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होर्मुज स्ट्रेट खुलने के बाद कितने दिन में नॉर्मल होगी LPG और पेट्रोल-डीजल की सप्लाई, जानें कितना हो जाएगा सस्ता?

Iran America Peace Deal: अमेरिका और ईरान के आपसी समझौते से रणनीतिक समुद्री जलमार्ग होर्मुज के ताले तो खुल जाएंगे, लेकिन क्या आपको पता है कि देश में तेल और गैस की आपूर्ति कब तक नॉर्मल हो पाएगी.

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  • अमेरिका-ईरान शांति समझौते से हॉर्मुज जलडमरूमध्य फिर खुला.
  • ईंधन आपूर्ति सामान्य होने में हफ्तों, एलपीजी में वर्षों लगेंगे.
  • तेल कुएं दोबारा चालू करना, समुद्री बीमा बड़ी चुनौती.
  • उपभोक्ताओं को ईंधन की कीमतों में मामूली, धीमी राहत मिलेगी.

अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध खत्म होने की खबर से पूरी दुनिया ने राहत की सांस ली है. दोनों देशों के बीच हुए इस शांति समझौते के बाद वैश्विक बाजार में एक नई उम्मीद जागी है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर इस बात की जानकारी साझा की है कि दशकों पुराना यह विवाद अब थमने की ओर है. इस समझौते के तहत दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक समुद्री रास्ते यानी होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोलने का फैसला किया गया है. हालांकि इस रास्ते के खुलने की खबर जितनी सुखद है, जमीनी स्तर पर ईंधन की सप्लाई को पटरी पर लाना उतना ही पेचीदा काम है.

कितने दिन में नॉर्मल हो सकती है सप्लाईं?

अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज स्ट्रेट खुलने के तुरंत बाद पेट्रोल और डीजल की सप्लाई सामान्य नहीं होने वाली है. आम जनता को लग सकता है कि समझौता होते ही सब कुछ पहले जैसा हो जाएगा, लेकिन हकीकत अलग है. इस समुद्री रास्ते के पूरी तरह चालू होने के बाद भी पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति को सुचारू रूप से चलने में कुछ हफ्तों से लेकर कई महीनों का समय लग सकता है. इस पूरी प्रक्रिया के पीछे कई तकनीकी और सुरक्षा से जुड़े कारण शामिल हैं, जो तेल की निर्बाध सप्लाई के रास्ते में बड़ी बाधा बने हुए हैं.

एलपीजी के लिए लंबा इंतजार

पेट्रोल और डीजल से भी ज्यादा चिंताजनक स्थिति रसोई गैस यानी एलपीजी की सप्लाई को लेकर बनी हुई है. जानकारों के मुताबिक वैश्विक स्तर पर बाधित हो चुकी एलपीजी की पूरी सप्लाई चेन को दोबारा दुरुस्त करने में लगभग 3 से 4 साल का एक लंबा वक्त लग सकता है. भारत के लिहाज से यह बेहद संवेदनशील मामला है, क्योंकि हमारा देश अपनी कुल एलपीजी जरूरतों का करीब 60% हिस्सा पश्चिमी एशिया के देशों से ही मंगाता है. इस संकट के कारण जो सप्लाई नेटवर्क पूरी तरह बिखर चुका है, उसे दोबारा अपनी पुरानी क्षमता में लौटने में लंबा समय लगेगा.

यह भी पढ़ें: Iran US Deal: 4% गिरे क्रूड ऑयल के दाम, इससे कितना सस्ता हो जाएगा पेट्रोल-डीजल; क्या भारत में भी घटेंगे दाम?

तेल के लिए कब तक मिलेगी राहत?

