टोंगा प्रशांत महासागर में स्थित एक छोटा द्वीपीय देश है. यह देश अपने खास धार्मिक और सामाजिक नियमों के लिए जाना जाता है. टोंगा के संविधान में स्पष्ट प्रावधान है कि रविवार को Sabbath Day यानी पवित्र दिन के रूप में मनाया जाएगा. इस दिन आम व्यावसायिक कामकाज पर रोक रहती है. 

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क्या कहता है कानून?

टोंगा के संवैधानिक नियमों के अनुसार रविवार को कोई भी व्यक्ति दुकान, व्यापार, दफ्तर या अन्य व्यावसायिक गतिविधि नहीं चला सकता है. यदि कोई व्यक्ति खुले तौर पर काम करते हुए पकड़ा जाता है, तो इसे कानून का उल्लंघन माना जाता है. ऐसे मामलों में जुर्माना लगाया जा सकता है और गंभीर स्थिति में जेल की सजा भी हो सकती है.

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यह नियम केवल सलाह नहीं, बल्कि कानूनी प्रावधान है. पुलिस प्रशासन इस कानून को लागू करता है. देश के शासक और प्रशासनिक अधिकारी भी लोगों से अपील करते हैं कि रविवार को काम न करें और धार्मिक गतिविधियों में भाग लें.

किन सेवाओं को मिली छूट?

हालांकि यह नियम सख्त है, लेकिन जरूरी सेवाओं को इससे बाहर रखा गया है. अस्पताल और मेडिकल सेवाएं, पुलिस और सुरक्षा सेवाएं, बिजली और पानी की सप्लाई, और आपातकालीन कार्यों को रविवार के प्रतिबंध से छूट दी गई है. इन सेवाओं को इसलिए अनुमति है ताकि आम जनता को जरूरी सुविधाओं में परेशानी न हो.

क्या कहता है धार्मिक आधार?

टोंगा की आबादी मुख्य रूप से ईसाई धर्म को मानने वाली है. ईसाई परंपरा में रविवार को विश्राम और प्रार्थना का दिन माना जाता है. इसी धार्मिक मान्यता के आधार पर यह कानून बनाया गया है. यहां के लोग रविवार को चर्च जाते हैं, परिवार के साथ समय बिताते हैं और सामान्य कामकाज से दूर रहते हैं. 

अन्य देशों से अलग व्यवस्था

दुनिया के कई देशों में रविवार को कुछ पाबंदियां देखने को मिलती हैं. उदाहरण के तौर पर Germany और Poland में कई जगह रविवार को दुकानें बंद रहती हैं, लेकिन वहां काम करने पर जेल का प्रावधान नहीं है. टोंगा में यह नियम अधिक सख्त है, क्योंकि यहां इसे संवैधानिक स्तर पर लागू किया गया है. 

परंपरा के आधार पर कानून

टोंगा का यह कानून दिखाता है कि अलग-अलग देशों में धार्मिक परंपराओं के आधार पर कानून बनाए जा सकते हैं. भारत जैसे देशों में रविवार को आम तौर पर छुट्टी होती है, लेकिन काम करना अपराध नहीं है. टोंगा में स्थिति अलग है, जहां रविवार को काम करना कानूनन गलत माना जाता है.

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