध्य प्रदेश के मंदसौर में भगवान पशुपतिनाथ मंदिर परिसर के पास सहस्त्र शिवलिंग मंदिर में करीब 3700 किलोग्राम वजन का महा घंटा स्थापित किया गया है. इसे देश के सबसे बड़े मंदिर घंटों में शामिल माना जाता है. इसकी लंबाई लगभग 7.5 फीट और व्यास करीब 6.5 फीट है. विशाल आकार की वजह से यह घंटा मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. 

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घंटा बनाने के लिए जुटाए घर-घर से पीतल और तांबा 

इस महा घंटे के निर्माण के पीछे वर्षों की मेहनत जुड़ी है. श्री कृष्ण कामधेनु सामाजिक एवं धार्मिक संस्था ने मंदिर में विशाल घंटा लगाने का संकल्प लिया था. इसके बाद संस्था के सदस्यों ने कई सालों तक जिले के गांव और शहरों में यात्राएं निकालकर लोगों से पुराने पीतल और तांबे के बर्तन इकट्ठा किए. श्रद्धालुओं ने धातु के साथ आर्थिक सहयोग भी दिया. करीब 3 सालों तक चले इस अभियान के बाद इकट्ठी हुई धातुओं को गुजरात के अहमदाबाद भेजा गया. जहां विशेष कारीगरों ने करीब 6 महीने तक लगातार काम करके इस विशाल घंटे का निर्माण किया. निर्माण के बाद उसे प्राकृतिक तरीके से ठंडा करने के लिए कुछ समय तक जमीन में दबाकर भी रखा गया था. 

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करीब 36 लाख रुपये की लागत से तैयार हुआ महा घंटा 

महा घंटा तैयार करने में लगभग 36 लाख रुपये खर्च हुए. इसमें दान में मिली धातु के अलावा एक्स्ट्रा सामग्री और निर्माण लागत भी शामिल रही. घंटा तैयार होने के बाद इसे विशेष ट्रॉली के जरिए गुजरात से मंदसौर लाया गया, जहां श्रद्धालुओं ने इसका स्वागत किया है. वहीं 37 क्विंटल के इस वजनी घंटे को मंदिर में स्थापित करना सबसे बड़ी चुनौती थी. इसके लिए मजबूत लोहे का विशेष स्ट्रक्चर तैयार किया गया, जो इस भारी वजन को संभाल सके. घंटा लगाने से पहले करीब 3 मीटर गहरी नींव तैयार की गई और फिर भारी क्रेन की मदद से इसे स्टैंड पर स्थापित किया गया.

कई किलोमीटर तक सुनाई देती है आवाज 

बताया जाता है कि इस विशाल घंटे की सबसे बड़ी खासियत इसकी ध्वनि है. कहा जाता है कि जब इसे बजाया जाता है, तो इसकी गूंज कई किलोमीटर दूर तक सुनाई देती है. श्रद्धालुओं के लिए रस्सी की व्यवस्था की गई है, जिससे वो आसानी से घंटा बजा सके. हालांकि सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए घंटे के ठीक नीचे जाने पर रोक रखी गई है.

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