Mojtaba Khamenei Full Name: ईरान ने हाल ही में अमेरिका और इजरायल के बीच हुए झगड़े में अपने सुप्रीम लीडर की मौत के बाद एक नया सुप्रीम लीडर अपॉइंट कर दिया है. देश के सबसे बड़े अधिकारी को चुनने के लिए जिम्मेदार मौलवी संस्था ने इस बात की घोषणा की है कि मुज्तबा खामेनेई अपने पिता की जगह लेंगे. आपको बता दें कि नए लीडर ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के दूसरे बेटे हैं.
मुज्तबा खामेनेई का पूरा नाम क्या है?
ईरान के नए सुप्रीम लीडर का पूरा नाम अयातुल्ला सैय्यद मुज्तबा हुसैनी खामेनेई है. उनका जन्म 1969 में मशहद शहर में हुआ था और वह अपने परिवार में दूसरे बेटे हैं. वह राजनीतिक उथल-पुथल के उस दौर में बड़े हुए हैं जब उनके पिता मोहम्मद रजा पहलवी के शासन का विरोध करने वाले प्रमुख धार्मिक लोगों में से एक थे. ईरानी क्रांति के बाद नई इस्लामी सरकार के सत्ता में आने पर उनके परिवार का राजनीतिक प्रभाव बढ़ चुका था.
शुरुआती जीवन और शिक्षा
क्रांति के बाद मुज्तबा खामेनेई का परिवार तेहरान चला गया. उन्होंने अलावी हाई स्कूल में अपनी पढ़ाई पूरी की, जिसे अक्सर ईरान के राजनीतिक और धार्मिक संगठन के प्रभावशाली लोगों से जुड़ा एक प्रमुख संस्थान माना जाता है. बाद में उन्होंने कोम शहर में धार्मिक पढ़ाई की. इसे देश में शिया इस्लामिक स्कॉलरशिप के लिए सबसे जरूरी केंद्र के रूप में जाना जाता है. रूढ़िवादी मौलवियों के मार्गदर्शन में उन्होंने इस्लामी धर्मशास्त्र की पढ़ाई की और शिया मौलवी बन गए. हालांकि उन्हें पहले ग्रैंड अयातुल्ला का पद नहीं मिला था.
पर्दे के पीछे का प्रभाव
कभी भी कोई निर्वाचित सरकारी पद नहीं मिलने के बावजूद मुज्तबा खामेनेई को लंबे समय से ईरानी राजनीतिक व्यवस्था में एक प्रभावशाली व्यक्ति माना जाता है. कई सालों तक ऐसा माना जाता था कि सुप्रीम लीडर के ऑफिस में पर्दे के पीछे उनकी एक बड़ी भूमिका थी.
मिलिट्री के साथ मजबूत लिंक
उनके असर के पीछे एक बड़ी वजह इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के साथ उनका कथित रिश्ता रहा है. आईआरजीसी ईरान के सबसे ताकतवर इंस्टीट्यूशन में से एक है और देश के डिफेंस और सिक्योरिटी स्ट्रक्चर में एक बड़ी भूमिका निभाता है. सुप्रीम लीडर के तौर पर उनके अपॉइंटमेंट के बाद रिपोर्ट्स बताती हैं कि ऑर्गेनाइजेशन ने मुज्तबा खामेनेई के प्रति अपनी वफादारी का वादा किया है.
ईरान के सुप्रीम लीडर की पावर
सुप्रीम लीडर के तौर पर मुज्तबा खामेनेई अब ईरान की आर्म्ड फोर्सेज के कमांडर-इन-चीफ के तौर पर काम करेंगे. इसी के साथ उनका नेशनल इंस्टीट्यूशंस पर आखिरी अधिकार रहेगा. वह इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स समेत मिलिट्री की देखरेख करेंगे और फॉरेन पॉलिसी, डिफेंस स्ट्रेटजी, न्यूक्लियर फैसलों और देश के ज्यूडिशियल सिस्टम पर आखरी अधिकार रखेंगे. ईरान के पॉलीटिकल स्ट्रक्चर में सुप्रीम लीडर सरकार से ऊपर होता है.
यह भी पढ़ें: वर्ल्डकप जीतने पर टीम इंडिया को मिली प्राइज मनी पर कितना लगेगा टैक्स, जानें किसके हिस्से आएगा कितना रुपया?
