ईरान-अमेरिका जंग शुरू होने से लेकर अब तक कितने भारतीय जहाजों पर हुआ हमला, कितना हुआ नुकसान?
मध्य पूर्व के समुद्र में 28 फरवरी 2026 से जारी वैश्विक सैन्य टकराव के बीच अब तक कम से कम पांच विशेष जहाजों को सीधी चोट पहुंची है, जिनमें एमटी जलवीर और एमटी मारिवक्स जैसे बड़े नाम शामिल हैं.

- सेटेबेलो, स्काई लाइट हमलों में भारतीय नाविकों की जान गई.
ईरान और अमेरिका के बीच छिड़ी सैन्य जंग ने अब वैश्विक समुद्री व्यापार के साथ-साथ भारत की चिंताएं भी बढ़ा दी हैं. 28 फरवरी 2026 को इस युद्ध की शुरुआत होने के बाद से खाड़ी क्षेत्र और विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य व ओमान की खाड़ी में वाणिज्यिक जहाजों पर हमले लगातार तेज हो गए हैं. इस दौरान अमेरिकी नौसेना द्वारा ईरानी बंदरगाहों की घेराबंदी और नाकाबंदी करने के प्रयासों के बीच कई ऐसे जहाजों को निशाना बनाया गया है, जिनमें या तो भारत का झंडा लगा था या फिर उन पर भारतीय चालक दल यानी नाविक सवार थे. आज 11 जून को भी भारतीय जहाज पर हमला हुआ है. इन हमलों ने न केवल अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि भारतीय नौवहन उद्योग और नाविकों के जीवन को भी सीधे तौर पर भारी खतरे में डाल दिया है.
एमटी जलवीर पर हमले से हड़कंप
इसी समुद्री टकराव की कड़ियों को जोड़ते हुए ओमान में मौजूद भारतीय दूतावास ने गुरुवार को एक बेहद चिंताजनक घटना की पुष्टि की है. दूतावास को ओमान के महत्वपूर्ण शिनास बंदरगाह के तटीय इलाके के पास एक बड़े व्यावसायिक जहाज एमटी जलवीर (MT Jalveer) से जुड़ी एक अप्रिय घटना की सटीक जानकारी मिली है. इस घटना के सामने आने के बाद से ही भारतीय कूटनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया है. भारतीय अधिकारियों ने इस गंभीर स्थिति पर लगातार अपनी पैनी नजर बनाए रखी है. एमटी जलवीर पर हुए इस अचानक हमले को लेकर भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी आधिकारिक पोस्ट के जरिए स्थिति स्पष्ट की है.
एमटी जलवीर पर हमले से कितना नुकसान?
ओमान के शिनास पोर्ट के पास जब इस पर हमला हुआ, तब इस पर कुल 20 भारतीय नाविक तैनात थे. युद्ध के इस माहौल में इस जहाज को निशाना बनाए जाने के बाद इस पर सवार सभी भारतीय कर्मियों की सुरक्षा को लेकर सबसे बड़ा जोखिम पैदा हो गया है. हालांकि इस हमले से जहाज के ढांचे को पहुंचे नुकसान और नाविकों की सटीक स्थिति की पूरी रिपोर्ट निकालने के लिए भारतीय एजेंसियां लगातार जुटी हुई हैं.
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एमटी मारिवक्स पर प्रहार
इस जंग के दौरान अमेरिकी बलों के निशाने पर आया दूसरा बड़ा जहाज एमटी मारिवक्स (MT Marivex) था. ओमान की खाड़ी में गश्त कर रहे अमेरिकी सैन्य बलों ने इस खाली तेल टैंकर को पूरी तरह से अक्षम यानी डिसेबल कर दिया था. दरअसल अमेरिका को यह गहरा संदेह था कि यह टैंकर ईरान के खिलाफ लगाई गई अमेरिकी समुद्री नाकाबंदी के नियमों का खुलेआम उल्लंघन कर रहा था. इसी शक के आधार पर अमेरिकी सेना ने इस पर मिसाइल से सीधा हमला बोल दिया था. इस जहाज पर पलाऊ का झंडा लगा हुआ था, लेकिन इस पर पूरा परिचालन संभाल रहे कुल 24 भारतीय नाविक सवार थे.
