India Iran Trade List: तेल के अलावा ईरान का भारत में क्या-क्या इस्तेमाल होता है, देख लीजिए लिस्ट
भारत-ईरान का रिश्ता महज तेल की खरीद-बिक्री तक सीमित नहीं है, बल्कि यह रसायनों, ड्राई फ्रूट्स और रणनीतिक साझेदारी का एक मिला-जुला स्वरूप है. आइए जानें कि ईरान की कितनी चीजें भारत में इस्तेमाल होती हैं.

- ईरान से भारत ऑर्गेनिक केमिकल्स, ड्राई फ्रूट्स और खनिज ईंधन आते हैं.
- भारतीय दवा और प्लास्टिक उद्योग ईरान के केमिकल्स पर निर्भर हैं.
- ईरानी खजूर, बादाम, पिस्ता भारतीय खान-पान का अहम हिस्सा हैं.
- भारत-ईरान रुपया-रियाल में व्यापार करते हैं, जिससे प्रतिबंधों का असर कम होता है.
- दोनों देशों के संबंध ऐतिहासिक हैं, सहयोग विभिन्न क्षेत्रों में जारी.
इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने पूरी दुनिया को चिंता में डाल दिया है. युद्ध के इस माहौल में भारत की भूमिका काफी अहम हो गई है, क्योंकि भारत के संबंध इजरायल और अमेरिका के साथ-साथ ईरान से भी बेहद पुराने और मजबूत हैं. अक्सर हम ईरान को केवल कच्चे तेल के स्रोत के रूप में देखते हैं, लेकिन हकीकत में ईरान से भारत आने वाली चीजों की लिस्ट काफी लंबी है, जो हमारी रसोई से लेकर फैक्ट्रियों तक का काम चलाती हैं. चलिए इस लिस्ट के बारे में जानें.
ईरान से आने वाले महत्वपूर्ण सामान की लिस्ट
भारत और ईरान के बीच व्यापार केवल कच्चे तेल तक सीमित नहीं है. भारत अपनी औद्योगिक और खाद्य जरूरतों को पूरा करने के लिए ईरान से बड़ी मात्रा में ऑर्गेनिक केमिकल्स, ड्राई फ्रूट्स (जैसे खजूर और बादाम), और खनिज ईंधन आयात करता है. इसमें बिटुमेन और मेथनॉल जैसे उत्पाद शामिल हैं, जिनका इस्तेमाल सड़क निर्माण और उद्योगों में होता है. इसके अलावा नमक, सल्फर, पत्थर, प्लास्टिक, लोहा, स्टील और कांच के सामान की भी ईरान से भारी मांग रहती है.
केमिकल और पेट्रोकेमिकल सेक्टर में निर्भरता
आंकड़ों की बात करें तो ईरान से होने वाले कुल आयात में ऑर्गेनिक केमिकल्स का हिस्सा सबसे ज्यादा, लगभग 48% है. ये केमिकल्स भारत की दवा कंपनियों और प्लास्टिक उद्योगों के लिए बेहद जरूरी हैं. इसके अलावा इनऑर्गेनिक केमिकल्स और रेजिन का भी आयात किया जाता है. ईरान के पेट्रोकेमिकल उत्पाद भारतीय मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को मजबूती देते हैं, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक संतुलन बना रहता है.
खास सब्जियां और सूखे मेवे
ईरान से आने वाले सामानों में दूसरा सबसे बड़ा हिस्सा खाने-पीने की चीजों, खासकर सूखे मेवों का है. कुल आयात में इनका योगदान करीब 29% है. हम जो बादाम, पिस्ता और खजूर खाते हैं, उनमें से एक बड़ा हिस्सा ईरानी बागानों से आता है. इसके अलावा ईरान से सेब और कुछ खास तरह की सब्जियां भी भारत पहुंचती हैं. भारत के त्योहारों और रोजमर्रा की डाइट में ईरानी ड्राई फ्रूट्स का एक बड़ा बाजार मौजूद है.
व्यापार के आंकड़े और आर्थिक समीकरण
वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान भारत और ईरान के बीच कुल द्विपक्षीय व्यापार लगभग 1.68 अरब डॉलर का रहा है. इस व्यापार की खास बात यह है कि भारत का पलड़ा भारी रहा है. भारत ने ईरान को 1.24 अरब डॉलर का सामान निर्यात किया, जबकि वहां से 0.44 अरब डॉलर का सामान मंगवाया. हालांकि, कुछ अंतरराष्ट्रीय आंकड़ों (UN COMTRADE) के मुताबिक 2024 में आयात का आंकड़ा बढ़कर 1.06 अरब डॉलर तक पहुंच गया है, जो दिखाता है कि प्रतिबंधों के बावजूद व्यापार बढ़ रहा है.
रुपया-रियाल में होता है व्यापार
ईरान पर अमेरिका द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के कारण डॉलर में व्यापार करना मुश्किल हो जाता है. ऐसे में भारत और ईरान ने व्यापार जारी रखने के लिए रुपया-रियाल पेमेंट मैकेनिज्म विकसित किया है. इस व्यवस्था के तहत दोनों देश अपनी स्थानीय करेंसी में लेनदेन करते हैं. इससे न केवल विदेशी मुद्रा भंडार की बचत होती है, बल्कि वैश्विक तनाव के बीच भी दोनों देशों का कारोबार बिना किसी रुकावट के चलता रहता है.
दोनों देशों के ऐतिहासिक संबंध
भारत और ईरान के संबंध साल 1947 के बंटवारे से पहले भौगोलिक रूप से बहुत करीब थे. हालांकि पाकिस्तान बनने के बाद सीधा जमीनी रास्ता खत्म हो गया, लेकिन 1950 में दोनों देशों ने औपचारिक राजनयिक रिश्ते शुरू किए. 1974 में इंदिरा गांधी की ईरान यात्रा के बाद व्यापार को नई दिशा मिली. आज भारत और ईरान ऊर्जा सुरक्षा, फार्मास्यूटिकल्स, आईटी और माइनिंग जैसे क्षेत्रों में एक-दूसरे का सहयोग कर रहे हैं, जो इस युद्ध के समय में भी बरकरार है.
निर्माण और कृषि क्षेत्र में ईरान का योगदान
इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में ईरान से आने वाला बिटुमेन सड़क बनाने के काम आता है. वहीं, ईरान से आने वाला फर्टिलाइजर भारतीय खेती के लिए महत्वपूर्ण है. इसके अलावा कांच और कांच के बने बर्तन भी बड़ी मात्रा में वहां से मंगवाए जाते हैं. छोटी मात्रा में ही सही, लेकिन चमड़ा और अन्य कच्चे माल का आयात भारतीय लघु उद्योगों को कच्चा माल उपलब्ध कराने में मदद करता है.
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Source: IOCL


























