आज के समय में सोने की कीमत लगातार आसमान छू रही है. शादी-ब्याह से लेकर निवेश तक, हर जगह सोना सबसे भरोसेमंद धातु माना जाता है. ऐसे में जब लोग सुनते हैं कि हीरे अब धरती से नहीं, बल्कि लैब में बनाए जा रहे हैं, तो एक सवाल अपने-आप मन में आता है कि क्या सोना भी लैब में बनाया जा सकता है. यह सवाल नया नहीं है. सैकड़ों साल पहले अलकेमिस्ट सीसा या पारे को सोने में बदलने का सपना देखते थे. उस समय यह जादू या रहस्य माना जाता था. लेकिन आज, जब विज्ञान ने परमाणु को भी तोड़ दिया है, तो यह सवाल और भी गंभीर हो जाता है. क्या इंसान सच में सोना बना सकता है और अगर बना सकता है, तो उसमें खर्च कितना आता है
सोना आखिर होता क्या है?
सोना कोई मिश्रण नहीं, बल्कि एक शुद्ध रासायनिक तत्व है. सोने का रासायनिक नाम Gold (Au) और परमाणु क्रमांक 79 है. इसका मतलब यह है कि हर एक सोने के परमाणु के नाभिक में ठीक 79 प्रोटॉन होते हैं. दुनिया में मौजूद हर सोने का परमाणु, चाहे वह भारत में हो या अमेरिका में रासायनिक रूप से एक-सा ही होता है. यही वजह है कि सोना बनाना इतना मुश्किल है क्योंकि किसी भी चीज को सोना बनाने के लिए उसमें 79 प्रोटॉन वाला परमाणु बनाना पड़ता है. अगर किसी भी तत्व के परमाणु में प्रोटॉन की संख्या 79 हो जाए, तो वह सोना बन जाता है. क्या लैब में सोना बनाया जा सकता है
सोना किसी रासायनिक प्रक्रिया से नहीं बनता है. इसके लिए एक खास प्रक्रिया यूज होती है . जिसे न्यूक्लियर ट्रांसम्यूटेशन (Nuclear Transmutation) कहते हैं. इस प्रक्रिया में किसी भारी तत्व (जैसे पारा या सीसा) के परमाणु पर न्यूट्रॉन छोड़े जाते हैं. इससे परमाणु अस्थिर हो जाता है फिर वह रेडियोधर्मी क्षय (Radioactive Decay) से गुजरता है और धीरे-धीरे किसी दूसरे तत्व में बदल जाता है. इसी दौरान कुछ परमाणु सोने में बदल जाते हैं. ऐसी ही प्रक्रिया सुपरनोवा विस्फोटों में होती है, न्यूट्रॉन स्टार्स की टक्कर में होती है और माना जाता है कि ब्रह्मांड में सोना ऐसे ही बना.
खर्च कितना आता है?
सोना बनाने के लिए न्यूक्लियर ट्रांसम्यूटेशन की प्रक्रिया करनी पड़ती है. 1 ग्राम सोना बनाने में इतनी एनर्जी लगती है कि उससे एक पूरा शहर कई घंटों तक बिजली से चल सकता है. इसके लिए परमाणु रिएक्टर, पार्टिकल एक्सेलेरेटर, अरबों न्यूट्रॉन और ज्यादा सुरक्षा की जरूरत होती है यानी जितना सोना बनेगा उसकी कीमत, खर्च के मुकाबले लाखों गुना कम होगी. लेकिन बना हुआ सोना रेडियोएक्टिव भी हो सकता है जो गहनों या निवेश के लिए सही नहीं है. बाजार से सोना खरीदना सस्ता और आसान है, लैब में बनाना महंगा और मुश्किल है. इसका खर्च भी काफी ज्यादा आता है, जिसे व्यावहारिक रूप से कभी मुनाफे के लिए यूज नहीं किया जा सकता है.
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