समझौते के बाद शुरुआती कुछ दिनों में उन जहाजों को बड़ी राहत मिलेगी जो पिछले काफी समय से समुद्र में फंसे हुए थे. होर्मुज स्ट्रेट के खुलते ही इन अटके हुए तेल टैंकरों की आवाजाही तुरंत प्रभाव से शुरू हो जाएगी, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की आवक बढ़ेगी. हालांकि यह राहत बेहद शुरुआती और सीमित होगी क्योंकि यह केवल उस तेल तक सीमित है जो पहले से जहाजों में लोड हो चुका है. बाजार की तात्कालिक मांग को पूरा करने के लिए यह कदम अच्छा है, लेकिन भविष्य की नियमित सप्लाई के लिए अभी लंबा इंतजार करना होगा.

कुओं को दोबारा चालू करने की चुनौती

कच्चे तेल के कुओं को एक बार बंद करने के बाद उन्हें दोबारा चालू करना बेहद जटिल और धीमी प्रक्रिया मानी जाती है. तेल के उत्पादन को संकट से पहले वाले स्तर पर लाने और रिफाइनिंग की पूरी प्रक्रिया को सामान्य करने में कम से कम 3 से 4 महीने का समय लग जाएगा. कुछ खास तेल क्षेत्रों में तो इस उत्पादन को पूरी तरह बहाल होने में 6 से 12 महीने तक की अवधि भी लग सकती है. रिफाइनरियों तक नया क्रूड ऑयल पहुंचने और वहां से पेट्रोल-डीजल तैयार होने के अपने तय नियम और समयसीमा होती है जिसे छोटा नहीं किया जा सकता.

समुद्री बीमा का बड़ा आर्थिक बोझ

युद्ध भले ही थम गया हो, लेकिन समुद्र में जहाजों को लेकर पैदा हुआ डर इतनी जल्दी खत्म नहीं होता है. जब तक शिपिंग कंपनियों और जहाजों को सुरक्षा का पूरा भरोसा नहीं मिल जाता, तब तक समुद्री बीमा की दरें यानी इंश्योरेंस प्रीमियम बहुत ज्यादा ऊंचा बना रहेगा. बढ़ा हुआ इंश्योरेंस प्रीमियम सीधे तौर पर तेल की ढुलाई लागत को बढ़ा देता है. जब तक यह बीमा खर्च कम नहीं होगा, तब तक वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिलता रहेगा, जिसका असर आम उपभोक्ताओं पर पड़ेगा.

भारत तक तेल पहुंचने में कितना लगेगा समय?

खाड़ी देशों से भारत की दूरी को देखते हुए तेल के परिवहन में एक निश्चित समय लगता है. इस समुद्री रास्ते के पूरी तरह खुलने के बाद भी भारतीय रिफाइनरियों के लिए नए सिरे से तेल लोड करने और जहाजों को भारत के बंदरगाहों तक पहुंचने में लगभग 30 से 40 दिन का समय लगेगा. इसके अलावा होर्मुज जलडमरूमध्य में युद्ध के दौरान बिछाई गई बारूदी सुरंगों की आशंका को भी खारिज नहीं किया जा सकता. सुरक्षा एजेंसियों द्वारा इन रास्तों की बारीकी से जांच करने और उन्हें पूरी तरह साफ करने में भी काफी दिन लग सकते हैं.

कीमतों में कितनी हो सकती है कटौती?

अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस मार्ग के खुलने से कच्चे तेल पर बना हुआ मानसिक और आर्थिक दबाव जरूर कम हुआ है. लेकिन तेल के उत्पादन, शिपिंग और रिफाइनिंग की धीमी रफ्तार को देखते हुए आम जनता के लिए ईंधन की कीमतों में किसी बहुत बड़ी या जादुई कटौती की उम्मीद करना जल्दबाजी होगी. समुद्री बीमा की ऊंची दरों और सप्लाई चेन के पुनर्निर्माण के खर्च के कारण भारत में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस के दामों में बहुत ही सीमित और बेहद धीमी गिरावट देखने को मिलेगी, जो कि उपभोक्ताओं को धीरे-धीरे महसूस होगी.

यह भी पढ़ें: भारत से कितना महंगा है अमेरिका, जानें यहां एक दिन का खर्चा कितना?

About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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