Judge Impeachment Process in India:  भारत में न जाने कितने लोगों का सपना जज बनना एक सपना होगा. लेकिन क्या आप जानते हैं जज बनने में जितनी मेहनत और समय लगता है उतने ही मुश्किल किसी जज को उसके पद से हटाना होता है. हाल ही में इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज जस्टिस यशवंत वर्मा का केस इस पूरे प्रोसेस को समझने के लिए एक बड़ी मिसाल बन गया है. संविधान ने जजों को बहुत मजबूत सुरक्षा दी है ताकि वो बिना डर के काम कर सकें. लेकिन अगर कोई जज गलत काम करता है, तो उसे हटाने का एक लंबा और सख्त प्रोसेस है, जिसे इंपीचमेंट कहते हैं. आइए जानते हैं इसके बारे में पूरी जानकारी कि जज को उसके पद से हटाने के लिए क्या नियम है.

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संविधान में जज हटाने का नियम क्या कहता है?

भारतीय संविधान के आर्टिकल 124(4), 217 और 218 में हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के जजों को हटाने का प्रोसेस बताया गया है. इसके लिए जज पर "साबित हुआ दुर्व्यवहार" यानी proved misbehaviour या "अक्षमता" (incapacity) का आरोप होना चाहिए. बता दें कि अगर किसी जज को उसके पद से हटाना है तो उसके लिए सबसे पहले लोकसभा या राज्यसभा में कम से कम लोकसभा से 100 सांसदों और राज्यसभा से 50 सांसदों के दस्तखत से एक मोशन लाया जाता है. फिर स्पीकर के इस मोशन को स्वीकार करने के बाद जजेज इंक्वायरी एक्ट 1968 के तहत तीन सदस्यों की एक जांच कमेटी बनाते हैं. इस कमेटी में एक सुप्रीम कोर्ट जज, एक हाई कोर्ट का चीफ जस्टिस और एक जाने-माने कानूनी विशेषज्ञ होते हैं. अगर कमेटी जांच में आरोप सही पाती है, तो रिपोर्ट संसद में पेश की जाती है. इसके बाद दोनों सदनों को दो-तिहाई बहुमत से मोशन पास करना होता है, तभी जाकर राष्ट्रपति जज को हटाने का आदेश जारी करते हैं.

ऐसे में अगर यशवंत वर्मा के बारे में बात करें तो, 14 मार्च 2025 को दिल्ली में यशवंत वर्मा के सरकारी घर में आग लगने के बाद वहां भारी मात्रा में जला हुआ कैश मिला था. उस समय वो दिल्ली हाई कोर्ट के जज थे. कैश एक स्टोर रूम में मिला था जो घर के नौकर के पास था, उस दौरान यशवंत वर्मा अपने परिवार के साथ भोपाल में थे. इस घटना के बाद सुप्रीम कोर्ट ने एक हफ्ते के अंदर तीन जजों की एक कमेटी बनाई और मामले की जांच शुरू की गई. 31 जुलाई 2025 को लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को 146 सांसदों के दस्तखत वाला एक नोटिस मिला, जिसमें जजेज इंक्वायरी एक्ट 1968 और संविधान के आर्टिकल 124(4), 217 और 218 के तहत यशवंत वर्मा को हटाने की मांग की गई थी.

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जांच रिपोर्ट में क्या निकला और अब आगे क्या?

तीन सदस्यों की जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में पाया कि जस्टिस वर्मा के घर से मिला कैश ठीक से समझाया नहीं जा सका और आग लगने के बाद सबूतों से छेड़छाड़ के भी संकेत मिले थे. कमेटी के मुताबिक जज कैश के बारे में कोई भी सटीक जानकारी नहीं दे पाए थे कि इतने सारे कहां से आए. इसके बाद हालात इतने गंभीर हो गए कि 10 अप्रैल 2026 को जस्टिस यशवंत वर्मा ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को अपना इस्तीफा भेज दिया.

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