रामायण में जब लंका का वर्णन आता है, तो वह सिर्फ सोने से सजी भव्य नगरी के रूप में सामने नहीं आती, बल्कि उसके आसपास हरियाली, पेड़-पौधों, फलों और फूलों से भरे उद्यानों का भी जिक्र मिलता है. वाल्मीकि रामायण के सुंदरकांड में हनुमान जब लंका पहुंचते हैं, तो उन्हें वहां कई तरह के पेड़, फल-फूलों से भरे उपवन, तालाब और सुंदर वाटिकाएं दिखाई देती हैं. इन वर्णनों से अंदाजा लगाया जा सकता है कि लंका का प्राकृतिक वातावरण काफी समृद्ध और हराभरा माना गया था.

Continues below advertisement

हालांकि रामायण में आज की तरह मिट्टी, प्रति एकड़ पैदावार या खेती का विस्तृत आंकड़ा नहीं दिया गया है. इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि वहां की जमीन कितनी उपजाऊ थी. लेकिन अलग-अलग प्रसंगों में जिस तरह फलों, अनाज, पेड़ों और वनस्पतियों का उल्लेख मिलता है, उससे उस समय के लंका क्षेत्र की वनस्पति का अंदाजा जरूर लगाया जा सकता है. खास बात यह है कि वहां केवल सजावटी पौधे ही नहीं, बल्कि फल देने वाले पेड़ों और उपयोगी वनस्पतियों की भी भरपूर मौजूदगी बताई गई है.

फलों से लदे रहते थे पेड़

वाल्मीकि रामायण के सुंदरकांड में लंका के आसपास जिन पेड़ों का वर्णन मिलता है, उनमें खजूर, प्रियाल, नींबू, कदंब और केले जैसे पेड़ शामिल हैं. कई पेड़ों पर अलग-अलग मौसमों के फूल और फल लगे होने की बात कही गई है. इसका मतलब यह है कि लंका की प्राकृतिक संपदा में फलदार वनस्पतियों की बड़ी भूमिका थी. युद्धकांड में भी लंका के बाग-बगीचों का बेहद सुंदर वर्णन मिलता है. वहां चंपा, अशोक, बकुल, ताल, तमाल, नागकेसर और कई अन्य पेड़ों का उल्लेख है. इन पेड़ों पर फूल और फल लगे होने की बात कही गई है. कुछ उद्यानों को ऐसा बताया गया है जहां अलग-अलग ऋतुओं में फूल और फल मौजूद रहते थे.

Continues below advertisement

यह भी पढ़ें: Tirangi Barfi: इस मिठाई ने दिया था भारत छोड़ो आंदोलन में योगदान, जानें इसका इतिहास?

लंका में अनाज की खेती 

रामायण में लंका के संदर्भ में फलों और बगीचों का वर्णन काफी स्पष्ट है, लेकिन धान, गेहूं या गन्ने जैसे खेतों की विस्तृत जानकारी लंका के लिए सीधे नहीं मिलती. इसलिए इन फसलों को लंका की प्रमुख कृषि फसल मानना सही नहीं होगा. रामायण में विभिन्न क्षेत्रों की वनस्पतियों का वर्णन करते हुए नीवार यानी जंगली धान का उल्लेख मिलता है. इसके अलावा रामायण की वनस्पति संबंधी अध्ययनों में चावल, जौ और गेहूं जैसी अनाज फसलों का भी उल्लेख मिलता है.

लंका में बागवानी का था खास महत्व

लंका के वर्णनों से सबसे ज्यादा बात वहां के उपवनों और वाटिकाओं की है. हनुमान जब लंका में प्रवेश करते हैं, तो उन्हें जगह-जगह सुंदर बगीचे और फल-फूलों से भरे पेड़ दिखाई देते हैं. इन उद्यानों में तालाब भी थे, जिनमें कमल और दूसरे जलीय पौधों का उल्लेख मिलता है. रामायण में माता सीता के लंका में रहने के दौरान अशोक वाटिका का प्रसंग आता है. इसे सिर्फ एक साधारण बगीचा नहीं, बल्कि बेहद सुंदर और घने वृक्षों से युक्त स्थान के रूप में वर्णित किया गया है.

यह भी पढ़ें: किसी राज्य में कैसे होता है हाई कोर्ट का सेटअप, क्या है प्रोसेस?