अमेरिका ने सीरिया और ईरान के तटीय ठिकानों पर फिर से हवाई और मिसाइल स्ट्राइक शुरू कर दी हैं. अमेरिकी सैन्य बलों द्वारा सिरिक, खुजस्तान, केश्म द्वीप और बंदर अब्बास में रात के समय किए गए ताबड़तोड़ हमलों में 19 लोगों की जान चली गई, जबकि 68 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं. इसके बाद दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है. अमेरिकी और इजरायली सेना के मुकाबले ईरान के सैन्य संसाधन और उसकी क्षमता अब सवालों के घेरे में है. आइए जानते हैं कि ईरान इस युद्ध को कितने समय तक खींच सकता है.
सीधे युद्ध की समय-सीमा और रणनीतिक क्षमता
सैन्य विशेषज्ञों का आकलन है कि यदि अमेरिका और इजराइल के खिलाफ सीधी और तीव्र सैन्य भिड़ंत जारी रहती है, तो ईरान अपनी मुख्य सैन्य शक्ति के बल पर 15 से 45 दिनों तक ही पूरी ताकत से डटा रह सकता है. हालांकि, यदि वह सीधी लड़ाई के बजाय छिटपुट हमलों और गुरिल्ला रणनीति का सहारा लेता है, तो वह महीनों तक फारस की खाड़ी और मध्य पूर्व के क्षेत्र में अस्थिरता बनाए रखने में सक्षम है.
बैलिस्टिक मिसाइलों और लॉन्चर्स की स्थिति
संघर्ष की शुरुआत में ईरान के पास लगभग 3,000 बैलिस्टिक मिसाइलों का विशाल जखीरा मौजूद था. पिछले हमलों और सैन्य इस्तेमाल के बाद अब उसके पास करीब 2,500 मिसाइलें और लॉन्चर बचे हैं. वर्तमान में ईरान हर महीने लगभग 100 नई मिसाइलों का निर्माण कर रहा है, लेकिन युद्ध में उनके इस्तेमाल की दर उसके उत्पादन से कहीं ज्यादा है. खुफिया जानकारी के मुताबिक, हमलों के बावजूद ईरान के पास अपनी मूल मिसाइल क्षमता का 60% से 70% हिस्सा सुरक्षित बचा हुआ है.
यह भी पढ़ें: दुनियाभर में कितने एरिया में मौजूद हैं ग्लेशियर? जान लें एक-एक डिटेल
ड्रोन बेड़ा और भूमिगत ठिकाने
मिसाइलों के अलावा, ईरान की असली ताकत उसका घातक ड्रोन नेटवर्क है. ईरान के पास शाहेद-136 जैसे हजारों की संख्या में सस्ते और आत्मघाती ड्रोन मौजूद हैं. भूमिगत सुरंगों और तहखानों में छिपाकर रखी गई लगभग 2,100 मिसाइलें और 60 से 70 प्रतिशत मोबाइल लॉन्चर अब भी पूरी तरह से चालू स्थिति में हैं, जिनका इस्तेमाल वह अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाने के लिए कभी भी कर सकता है.
पारंपरिक सैन्य बल और परमाणु स्थिति
पारंपरिक सैन्य साजो-सामान के मामले में ईरान के पास लगभग 6 लाख सक्रिय सैनिकों की बड़ी सेना है. वायुसेना और नौसेना की बात करें तो ईरान के पास कुल 551 सैन्य विमान हैं, जिनमें करीब 188 फाइटर जेट्स शामिल हैं. इसके अलावा 128 हेलीकॉप्टर और 28 से 30 पनडुब्बियां उसके बेड़े में मौजूद हैं. जहां तक परमाणु हथियारों का सवाल है, आधिकारिक तौर पर ईरान के पास एक भी परमाणु बम नहीं है, लेकिन उसका यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम ही अमेरिका और इजराइल की मुख्य चिंता का कारण है.
हथियारों की आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय सहारा
युद्ध के मैदान में भारी नुकसान के बावजूद ईरान अपने रक्षा उत्पादन को पूरी तरह ठप्प नहीं होने दे रहा है. रूस और चीन से मिलने वाली अप्रत्यक्ष तकनीकी सहायता और कलपुर्जों की आपूर्ति के दम पर वह नष्ट हुए हथियारों की भरपाई करने में जुटा हुआ है. यही वजह है कि ईरान अपनी कम लागत वाली तकनीक और ड्रोनों के सहारे लंबी लड़ाई की रणनीति पर काम कर रहा है.
यह भी पढ़ें: पूरी दुनिया में अब कितना तेल बचा, कितने साल तक होगी सप्लाई?
