Khushal Khan Khattak Defeated Aurangzeb: हाल ही में पाकिस्तानी ट्रेन को बलूच के लड़ाकों ने हाईजैक कर लिया और पाकिस्तानी सेना को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया. बलूचिस्तान और अफगानिस्तान के कबीलाई लड़ाके हमेशा से बाहरी ताकतों के लिए सिरदर्द बनकर उभरे हैं. पाकिस्तान से लेकर मुगल सम्राट औरंगजेब तक इन्होंने सभी को कड़ी चुनौती दी है. बीएलए ने पहली बार पाकिस्तान को भारी नुकसान नहीं पहुंचाया है, इससे पहले औरंगजेब ने भी इन लड़ाकों से मुंह की खाई है. 

खुशल खान खट्टक ने दिल्ली सल्तनत के खिलाफ किया था विद्रोह

मुगल साम्राज्य को उस दौर में सबसे ज्यादा ताकतवर बादशाह माना जाता था. औरंगजेब ने बड़े-बड़े लड़ाकों को हराया था, लेकिन उसको भी इस इलाके में कबीलाई विरोध का सामना करना पडा. भीमसेन सक्सेना को औरंगजेब का करीबी माना जाता था, उन्होंने तारीख-ए-दिलकुशा में लिखा कि औरंगजेब के शासनकाल में खुशल खान खट्टक और भागू के नेतृत्व में पश्तून कबीले के लड़ाकों ने दिल्ली सल्तनत के खिलाफ विद्रोह किया था. इतिहास में ये कबीलाई लड़ाके किसी के आगे नहीं झुके और हर दौर में इन्होंने सत्ता को चुनौती दी. 

बलूच के लड़ाकों ने औरंगजेब को दी शिकस्त

पश्तून कबीले के लड़ाकों द्वारा छेड़े गए इस विद्रोह में मुगलों के कई सैनिक मारे गए. आखिरकार औरंगजेब को इन लड़ाकों के सामने झुकना पड़ा और इनसे संधि करनी पड़ी. खुशल खान खट्टक को लेकर कहा जाता है कि वो न सिर्फ एक जुझारू योद्धा थे, बल्कि एक कवि भी थे, जिसने पश्तूनों की आजादी को लेकर संघर्ष किया था. इन्होंने मुगलों को खैबर पख्तूनख्वा इलाके में शिकस्त दी थी.

महान योद्धा और कवि था खुशल खान

खुशल खान एक महान पश्तून योद्धा था, लेकिन जब मुगलों ने उस पर आक्रमण किया तो वो विद्रोह पर उतर आया और उसने पश्तून जनजाति को इकट्ठा करके मुगलों के खिलाफ विद्रोह शुरू कर दिया. उसने कई लड़ाइयों में मुगलों को हराया, जिससे औरंगजेब को उसे कैद करके ग्वालियर के किले में रखना पड़ा था. लेकिन वहां से जब वो लौटा तो उसने अपना विद्रोह मुगलों के खिलाफ बढ़ा दिया और पश्तूनों को उनके खिलाफ खड़ा कर दिया.