Kalinga War: 261 ईसा पूर्व कलिंग युद्ध को भारतीय इतिहास के सबसे क्रूर और खतरनाक युद्धों में से एक माना जाता है. सम्राट अशोक के 13वें प्रमुख शिलालेख के मुताबिक इस युद्ध के दौरान लगभग 1,00,000 लोग मारे गए थे. इसके अलावा लाखों दूसरे लोग बाद में भूख, बीमारी और विस्थापन की वजह से मारे गए. लगभग 150000 लोगों को बंदी बनाकर निर्वासित कर दिया गया था. तबाही के इतने बड़े पैमाने ने सम्राट अशोक पर काफी गहरा प्रभाव डाला था.

भारी जान-माल का नुकसान 

इस युद्ध ने काफी बड़ा विनाश किया. युद्ध के मैदान में मारे गए एक लाख लोगों के अलावा इसके बाद के परिणाम भी उतने ही घातक साबित हुए. पूरे के पूरे समुदाय उखड़ गए, परिवार बिखर गए और हजारों लोग भोजन और चिकित्सा देखभाल की कमी की वजह से मारे गए. युद्ध की मानवीय कीमत ने इसे प्राचीन भारतीय इतिहास के सबसे काले हिस्सों में से एक बना दिया.

युद्ध के पीछे की वजह 

युद्ध की मुख्य वजह साम्राज्य का विस्तार था. सम्राट अशोक का उद्देश्य मौर्य समाज का विस्तार करना और अखंड भारत के सपने को पूरा करना था. अखंड भारत का यह सपना उनके दादा चंद्रगुप्त मौर्य ने देखा था. कलिंग अपने व्यापार मार्गों पर कंट्रोल और अपनी आर्थिक समृद्धि की वजह से रणनीतिक रूप से काफी ज्यादा जरूरी था. इसके कड़े प्रतिरोध ने इस लड़ाई को काफी भीषण और विनाशकारी बना दिया. 

अशोक के जीवन का निर्णायक मोड़ 

युद्ध जीतने के बाद अशोक ने इसके भयानक परिणामों को अपनी आंखों से देखा. युद्ध के मैदान में बिखरे हुए शव और रोते बिलखते परिवार. इस दृश्य ने  उन्हें गहरे पश्चाताप से भर दिया. उन्हें यह महसूस हुआ कि अनगिनत लोगों की जान की कीमत पर किसी राज्य को जीतना असली जीत नहीं कही जा सकती.

अहिंसा और बौद्ध धर्म को अपनाना 

युद्ध के बाद सम्राट अशोक ने हिंसा का त्याग कर दिया और अहिंसा का मार्ग चुना. उन्होंने बौद्ध धर्म को अपनाया और खुद को शांति, करुणा और जल कल्याण का प्रति समर्पित कर दिया. उन्होंने युद्ध की नीति के स्थान पर धर्म की नीति को अपनाया. 

सम्राट अशोक ने शिलालेखों और अपनी नीतियों के जरिए अपने पूरे साम्राज्य को धम्मघोष का संदेश दिया. उन्होंने धार्मिक सहिष्णुता, नैतिक शासन और अपनी प्रजा के कल्याणकारी उपायों को बढ़ावा दिया. उनके इस बदलाव ने उन्हें एक विजेता से बदलकर एक ऐसे शासक के रूप में स्थापित किया जिसे आज भी शांति के लिए याद किया जाता है.

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