मिडिल ईस्ट के रणक्षेत्र में जारी महायुद्ध ने पूरी दुनिया के सैन्य समीकरणों को हिलाकर रख दिया है. ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई की मौत के बाद माना जा रहा था कि ईरान घुटने टेक देगा, लेकिन हकीकत इसके बिल्कुल उलट निकली. अपनी आर्थिक और सैन्य सीमाओं के बावजूद ईरान ने पिछले 38 दिनों से जिस तरह अमेरिका और इजरायल जैसी महाशक्तियों को सीधी चुनौती दी है, उसने रक्षा विशेषज्ञों को हैरान कर दिया है. 'पावर गेम' के इस खूनी खेल में ईरान के पास ऐसे कौन से 'ब्रह्मास्त्र' हैं, जिनके दम पर वह झुकने को तैयार नहीं है?

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बैलिस्टिक मिसाइलों का अभेद्य जखीरा

ईरान की सैन्य शक्ति का सबसे बड़ा स्तंभ उसकी बैलिस्टिक मिसाइलें हैं. एक रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के पास 6,000 से 10,000 के बीच बैलिस्टिक मिसाइलों का भंडार है, जो लंबी दूरी तक सटीक मार करने में सक्षम हैं. इसमें 'फतह', 'सेजिल', 'सहाब-3' और 'खुर्रमशहर' जैसी मिसाइलें शामिल हैं. इन मिसाइलों ने न केवल इजरायल के शहरों को दहलाया है, बल्कि अमेरिकी एयरबेस को भी निशाना बनाया है. इतनी बड़ी संख्या में मिसाइलों की मौजूदगी ने ईरान को एक खतरनाक खिलाड़ी बना दिया है.

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दुनिया के सबसे घातक और सस्ते ड्रोन

ईरान ने आधुनिक युद्ध का तरीका बदल दिया है. उसके 'शाहिद-136' और 'मोहाजेर-6' जैसे ड्रोन दुनिया भर में अपनी मारक क्षमता के लिए मशहूर हो चुके हैं. ये ड्रोन न केवल सस्ते हैं, बल्कि लंबी दूरी तक उड़कर आत्मघाती हमला करने में माहिर हैं. ईरान के ये कामिकेज ड्रोन इतने सटीक हैं कि इन्होंने अमेरिका के अत्याधुनिक THAAD डिफेंस सिस्टम तक को ध्वस्त कर दिया है. मिसाइलों के साथ मिलकर ये ड्रोन ईरान के मॉर्डन वॉरफेयर का सबसे बड़ा हथियार साबित हुए हैं.

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क्रूज मिसाइलों की अदृश्य मारक क्षमता

बैलिस्टिक मिसाइलों के अलावा ईरान के पास सौमार और होवेजोह जैसी क्रूज मिसाइलें भी हैं. इनकी खासियत इनकी जबरदस्त सटीकता और एयर डिफेंस सिस्टम को चकमा देने की क्षमता है. ये मिसाइलें सतह से काफी कम ऊंचाई पर उड़ती हैं, जिससे इन्हें रडार पर पकड़ना मुश्किल होता है. समंदर में जहाजों को निशाना बनाने से लेकर जमीनी ठिकानों को तबाह करने तक, इन क्रूज मिसाइलों ने इजरायल और अमेरिका की नाक में दम कर रखा है.

ईरान का स्वदेशी सुरक्षा कवच

तकनीकी रूप से कमजोर कहे जाने वाले ईरान ने अपना खुद का मजबूत एयर डिफेंस सिस्टम तैयार किया है. इसमें मेड-इन-ईरान बैवर-373 और खोरदाद-3 शामिल हैं. इसके साथ ही रूस से खरीदा गया S-300 सिस्टम मिलकर एक त्रिस्तरीय सुरक्षा चक्र बनाता है. इसी सुरक्षा कवच की बदौलत ईरान ने कई दुश्मन विमानों और मिसाइलों को अपनी सीमा में घुसने से पहले ही मार गिराया है, जिससे उसकी सैन्य साख में भारी इजाफा हुआ है.

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की नाकाबंदी

ईरान ने अपनी सबमरीन, स्पीड बोट, एंटी-शिप मिसाइलों और समुद्री माइंस के दम पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह बंद कर दिया है. यह दुनिया का वो समुद्री रास्ता है जहां से वैश्विक तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा गुजरता है. इस नाकाबंदी ने पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को संकट में डाल दिया है. समंदर में ईरान का यह राज उसे कूटनीतिक मेज पर बेहद ताकतवर बनाता है और इसी दबाव के कारण अब सीजफायर की चर्चा शुरू हुई है.

HHH- ईरान की वो सेना जो दिखती नहीं

ईरान की सबसे गुप्त और बड़ी ताकत विद्रोही गुटों का समर्थन है, जिसे ट्रिपल-H (हमास, हिज्बुल्लाह और हूती) कहा जाता है. ईरान इन तीनों को पैसा, ट्रेनिंग और आधुनिक हथियार मुहैया कराता है. जहां अमेरिका इन्हें आतंकवादी संगठन मानता है, वहीं ईरान के लिए ये प्रॉक्सी वॉरियर्स हैं जो उसकी ओर से सीधे युद्ध लड़ रहे हैं. हूतियों ने समंदर में और हिज्बुल्लाह ने इजरायली सीमा पर मोर्चा खोलकर अमेरिका को बैकफुट पर धकेल दिया है.

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