बिहार में हाल ही में एक बड़े सिम बॉक्स साइबर फ्रॉड गिरोह का पर्दाफाश हुआ है, जो रोजाना सैकड़ों लोगों को फर्जी कॉल्स के जरिए ठग रहा था. ये फ्रॉड ना केवल भारतीय बल्कि विदेशियों के लिए भी समस्या बना हुआ है. आखिर क्या है यह सिम बॉक्स और कैसे यह इतने बड़े पैमाने पर ठगी रोजाना लोगों को ठकी का शिकार बनाता है चलिए जानते हैं.

कैसे हो रही ठगी की कॉल?

सिम बॉक्स एक ऐसी डिवाइस है जिसमें कई सिम कार्ड्स डाली जा सकती हैं जिससे सर्विलांस भी कंफ्यूज हो जाता है. जांच में पाया गया कि एक सिम बॉक्स के जरिए एक साथ एक ही क्लिप में एक हजार से ज्यादा मैसेज भेजे जा सकते हैं. इस मैसेज से किसी भी तरह की आपराधिक साजिश भी की जा सकती है. साइबर ठग इसकी मदद से अंतरराष्ट्रीय कॉल्स को स्थानीय नंबरों में कन्वर्ट करते हैं, जिससे कॉल करने वाले की पहचान छिप जाती है. जिससे ऐसा लगता है कि ये कॉल स्थानीय नंबर से आई है और इसका फायदा ये भी है कि इससे कॉल के इंटरनेशनल के बजाय लोकल चार्ज लगते हैं. जिससे टेलीकॉम इंडस्ट्री को भी नुकसान होता है. सिम बॉक्स क्राइम नेटवर्क को लेकर एजेंसियां इसलिए ज्यादा अलर्ट हैं क्योंकि इस फ्रॉड नेटवर्क का जाल कई राज्यों में फैलता चला जा रहा है. 

विदेशी सरगनाओं के साथ चलाते थे तंत्र बिहार के भोजपुर जिले के नारायणपुर में बरामद चार सिम बॉक्स में 261 सिम का इस्तेमाल हो रहा था, जांच में पाया गया कि इन सिम कार्ड की खरीद पश्चिम बंगाल के मालदा से की गई थी. ईओयू की जांच में पता चला कि इस सिम बॉक्स के माध्यम से इंटरनेशनल कॉल को लोकल कॉल में बदल दिया जाता था जिससे लोग आसानी से साइबर ठगों के जाल में फंस जाते थे. इस गिरोह ने चीन और वियतनाम से 8 सिम बॉक्स डिवाइस मंगवाए थे, जिनकी मदद से रोजाना 10,000 से 12,000 फर्जी कॉल्स किए जाते थे. यह गिरोह सोशल मीडिया और टेलीग्राम ग्रुप्स के जरिए विदेशी साइबर अपराधियों से संपर्क में था. इन विदेशी सरगनाओं के साथ मिलकर वो साइबर ठकी का पूरा तंत्र चलाते थे. ठग फर्जी सरकारी योजनाओं, लॉटरी या बैंक धोखाधड़ी जैसे तरीकों से लोगों को लूटते थे.

साइबर ठगी से कैसे बचें अनजान नंबरों से आने वाली कॉल्स पर भरोसा न करें, खासकर अगर कोई सरकारी योजना या लॉटरी का लालच दे. अपने बैंक खाते या OTP की जानकारी कभी शेयर न करें. अगर आपको ऐसी कॉल्स आती हैं, तो तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन या साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें.

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