Glass Rain Planet: सोचिए कि आप एक ऐसे प्लेनेट पर हों जहां पानी की बजाय कांच के नुकीले टुकड़े सुपरसोनिक स्पीड से आसमान में घूमते हों. ऐसा माना जाता है कि यह डरावना नजारा HD 189733b पर मौजूद है. यह पृथ्वी से लगभग 63 लाइट ईयर दूर वल्पेकुला तारामंडल में एक विशाल गैस ग्रह है. यह गृह गहरा नीला दिखाई देता है. लेकिन यह रंग अब तक खोजे गए सबसे चरम और हिंसक वातावरण में से एक को छुपाता है.
काफी ज्यादा तापमान
HD 189733b हॉट जुपिटर की कैटेगरी में आता है. यह विशाल गैस ग्रह है जो आकार में जुपिटर जैसा है लेकिन अपने मूल तारों के काफी करीब परिक्रमा करता है. इसी तंग कक्षा की वजह से इस ग्रह पर सतह का तापमान 1000 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा है. इस ग्रह की खोज 2005 में हुई थी और इसने अपने आकर्षक नीले रंग की वजह से तुरंत ध्यान खींचा था. लेकिन साइंटिस्ट को जल्द ही पता चल गया कि नीले रंग का समुद्र से कोई लेना-देना नहीं है.
क्यों होती है कांच की बारिश?
ग्रह के वातावरण में काफी बड़ी मात्रा में सिलिकेट पार्टिकल होते हैं. यह ऐसे पदार्थ हैं जो कांच बनाने में काफी जरूरी होते हैं. ग्रह की तेज गर्मी में यह पार्टिकल पिघलकर लिक्विड बूंद में बदल जाते हैं. यह पिघली हुई सिलीकेट बूंदे एटमॉस्फेयर में ऊपर उठती हैं और बादल बनाती हैं. जब टेंपरेचर में उतार-चढ़ाव होता है तो बूंदे कंडेंस हो जाती हैं और वापस बारिश होने लगती है. लेकिन यह बारिश लिक्विड कांच के रूप में होती है.
सुपरसोनिक स्पीड पर तिरछी बारिश
धरती पर होने वाली बारिश के उलट इस ग्रह पर कांच सीधा नीचे नहीं गिरता. ग्रह पर हवाएं लगभग 8700 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलती है. यह आवाज की स्पीड से भी लगभग 7 गुना ज्यादा है. इतनी तेज हवा की वजह से पिघली हुई कांच की बूंदे सीधी चलने के बजाय तिरछी चलती है.
नीले रंग के पीछे का रहस्य
ग्रह का गहरा नीला रंग पहले तो वैज्ञानिकों को हैरान कर गया. रिसर्च से पता चला कि नीला रंग सिलीकेट कणों की वजह से होता है जो एटमॉस्फेयर में नीली रोशनी बिखेरते हैं. जब पिघले हुए कांच की बूंदे रोशनी को रिफ्लेक्ट करती हैं तो पूरा ग्रह समुद्र जैसा रंग ले लेता है.
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