Ishaq Dar Grandson Arrest: पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री इशाक डार के पोते मोहम्मद रजा डार की संगीन गैंगरेप के आरोपों में हुई हालिया गिरफ्तारी ने वहां के सियासी गलियारों में भूचाल ला दिया है. इस हाई-प्रोफाइल मामले के बाद एक बार फिर से यह बहस छिड़ गई है कि क्या पाकिस्तान में रसूखदार लोग कानून के शिकंजे से बच निकलते हैं? इतिहास गवाह है कि वहां बड़े से बड़े नेताओं और सैन्य तानाशाहों को अदालती कटघरे में खड़ा होना पड़ा है. हालांकि, वहां का इंसाफ अक्सर राजनीतिक उठापटक और पर्दे के पीछे चलने वाले पावर गेम से प्रभावित रहा है. चलिए जानें कि वहां किन रसूखदार नेताओं को सजा मिल चुकी है.

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पूर्व प्रधानमंत्रियों पर चला कानूनी हंटर

पाकिस्तान के इतिहास में देश के सबसे ऊंचे पद पर बैठे लोग भी कानूनी कार्रवाई से अछूते नहीं रहे हैं. मौजूदा दौर में पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान तोशाखाना मामले और अल-कादिर ट्रस्ट घोटाले में दोषी करार दिए जाने के बाज अपनी पत्नी बुशरा बीबी के साथ जेल की सलाखों के पीछे वक्त काट रहे हैं. उनसे पहले, तीन बार के प्रधानमंत्री रहे नवाज शरीफ को साल 2018 में पनामा पेपर्स से जुड़े भ्रष्टाचार मामले में 10 साल की सजा सुनाई गई थी. 

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जब मौत की सजा से जूझे रसूखदार

पाकिस्तान में सिर्फ जेल ही नहीं, बल्कि रसूखदारों को फांसी और मौत की सजा का सामना भी करना पड़ा है. साल 1979 में देश के पूर्व प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो को एक राजनीतिक विरोध की हत्या की साजिश रचने के जुर्म में फांसी के फंदे पर लटका दिया गया था. वहीं साल 2019 में एक विशेष अदालत ने देश के पूर्व सैन्य तानाशाह और राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ को संविधान को ताक पर रखने और आपातकाल लगाने के जुर्म में देशद्रोह का दोषी मानते हुए मौत की सजा सुनाई थी.

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सत्ता बदलते ही वीआईपी कैदियों की बदली किस्मत

भले ही पाकिस्तान में रसूखदारों को सजा मिलने का लंबा रिकॉर्ड रहा हो, लेकिन वहां की न्याय व्यवस्था का एक कड़वा सच यह भी है कि सत्ता बदलते ही कैदियों की किस्मत बदल जाती है. उदाहरण के लिए नवाज शरीफ को मिली कड़ी सजा को साल 2023 में अदालतों ने पलट दिया, जिसके बाद वह देश लौटकर फिर से राजनीति में सक्रिय हो गए. इसी तरह से कई रसूखदार नेता अपने रसूख या फिर किसी भी तरह से जुगाड़ लगाकर जेल से बाहर आ जाते हैं या देश छोड़कर चले जाते हैं.

क्या पाकिस्तान में कानूनी शिकंजे से बच पाते हैं बड़े नेता?

देखा जाए तो पाकिस्तान में बड़े नेताओं का कानून से बच निकलना या राहत पा लेना कोई नई बात नहीं है. जब तक नेता सत्ता में रहते हैं, वे अपने राजनीतिक और प्रशासनिक प्रभाव का इस्तेमाल करके मामलों को ठंडे बस्ते में डलवा देते हैं. वहीं विपक्ष में आते ही उन पर मुकदमों की बौछार हो जाती है, जिसे वे राजनीतिक प्रतिशोध का नाम देते हैं.

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