क्या होती है स्टील स्लैग रोड? जिसने भारत को दिलाया 'गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड'
Steel Slag Road: हाल ही में रायगढ़ में स्टील स्लैग का इस्तेमाल करके एक सड़क बनाई गई है. इसके बाद भारत का नाम गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी दर्ज हो गया है. आइए जानते हैं क्या है इस सड़क की खासियत.

- भारत ने रायगढ़ में दुनिया की सबसे लंबी स्टील स्लैग सड़क बनाई।
- यह औद्योगिक कचरे को निर्माण सामग्री में सफलतापूर्वक बदलने की तकनीक है।
- सड़क अत्यधिक टिकाऊ, लागत प्रभावी और पर्यावरण के लिए बेहतर है।
Steel Slag Road: भारत में पूरी तरह से प्रोसेस्ड स्टील स्लैग से बनी दुनिया की सबसे लंबी सड़क बनाकर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बना दिया है. इसमें इंडस्ट्रियल वेस्ट को एक मजबूत कंस्ट्रक्शन मटीरियल में बदला गया है. छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में बनी यह 1.85 किलोमीटर लंबी और चार लेने वाली सड़क प्राकृतिक पत्थर के बजाए 100% प्रोसेस्ड स्टील स्लैग एग्रीगेट का इस्तेमाल करके बनाई गई थी. यह प्रोजेक्ट जिंदल स्टील लिमिटेड ने सेंट्रल रोड रिसर्च इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों के साथ मिलकर पूरा किया.
स्टील स्लैग रोड क्या है?
स्टील स्लैग स्टील बनाने की प्रक्रिया के दौरान निकलने वाला एक कठोर वेस्ट मटीरियल या फिर बाय प्रोडक्ट है. आमतौर पर इस पदार्थ की बड़ी मात्रा स्टील प्लांट के लिए निपटान की चुनौती पैदा करती रही है. स्टील स्लैग रोड में सड़क बनाने में इस्तेमाल होने वाले पारंपरिक प्राकृतिक एग्रीगेट्स के विकल्प के तौर पर वैज्ञानिक रूप से प्रोसेस्ड स्लैग का इस्तेमाल किया जाता है. रायगढ़ प्रोजेक्ट दिखाता है कि कैसे इंडस्ट्रियल वेस्ट को एक उपयोगी इंफ्रास्ट्रक्चर पदार्थ में बदला जा सकता है.

इसे गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड क्यों मिला?
रायगढ़ की सड़क 1.85 किलोमीटर लंबी और चार लेन चौड़ी है. यह इसे पूरी तरह से प्रोसेस्ड स्टील वेस्ट से बनी दुनिया की सबसे लंबी सड़क बनाती है. सड़क बनाने में लगभग 2 लाख प्रोसेस्ड स्टील स्लैग का इस्तेमाल किया गया. खास बात यह है कि इसमें किसी भी प्राकृतिक पत्थर या फिर पारंपरिक एग्रीगेट का इस्तेमाल नहीं किया गया. इसका मतलब है कि इस प्रोजेक्ट में सड़क बनाने के मटीरियल के लिए पत्थर तोड़ने और माइनिंग की जरूरत को काफी कम कर दिया.
मजबूत और टिकाऊ सड़क
स्टील स्लैग सड़कों का एक काफी बड़ा फायदा उनकी मजबूती है. प्रोसेस्ड स्टील स्लैग भारी ट्रैफिक के लिए उपयुक्त, मजबूत और भार-सहने वाली सतह प्रदान कर सकता है. सड़क की परत पारंपरिक सड़कों की तुलना में 35% तक पतली बनाई जा सकती हैं. इसी के साथ उनकी भार सहने की क्षमता ज्यादा बनी रहती है. यह तकनीक उन सड़कों के लिए खास तौर पर उपयोगी हो सकती है जिन पर भारी ट्रैफिक लोड होने की उम्मीद है.
लंबी सर्विस लाइफ
स्टील स्लैग सड़कों को लंबी सर्विस लाइफ देने के लिए डिजाइन किया गया है. प्रोजेक्ट की जानकारी के मुताबिक रायगढ़ सड़क को लगभग 15 साल तक किसी भी बड़ी मरम्मत या फिर रखरखाव की जरूरत नहीं पड़ने की उम्मीद है.

निर्माण लागत कम हो सकती है
प्राकृतिक रूप से निकाले गए एग्रीगेट्स की जगह इंडस्ट्रियल वेस्ट का इस्तेमाल करने से निर्माण लागत भी कम हो सकती है. रिपोर्ट्स के मुताबिक यह तकनीक निर्माण लागत को लगभग 40% तक कम कर सकती है. कम मटीरियल की जरूरत और स्टील इंडस्ट्री के कचरे के दोबारा इस्तेमाल से स्टील स्लैग कुछ खास सड़क प्रोजेक्ट के लिए आर्थिक रूप से अच्छा विकल्प बन सकता है.
पर्यावरण के लिए बेहतर
यह टेक्नोलॉजी कचरे से कमाई के सिद्धांत पर काम करती है. स्टील इंडस्ट्री के कचरे को फेंकने के बजाय इस पदार्थ को प्रोसेस करके इंफ्रास्ट्रक्चर में दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है. स्टील स्लैग का इस्तेमाल करने से कुचले हुए पत्थर के लिए पहाड़ों की खुदाई और माइनिंग पर निर्भरता भी कम होती है. इससे प्राकृतिक नजारों को बचाने और पारंपरिक सड़क पदार्थ को निकालना और लाने ले जाने से होने वाले पर्यावरण असर को कम करने में मदद मिल सकती है.
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स्टील स्लैग को सड़क बनाने वाले पदार्थ में कैसे बदला जाता है?
ताजा स्टील स्लैग को सीधे फैक्ट्री से लाकर सड़क पर नहीं डाला जा सकता. इसे पहले विशेषज्ञों की देखभाल में वैज्ञानिक तरीके से प्रोसेस किया जाता है. इस प्रक्रिया में कुचलना, धातु वाले पदार्थ को हटाने के लिए मैग्नेटिक सेपरेशन और प्रोसेस किए गए स्लैग को सही साइज में बांटना शामिल है. प्रोसेसिंग के बाद इस पदार्थ का इस्तेमाल सड़क बनाने के लिए अलग-अलग चरणों में प्राकृतिक एग्रीगेट के विकल्प के तौर पर किया जा सकता है. सड़क को ट्रैफिक के लिए खोलने से पहले पर्यावरण और सुरक्षा से जुड़ी टेस्टिंग की जाती है. ऐसा इसलिए ताकि इस बात को पक्का किया जा सके की प्रोसेस किया गया मटीरियल जरूरी स्टैंडर्ड को पूरा करता है.
रायगढ़ की स्टील स्लैग सड़क इस बात में एक बड़ा बदलाव दिखाती है कि औद्योगिक कचरे को किस नजरिए से देखा जा सकता है. यह सिर्फ फेंकने लायक कचरा मानने के बजाय निर्माण के लिए एक कीमती संसाधन बनाया जा सकता है.
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