अमेरिकी मिसाइल हमले के बाद इस जहाज को बहुत भारी नुकसान पहुंचा और यह समुद्र के बीच ही ठप हो गया. गनीमत यह रही कि इस बड़े हादसे के तुरंत बाद ओमान के तटरक्षक बलों (Coast Guard) ने तत्परता दिखाई और एक बड़ा बचाव अभियान चलाकर जहाज पर मौजूद सभी 24 भारतीय नाविकों को सुरक्षित पानी से बाहर निकाल लिया.
एमटी सेटेबेलो की त्रासदी
इस पूरे सैन्य संघर्ष के दौरान भारतीय नाविकों के लिहाज से सबसे दुखद और दर्दनाक घटना एमटी सेटेबेलो (MT Settebello) जहाज के साथ घटी. पलाऊ के झंडे वाले इस भारी-भरकम टैंकर पर भी भारतीय क्रू मेंबर्स तैनात थे. होर्मुज जलडमरूमध्य के पास इस जहाज पर अमेरिकी हवाई हमला यानी एयरस्ट्राइक की गई, जिसने इस जहाज के परखच्चे उड़ा दिए. हमले के वक्त जहाज में 24 भारतीय सवार थे, जिसमें से 21 को बाहर निकाल लिया गया, लेकिन 3 भारतीय नाविकों को अपनी जान भी गंवानी पड़ी.
एमटी स्काई लाइट प्रभावित
ईरान और अमेरिका के बीच छिड़ी इस हिंसक जंग के शुरुआती दौर में ही जो जहाज सबसे पहले इस आग की चपेट में आए, उनमें एमटी स्काई लाइट (MT Sky Light) भी प्रमुखता से शामिल था. शुरुआती समुद्री झड़पों और गोलाबारी के दौरान इस जहाज को निशाना बनाया गया था. इस हमले ने तभी यह साफ कर दिया था कि खाड़ी के इस पूरे व्यापारिक रूट पर चलने वाले कमर्शियल जहाजों के लिए अब हालात सामान्य नहीं रह गए हैं और आने वाले दिनों में यह संकट और गहरा सकता है. इसमें 15 भारतीय और पांच ईरानी नागरिक शामिल थे, जिसमें से दो भारतीयों की मौत हो गई.
एमटी व्योम पर हमला
भारतीय क्रू और समुद्री हितों को नुकसान पहुंचाने वाली एक और बड़ी घटना ओमान के तट से कुछ ही दूरी पर समुद्र में दर्ज की गई. यहां से गुजर रहे एमटी व्योम (MT Vyom) नाम के एक और जहाज को अज्ञात हमले का सामना करना पड़ा. ओमान के तटीय इलाके में इस जहाज पर हुए सीधे प्रहार से इसके कई महत्वपूर्ण हिस्से क्षतिग्रस्त हो गए, जिससे समुद्री परिवहन उद्योग को लाखों डॉलर के नुकसान का सामना करना पड़ा और इस रूट पर जहाजों की आवाजाही पर डर का साया मंडराने लगा. इस एयरस्ट्राइक में भी कई भारतीयों की मौत हुई.
सन्मार हेराल्ड की क्षति
इसी सिलसिले में एक और महत्वपूर्ण जहाज सन्मार हेराल्ड (Sanmar Herald) भी इस युद्ध क्षेत्र के भीतर गंभीर हमले का शिकार बना. इस वाणिज्यिक जहाज पर ईरान समर्थित या ईरान से जुड़े सैन्य बलों द्वारा सीधे तौर पर भारी गोलीबारी की गई थी. इस अचानक हुई फायरिंग के कारण जहाज के नियंत्रण कक्ष और ऊपरी कमरों की खिड़कियों व शीशों को भारी नुकसान पहुंचा. हमले की इस लाइव घटना ने जहाजों के भीतर मौजूद तकनीकी उपकरणों को भी आंशिक रूप से प्रभावित किया था. इस हमले में तीन भारतीय नागरिकों की जान गई थी.
एलसीटी अलीह की बर्बादी
इस भीषण समुद्री युद्ध और नाकाबंदी के चक्रव्यूह में फंसने वाला अगला जहाज एलसीटी अलीह (LCT ALYH) था. खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती सैन्य तनातनी और आमने-सामने की गोलाबारी के दौरान इस जहाज को एक के बाद एक कई हिट्स का सामना करना पड़ा. लगातार हुए इन हमलों के कारण जहाज के बुनियादी ढांचे और रसद ले जाने की क्षमता को बहुत ज्यादा नुकसान पहुंचा, जिससे यह व्यापारिक यात्रा पूरी करने की स्थिति में नहीं रहा. इस खतरनाक हमले में एक भारतीय गंभीर रूप से घायल हो गया था.
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