इंडियन प्रीमियर लीग यानि IPL दुनिया की सबसे महंगी और लोकप्रिय क्रिकेट लीगों में से एक है. हर साल इसमें देशी-विदेशी खिलाड़ियों पर करोड़ों रुपये की बोली लगती है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा कि क्या क्रिकेटर्स को आईपीएल से मिलने वाली पूरी रकम मिल जाती है? या फिर उन्हें इस कमाई पर टैक्स देना पड़ता है? चलिए इसी सवाल का जवाब हम आपको बताते हैं कि क्या सच में आईपीएल के पैसों पर टैक्स नहीं भरते हैं क्रिकेटर्स इसे लेकर क्या नियम हैं. 

कैसे कटता है टैक्स?

भारत में हर तरह की आय पर इनकम टैक्स देना अनिवार्य है और आईपीएल की कमाई भी इससे अलग नहीं है. चाहे खिलाड़ी भारतीय हो या विदेशी उन्हें अपनी कमाई पर टैक्स देना पड़ता है. आईपीएल में खिलाड़ियों को फ्रेंचाइजी से मिलने वाली रकम को 'प्रोफेशनल इनकम' माना जाता है. यह रकम उनकी सालाना आय में जुड़ती है और फिर उस पर लागू टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स कटता है.

भारतीय खिलाड़ियों के लिए टैक्स नियमभारतीय खिलाड़ियों के लिए आईपीएल की कमाई पर इनकम टैक्स एक्ट, 1961 के तहत टैक्स देना होता है. जब आईपीएल के लिए खिलाड़ियों की नीलामी होती है तो उनकी नीलामी राशि से टीडीएस के रूप में कटौती की जाती है.  भारत सरकार भारतीय खिलाड़ियों की सैलरी पर 10 प्रतिश टैक्स लगाती है यह टैक्स आईपीएल फ्रेंचाइजी खिलाड़ी को पेमेंट करने से पहले टैक्स TDS के रूप में काटती है. वहीं विदेशी खिलाड़ियों की सैलरी पर 20 प्रतिशत टैक्स काटा जाता है. कैसे कटता है टैक्स?

उदाहरण के लिए अगर किसी खिलाड़ी की सैलरी 10 करोड़ रुपये है तो फ्रेंचाइजी खिलाड़ी को पेमेंट करने से पहले टैक्स के रूप में 1 करोड़ रुपये काट लेगी. जबकि विदेशी खिलाड़ी हो तो 2 करोड़ रुपये. काटे गए TDS को खिलाड़ियों की ओर से भारत सरकार के पास जमा किया जाता है.

टीडीएस का नियमआईपीएल में फ्रेंचाइजी खिलाड़ियों को पेमेंट करने से पहले 10% टैक्स डिडक्शन एट सोर्स (TDS) काटती हैं. कुछ फ्रेंचाइजी सीजन शुरू होने से पहले आधा पेमेंट करती हैं, बाकी सीजन खत्म होने के बाद. बीसीसीआई यह सुनिश्चित करता है कि खिलाड़ियों को पूरा पेमेंट मिले.

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