Karnataka CM Siddaramaiah Resignation: कर्नाटक की राजनीति में इस समय जबरदस्त हलचल मची हुई है. मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने इस्तीफा देने का एलान कर दिया है. लेकिन इससे पहले राज्य में एक ऐसा सियासी दांव चला गया है, जिसने आने वाले दिनों की राजनीति की दिशा तय कर दी है. पहले से ही यह कयास लगाए जा रहे थे कि मुख्यमंत्री अपने पद से हट सकते हैं, लेकिन इस्तीफा देने के ठीक पहले उन्होंने पिछड़ा वर्ग आयोग की बहुप्रतीक्षित जाति सर्वेक्षण रिपोर्ट को स्वीकार करके सबको चौंका दिया. इस कदम ने न केवल प्रशासनिक गलियारों में बल्कि पूरे देश के राजनीतिक पंडितों के बीच एक नई बहस को जन्म दे दिया है. आइए इस रिपोर्ट के आधार पर जानें कि कर्नाटक में कितने हिंदू हैं और कितने मुसलमान हैं.
नौ सालों का लंबा इंतजार खत्म
कर्नाटक की यह जातिगत जनगणना रिपोर्ट पिछले 9 साल से ठंडे बस्ते में थी और लगातार विवादों और चर्चाओं का केंद्र बनी हुई थी. सरकार को सौंपी गई यह रिपोर्ट कुल 300 पन्नों की है, जिसमें राज्य के भीतर हर वर्ग की सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक स्थिति का पूरा ब्योरा दर्ज है. सिद्धारमैया ने अपने इस्तीफे से ऐन पहले इस संवेदनशील दस्तावेज को अपनाकर एक बहुत बड़ा राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की. इस कदम को महज एक सरकारी प्रक्रिया नहीं बल्कि बेहद सोची-समझी रणनीति माना जा रहा है.
कर्नाटक में मुस्लिम ज्यादा या हिंदू
इस नए सर्वेक्षण के आंकड़ों ने राज्य के पुराने अनुमानों को पूरी तरह बदल कर रख दिया है. रिपोर्ट के मुताबिक, कर्नाटक में अब मुस्लिम समुदाय सबसे बड़ा धार्मिक और सामाजिक समूह बनकर उभरा है. आंकड़ों पर नजर डालें तो राज्य की कुल आबादी में मुस्लिम समाज की हिस्सेदारी 14% दर्ज की गई है. संख्या के मामले में यह आबादी लगभग 75,25,000 से लेकर 80,00,000 के बीच बैठती है. इस नए खुलासे के बाद राज्य की राजनीति में समुदायों के प्रतिनिधित्व को लेकर नए समीकरण बनने तय हैं.
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लिंगायत और वोक्कालिगा का कौन सा स्थान?
पारंपरिक रूप से राज्य की सत्ता पर मजबूत पकड़ रखने वाला वीरशैव लिंगायत समुदाय इस सूची में दूसरे स्थान पर खिसक गया है. रिपोर्ट के अनुसार, लिंगायत समाज की आबादी करीब 60,00,000 से 65,00,000 के बीच है, जो कुल जनसंख्या का 11% हिस्सा है. वहीं, राज्य का दूसरा रसूखदार वोक्कालिगा समुदाय अब तीसरे नंबर पर आता है. वोक्कालिगा समाज की आबादी कुल जनसंख्या का 10% है, जो संख्या के लिहाज से लगभग 55,00,000 से 60,00,000 के आसपास मापी गई है.
कुरुबा समाज के आंकड़े
इस विस्तृत सामाजिक-आर्थिक सर्वे रिपोर्ट में चौथे बड़े समुदाय के रूप में कुरुबा समाज को चिह्नित किया गया है. राज्य में कुरुबा समुदाय की कुल हिस्सेदारी लगभग 8% आंकी गई है. अगर इसे संख्या के रूप में देखें, तो कुरुबा समाज के लोगों की तादाद राज्य में 40,00,000 से लेकर 45,00,000 के बीच दर्ज की गई है. 300 पन्नों की इस विस्तृत रिपोर्ट के अधिकारिक रूप से सामने आने के बाद अब कर्नाटक की सत्ता और आरक्षण के समीकरणों में बड़े बदलाव की जमीन तैयार हो गई है.
