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फिर बंद हो गया होर्मुज स्ट्रेट, जानें अब LPG मंगाने के भारत के पास कौन-कौन से रास्ते?

ईरान द्वारा होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने की घोषणा के बाद भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए कई वैकल्पिक योजनाओं पर काम कर रहा है. आइए जानें कि वो कौन से रास्ते हैं, जहां से भारत एलपीजी मंगा सकता है.

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  • भारत कूटनीति और नौसैनिक सुरक्षा से आपूर्ति सुनिश्चित करेगा.

मध्य पूर्व में एक बार फिर युद्ध की आहट तेज हो गई है. अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक जलमार्ग 'होर्मुज स्ट्रेट' पर ताला लगा दिया है. ईरान की संयुक्त सैन्य कमान ने इस रणनीतिक रास्ते को पूरी तरह बंद करने का ऐलान करते हुए कड़ी चेतावनी दी है. अब तेल टैंकरों या किसी भी कमर्शियल जहाज का यहां से गुजरना जोखिम भरा हो गया है. भारत के लिए यह खबर किसी बड़े झटके से कम नहीं है क्योंकि हमारी ऊर्जा जरूरतों, खासकर एलपीजी का एक बहुत बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से आता है. ऐसी आपातकालीन स्थिति में भारत के पास अपनी रसोई गैस की सप्लाई जारी रखने के लिए क्या विकल्प हैं, इसे विस्तार से समझना जरूरी है.

अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया से सीधी आपूर्ति

जब होर्मुज का रास्ता बंद होता है, तो भारत की नजरें दुनिया के दूसरे बड़े उत्पादकों पर टिक जाती हैं. भारत ऐसी स्थिति में संयुक्त राज्य अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों से एलपीजी का आयात बढ़ाने की तैयारी कर चुका है. अमेरिकी गल्फ कोस्ट से आने वाले जहाज अटलांटिक महासागर और अफ्रीका के दक्षिणी सिरे यानी 'केप ऑफ गुड होप' का लंबा रास्ता तय करके भारत के पश्चिमी तटों तक पहुंचते हैं. इसी तरह ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका के वेस्ट कोस्ट से आने वाली गैस प्रशांत महासागर के रास्ते सीधे भारत के पूर्वी तट पर स्थित एन्नोर और धामरा जैसे बंदरगाहों तक पहुंचती है. यह रास्ता लंबा जरूर है, लेकिन सुरक्षित है.

खाड़ी देशों के वैकल्पिक बंदरगाहों का इस्तेमाल

होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने का मतलब यह नहीं है कि खाड़ी देशों से व्यापार पूरी तरह खत्म हो गया है. सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जैसे देशों ने भविष्य के ऐसे ही संकटों को भांपते हुए पाइपलाइनों का जाल बिछाया है. इन पाइपलाइनों के जरिए तेल और गैस को फारस की खाड़ी से बाहर निकालकर सीधे अरब सागर या लाल सागर तक पहुंचाया जाता है. भारत इन वैकल्पिक बंदरगाहों के माध्यम से अपना माल मंगा सकता है. इससे होर्मुज स्ट्रेट के उस खतरनाक पॉइंट से बचा जा सकता है जहां ईरान की सेना तैनात रहती है.

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फजाइरा और यंबू बंदरगाहों की रणनीतिक भूमिका

संयुक्त अरब अमीरात का फजाइरा बंदरगाह और सऊदी अरब का यंबू बंदरगाह भारत के लिए संकटमोचक साबित हो सकते हैं. यूएई की हबशान-फजाइरा पाइपलाइन सीधे ओमान की खाड़ी तक गैस पहुंचाती है, जिससे जहाजों को होर्मुज के संकरे रास्ते में घुसने की जरूरत नहीं पड़ती. इसी तरह सऊदी अरब की 'ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन' कच्चे तेल और गैस को लाल सागर स्थित यंबू बंदरगाह तक ले जाती है. भारतीय जहाज सीधे इन सुरक्षित बंदरगाहों से कार्गो लोड कर सकते हैं. यह रणनीतिक बदलाव भारत को ऊर्जा संकट से बचाने के लिए सबसे प्रभावी और तेज रास्ता माना जाता है.

भारत का अपना रणनीतिक गैस भंडारण

आयात के अलावा भारत के पास अपने घरेलू सुरक्षा कवच भी हैं जिन्हें 'स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व्स' (SPR) कहा जाता है. विशाखापत्तनम और मंगलुरु जैसे शहरों में भारत ने जमीन के नीचे विशाल चट्टानी गुफाएं (Caverns) बनाई हैं जहां आपातकालीन स्थिति के लिए भारी मात्रा में ईंधन जमा रखा जाता है. जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में सप्लाई चेन टूटती है, तब सरकार इन भूमिगत भंडारों का उपयोग करती है ताकि देश में गैस की किल्लत न हो. यह भंडार भारत को करीब 10 से 15 दिनों तक का अतिरिक्त समय देते हैं जिससे आपूर्ति व्यवस्था को दोबारा व्यवस्थित किया जा सके.

घरेलू उत्पादन में वृद्धि और रिफाइनरी फोकस

संकट के समय भारत अपनी घरेलू रिफाइनरियों की क्षमता का भी पूरा इस्तेमाल करता है. इंडियन ऑयल (IOCL), हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) और भारत पेट्रोलियम (BPCL) जैसी कंपनियां अपनी रिफाइनरी प्रक्रियाओं में बदलाव करती हैं. प्रोपेन और ब्यूटेन जैसी धाराओं को एलपीजी उत्पादन की ओर मोड़ दिया जाता है ताकि देश के भीतर ही गैस की पैदावार बढ़ाई जा सके. यह कदम विदेशी आयात पर निर्भरता को कुछ समय के लिए कम करने में मदद करता है. इससे घरेलू बाजार में एलपीजी की उपलब्धता सुनिश्चित होती है और कीमतों पर भी लगाम बनी रहती है.

कूटनीतिक रास्ते और नौसैनिक एस्कॉर्ट की सुरक्षा

अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण विकल्प कूटनीति का होता है. भारत सरकार ऐसी स्थितियों में मित्र देशों और ईरान जैसे देशों के साथ बातचीत के जरिए सुरक्षित गलियारा बनाने का प्रयास करती है. अगर जरूरत पड़े, तो भारतीय नौसेना अपने युद्धपोतों के जरिए तेल और गैस के टैंकरों को सुरक्षा कवच (Escort) प्रदान करती है. 'ऑपरेशन संकल्प' जैसे मिशनों के जरिए भारतीय जहाजों की सुरक्षित निकासी सुनिश्चित की जाती है. यह तालमेल अंतरराष्ट्रीय कानूनों और कूटनीतिक रिश्तों के दम पर भारत की ऊर्जा सुरक्षा को बनाए रखने में सबसे बड़ी ढाल साबित होता है.

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About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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