World War Criteria: अमेरिका और इजरायल ने ईरान के न्यूक्लियर ठिकानों और मिलिट्री बेस को निशाना बनाकर बड़े एयरस्ट्राइक किए हैं. इससे मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ चुका है. ईरान की सरकारी मीडिया ने सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की पुष्टि की है. इसी के साथ ईरान ने दुबई, बहरीन, कुवैत और कतर समेत कई देशों पर मिसाइल हमले करके जवाबी कार्रवाई की है. इसी के साथ रूस यूक्रेन युद्ध भी अपने पांचवें साल में पहुंच चुका है. आइए जानते हैं कि कोई भी युद्ध ऑफीशियली वर्ल्ड वॉर कब बन जाता है.

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कब बनता है कोई युद्ध वर्ल्ड वॉर? 

दरअसल किसी भी युद्ध को वर्ल्ड वॉर कहने के लिए देशों की कोई तय संख्या जरूरी नहीं है. इसके बजाय इतिहासकार और मिलिट्री एक्सपर्ट पैमाने, भूगोल और ग्लोबल भागीदारी के आधार पर कई खास क्राइटेरिया का इस्तेमाल करते हैं.

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इंटरनेशनल कानून वर्ल्ड वॉर घोषित करने के लिए जरूरी देशों की कम से कम संख्या को तय नहीं करता. वर्ल्ड वॉर शब्द ऐतिहासिक है कानूनी नहीं. इसका इस्तेमाल इतिहासकार तब करते हैं जब किसी लड़ाई में दुनिया की बड़ी ताकतें शामिल होती हैं और यह दुनिया के कई इलाकों में फैल जाती है.

एक लड़ाई में दर्जनों देश शामिल हो सकते हैं लेकिन अगर यह भौगोलिक रूप से सीमित है तो यह क्षेत्रीय ही रहेगी. इसके उलट कम देशों वाली लड़ाई को ग्लोबल माना जा सकता है अगर इसमें बड़ी सुपर पावर शामिल हों और यह महाद्वीपों में फैल जाए.

क्या है वर्ल्ड वॉर की बड़ी शर्त?

वर्ल्ड वॉर के लिए एक मुख्य शर्त है अमेरिका, रूस, चीन जैसी बड़ी ग्लोबल ताकतों और NATO जैसे बड़े मिलिट्री गठबंधनों का सीधे तौर पर मिलिट्री में शामिल होना. पहले और दूसरे दोनों वर्ल्ड वॉर में काफी ज्यादा मिलिट्री ताकत वाले ताकतवर देश सीधे लड़ाई में शामिल हो गए थे. उनके शामिल होने से लड़ाई दुनिया भर में फैली और क्षेत्रीय झगड़े दुनिया भर की लड़ाइयों में बदल गए.

विश्व युद्ध की एक और खास बात इसका भौगोलिक पैमाना है. लड़ाई एक इलाके से आगे बढ़नी चाहिए और इसमें कई महाद्वीप, समुद्री रास्ते और हवाई इलाके शामिल होने चाहिए. पहले विश्व युद्ध में यूरोप, अफ्रीका और मिडिल ईस्ट में लड़ाई हुई थी. दूसरा विश्व युद्ध और भी आगे तक फैला था. इसमें यूरोप, एशिया, अफ्रीका और प्रशांत महासागर शामिल थे. 

दुनिया का गुटों में बंटना

विश्व युद्ध में आमतौर पर बड़े मिलिट्री अलायंस होते हैं जो देशों को विरोधी गुटों में बांट देते हैं. जैसे दूसरे विश्व युद्ध में एलाइड पावर्स और एक्सिस पावर्स थे. इनमें से हर एक में कई देश मिलकर मिलिट्री कार्रवाई करने के लिए तैयार थे. ये अलायंस स्थानीय झगड़ों को ग्लोबल टकराव में बदल देते हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि देश अपने सहयोगियों का साथ देने और स्ट्रैटेजिक हितों की रक्षा करने के लिए जुड़ते हैं. 

कुछ पुराने उदाहरण दिखाते हैं कि वर्ल्ड वॉर में दर्जनों देश शामिल थे. पहले वर्ल्ड वॉर में 30 से ज्यादा देश शामिल थे. इसी के साथ दूसरे वर्ल्ड वॉर में 50 से ज्यादा देश शामिल थे और इसमें लगभग 70 से 100 मिलियन मिलिट्री वाले लगे थे.  ईरान झगड़े को एक्सपर्ट अभी भी रीजनल युद्ध मानते हैं.

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