उत्तर प्रदेश के दो चर्चित आईपीएस अधिकारियों, संभल के एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई और बरेली में तैनात अंशिका वर्मा की शादी इन दिनों सुर्खियों में है. राजस्थान की धरती पर होने जा रहे इस शाही विवाह में बड़े राजनेताओं से लेकर प्रशासनिक दिग्गजों का जमावड़ा लगेगा. लेकिन इस चमक-धमक के पीछे एक गहरा सरकारी प्रोटोकॉल भी काम करता है. भारत में एक आईएएस या आईपीएस अधिकारी के लिए शादी करना सिर्फ एक निजी फैसला नहीं, बल्कि एक आधिकारिक प्रक्रिया भी है, जिसमें सरकार की परमिशन और नियमों का पालन अनिवार्य होता है. आइए जानें कि सरकारी परमिशन क्यों जरूरी होती है.

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कैडर मैनेजमेंट और ट्रांसफर का पेचीदा मामला

जब दो आईएएस या आईपीएस अधिकारी आपस में शादी करने का फैसला करते हैं, तो सबसे बड़ी चुनौती उनके कैडर यानी कार्यक्षेत्र को लेकर आती है. भारत सरकार के कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (DoPT) के नियमों के अनुसार, अधिकारी आमतौर पर यह अनुरोध करते हैं कि शादी के बाद उन्हें एक ही राज्य में तैनात किया जाए. सरकार को इन तबादलों का प्रबंधन इस तरह करना होता है कि पति-पत्नी साथ रह सकें, लेकिन साथ ही यह भी सुनिश्चित करना पड़ता है कि उन्हें उनके गृह राज्य में पोस्टिंग न मिले.

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निष्पक्षता को बनाए रखना

प्रशासनिक अधिकारियों को शादी की जानकारी सरकार को देने के पीछे एक मुख्य कारण 'कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट' यानी हितों के टकराव को रोकना है. सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि अधिकारी के वैवाहिक संबंध उसके सार्वजनिक कर्तव्यों और निर्णयों के बीच में न आएं. यह नियम इसलिए बनाया गया है ताकि प्रशासन की निष्पक्षता बनी रहे और कोई भी अधिकारी अपने पद का इस्तेमाल अपने जीवनसाथी या उसके परिवार को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए न कर सके. 

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विदेशी नागरिक से शादी पर सुरक्षा और कानूनी पेंच

यदि कोई भारतीय प्रशासनिक सेवा का अधिकारी किसी विदेशी नागरिक से शादी करना चाहता है, तो नियम और भी सख्त हो जाते हैं. ऐसी स्थिति में अधिकारी को सरकार से औपचारिक अनुमति और सुरक्षा क्लीयरेंस लेनी पड़ती है. सरकार को संभावित सुरक्षा जोखिमों की निगरानी करनी होती है ताकि देश की गोपनीय जानकारियां या रणनीतिक हित प्रभावित न हों. यह प्रक्रिया काफी लंबी हो सकती है और इसमें कई जांच एजेंसियों की रिपोर्ट शामिल होती है.

आचार संहिता और नैतिक मानकों का पालन

आईएएस और आईपीएस अधिकारियों के लिए एक निर्धारित 'कोड ऑफ कंडक्ट' यानी आचार संहिता होती है. हालांकि सरकार किसी को शादी करने से रोकती नहीं है, लेकिन विवाह की घोषणा करना उच्च नैतिक मानकों को बनाए रखने का एक हिस्सा है. इससे सिस्टम में पारदर्शिता बनी रहती है. यदि अधिकारी अपनी शादी या संपत्ति के बारे में जानकारी छिपाते हैं, तो इसे अनुशासनहीनता माना जा सकता है और उनके करियर पर इसका नकारात्मक असर पड़ सकता है.

शादी के बाद कैडर बदलने की विशेष छूट

आमतौर पर एक बार कैडर आवंटित होने के बाद उसे बदलना लगभग असंभव होता है, लेकिन शादी एक ऐसा विशेष आधार है जिस पर सरकार नरम रुख अपनाती है. नियम कहते हैं कि यदि पति-पत्नी दोनों अखिल भारतीय सेवा के अधिकारी हैं, तो उन्हें मैरिज ग्राउंड पर एक ही कैडर में जाने की अनुमति मिल सकती है. हालांकि, इसमें शर्त यह होती है कि वे जिस कैडर की मांग कर रहे हैं, वह उनमें से किसी का भी गृह राज्य नहीं होना चाहिए, ताकि स्थानीय रसूख और पक्षपात की गुंजाइश खत्म की जा सके.

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