Jhalmuri Vendor Security: झारग्राम से एक बड़ी खबर सामने आ रही है. यह वही जगह है जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में पश्चिम बंगाल दौरे के दौरान रुक कर झालमुड़ी खाई थी. यह घटना सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई थी. जिस वेंडर ने प्रधानमंत्री को झालमुड़ी खिलाई थी अब उसे कथित तौर पर सुरक्षा कवर दिया गया है. बताया जा रहा है कि उसे पाकिस्तान और बांग्लादेश से जुड़े अंतरराष्ट्रीय फोन नंबरों से धमकियां मिल रही हैं.
दुकान के बाहर सीआरपीएफ के जवान तैनात
धमकी की रिपोर्ट मिलने के बाद वेंडर विक्रम साव की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल और स्थानीय पुलिस के जवानों को उसकी दुकान के पास तैनात किया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक यह फैसला सुरक्षा एजेंसी द्वारा उस वायरल वीडियो घटना के बाद वेंडर को मिल रहे फोन कॉल और संदेशों के संबंध में सुरक्षा खतरे का आकलन करने के बाद लिया गया है. सड़क किनारे की एक छोटी सी दुकान के बाहर सुरक्षा बलों की अचानक तैनाती अब ऑनलाइन और राजनीतिक चर्चाओं का एक बड़ा विषय बन चुकी हैं.
कौन उठाएगा इस सिक्योरिटी का खर्च?
सुरक्षा व्यवस्था का पूरा खर्च कथित तौर पर भारत सरकार द्वारा गृह मंत्रालय के बजट के जरिए से उठाया जाएगा. भारत के सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत जब सुरक्षा खतरे के औपचारिक आकलन के आधार पर विशेष सुरक्षा दी जाती है तो खर्च सीधे सरकार द्वारा वहन किया जाता है ना कि उस व्यक्ति द्वारा जिसे सुरक्षा दी जा रही है. इसका मतलब है कि विक्रम को सीआरपीएफ की तैनाती या फिर किसी भी संबंधित सुरक्षा उपाय के लिए अपनी जेब से भुगतान नहीं करना पड़ेगा.
पाकिस्तान और बांग्लादेश से मिल रही धमकी
रिपोर्ट्स के मुताबिक विक्रम का यह कहना है कि ऑनलाइन इस घटना के चर्चा में आने के बाद से उसे अंतरराष्ट्रीय नंबरों से धमकी भरे फोन कॉल और वीडियो कॉल आ रहे हैं. उसके बयानों के मुताबिक कुछ फोन करने वालों ने कथित तौर पर बातचीत के दौरान उसे हिंसा की धमकी दी और गाली गलौज का इस्तेमाल किया. उसने यह भी दावा किया कि बाद में बांग्लादेश से भी इसी तरह के फोन कॉल आने लगे. फोन करने वाले बार-बार यह पूछते थे कि क्या वह अभी भी जिंदा है.
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कब दी जाती है केंद्रीय सुरक्षा?
केंद्रीय सुरक्षा आमतौर पर तभी दी जाती है जब सुरक्षा एजेंसियों को संभावित खतरों की गंभीरता का आकलन हो जाता है. जब भी अधिकारियों को लगता है कि किसी व्यक्ति को राजनीतिक, सामाजिक या फिर सार्वजनिक रूप से चर्चित होने की वजह से कोई खतरा है तो स्थिति के मुताबिक केंद्रीय बलों को अस्थायी या फिर स्थायी रूप से तैनात किया जा सकता है.
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