Iran America War: ईरान की हिट लिस्ट में डोनाल्ड ट्रंप का भी नाम, कितना मुश्किल है अमेरिका के राष्ट्रपति तक पहुंचना?
Iran America War: ईरान के सर्वेच्च लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद उसने डोनाल्ड ट्रंप सहित 13 नेताओं को हिट लिस्ट में डाला है. चलिए जानें कि ईरान का ट्रंप तक पहुंचना कितना मुश्किल है.

Iran America War: अमेरिका और ईरान के बीच गहराते युद्ध के बीच अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम की अचानक हुई मौत ने वैश्विक राजनीति में भूचाल मचा दिया है. इस घटना के तुरंत बाद ईरान के सरकारी अखबारों ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप समेत दुनिया के कई बड़े नेताओं को अपनी रडारा पर लेते हुए खुली धमकी दी है. ईरान की इस नई हिट लिस्ट में डोनाल्ड ट्रंप के अलावा इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू और कई यूरोपीय व अमेरिकी दिग्गजों के नाम शामिल हैं. इस खुलासे के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या ईरान की धमकियां वाकई हकीकत बन सकती हैं और क्या वो ट्रंप की गर्दन पकड़ने में कामयाब हो सकता है?
ईरान की हिट लिस्ट में 13 वैश्विक नेता
ईरान के बेहद रसूखदार और प्रमुख अखबार हमशहरी ने अपने मुख्य पन्ने पर एक बेहद डरावना और बड़ा ग्राफिक छापा है. इस ग्राफिक में दुनिया को 13 सबसे बड़े राजनीतिक और सैन्य चेहरों की तस्वीरें छापी गई हैं, जिसके ऊपर बड़े अक्षरों में ‘अचानक मौत के लिए तैयार रहें’ जैसी खौफनाक चेतावनी लिखी है. ईरान इन तमाम विदेशी नेताओं को अपने पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या का मुख्य कसूरवार मानता है. इस खतरनाक सूची में ट्रंप और नेतन्याहू के अलावा अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ, सेंटकॉम कमांडर ब्रैड कूपर और इजरायल में अमेरिकी राजदूत माइक हकाबी के नाम प्रमुखता से शामिल किए गए हैं.
ईरान की ट्रंप को चेतावनी और अमेरिकी राष्ट्रपति का सुरक्षा ढांचा
ईरान की तरफ से मिल रही इन धमकियों के बीच अगर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सुरक्षा की बात करें, तो उन तक पहुंचना किसी भी बाहरी ताकत के लिए लगभग नामुमकिन माना जाता है. अमेरिकी राष्ट्रपति के चारों तरफ सुरक्षा का ऐसा अभेद्य और बहुस्तरीय घेरा होता है जिसे दुनिया की कोई भी सेना आसानी से नहीं तोड़ सकती है. इस सुरक्षा तंत्र की मुख्य रीढ़ यूनाइटेड स्टेट्स सीक्रेट सर्विस नाम की एक बेहद खास और अत्यधिक प्रशिक्षित एजेंसी है. यह एजेंसी चौबीर घंटे साये की तरह से राष्ट्रपति के साथ रहती है और उनके हर छोटे-बड़े मूवमेंट की योजना महीनों पहले से तैयार करती है.
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मिलिट्री-ग्रेड जैसा ट्रंप का अभेद्य सुरक्षा घेरा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सुरक्षा व्यवस्था वर्तमान में सामान्य से कई गुना अधिक बढ़ा दी गई है, क्योंकि अतीत में उन पर दो बार जानलेवा हमले की कोशिश हो चुकी है. पहली बार साल 2024 में चुनाव प्रचार के दौरान और हाल ही में 26 अप्रैल 2026 को वाशिंगटन डीसी के हिल्टन होटल में उन पर गोलियां चलाई गई थीं. इन दोनों हादसों के बाद अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों ने सबक लेते हुए सुरक्षा व्यवस्था तो मिलिट्री-ग्रेड लेवल पर पहुंचा दिया है. अब उनके बेहद करीबी घेरे में ही हर वक्त 300 से अधिक घातक हथियारों से लैस कमांडो और शार्पशूटरों की फौज तैनात रहती है.
7000 एजेंटों की फौज और काफिले के साथ चलने वाला एंटी-मिसाइल सिस्टम
सीक्रेट सर्विस के पास वर्तमान में 7000 से ज्यादा जांबाज एटेंजों की एक विशाल टीम तैतान रहती है, जिसमें से एक विशेष प्रेसिडेंशियल प्रोटेक्टिव डिवीजन चौबीस घंटे सिर्फ राष्ट्रपति की हिफाजत में लगा रहता है. ट्रंप जब भी व्हाइट हाउस से बाहर निकलते हैं, तो उनके साथ चलने वाले बख्तरबंद काफिले में अत्याधुनिक जैमर्स, एंटी मिसाइल डिफेंस सिस्टम और काउंटर-असाल्ट टीमें शामिल होती हैं. यह पूरा सिस्टम किसी भी तरह के ड्रोन, मिसाइल या सैटेलाइट हमले को हवा में ही नाकाम करने की पूरी क्षमता रखता है. राष्ट्रपति की सुरक्षा का यह तकनीकी ढांचा दुनिया में सबसे आधुनिक है.
सीआईए और एफबीआई का खुफिया नेटवर्क
किसी भी भौतिक हमले को रोकने के साथ-साथ अमेरिका का खुफिया तंत्र बैकग्राउंड में सबसे बड़ी भूमिका निभाता है. दुनिया की सबसे खतरनाक खुफिया एजेंसियां जैसे सीआईए और एफबीआई वैश्विक स्तर पर सक्रिय रहती हैं. ये एजेंसियां इंटरनेट, सैटेलाइट और अपने जमीनी नेटवर्क के जरिए ईरान या किसी भी अन्य दुश्मन देश में रची जा रही साजिशों की भनक महीनों पहले लगा लेती हैं. सीक्रेट सर्विस के पास विशेष खुफिया नेटवर्क होता है जो राष्ट्रपति के कदम रखने से पहले ही उस पूरे इलाके को अपने नियंत्रण में ले लेता है, जिससे किसी भी अनहोनी की गुंजाइश खत्म हो जाती है.
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