IPL 2026: दुनिया की सबसे अमीर क्रिकेट लीग यानी आईपीएल 2026 का खिताबी मुकाबला आगामी 31 मई को अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में खेला जाएगा. टूर्नामेंट के अंत में ट्रॉफी उठाने वाली टीम पर पैसों की भारी बरसात होती है, जिसे देखकर हर क्रिकेट प्रेमी के मन में यह सवाल जरूर उठता है कि आखिर यह करोड़ों रुपये की इनामी राशि जाती किसके पास है? क्या यह पूरी रकम टीम के अरबपति मालिकों की जेब में जाती है या फिर मैदान पर पसीना बहाने वाले खिलाड़ियों के बीच बांटी जाती है? आइए बीसीसीआई के आधिकारिक नियमों के आधार पर पैसों के इस बंटवारे का पूरा गणित समझते हैं. 

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BCCI के प्राइज मनी वितरण से जुड़े नियम और शर्तें

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने इंडियन प्रीमियर लीग के तहत मिलने वाली पुरस्कार राशि के वितरण को लेकर बेहद स्पष्ट और कड़े नियम बनाए हैं. इन नियमों के मुताबिक, फाइनल मैच जीतने वाली टीम को मिलने वाली कुल इनामी राशि का एक बड़ा हिस्सा उन खिलाड़ियों और सहयोगी स्टाफ को मिलना अनिवार्य है जो टीम को चैंपियन बनाने के लिए मैदान पर दिन-रात मेहनत करते हैं. बोर्ड ने यह साफ कर दिया है कि कोई भी फ्रेंचाइजी पूरी की पूरी प्राइज मनी को अकेले अपने पास नहीं रख सकती है और उसे तय नियमों के तहत इसका एक निश्चित भाग अपनी टीम के साथ साझा करना ही पड़ता है. 

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फ्रेंचाइजी मालिकों और खिलाड़ियों में 50-50 का बंटवारा

आईपीएल की पुरस्कार राशि को मुख्य रूप से दो बराबर भागों में विभाजित किया जाता है, जिसमें से आधा हिस्सा फ्रेंचाइजी मालिकों के पास जाता है और आधा हिस्सा खिलाड़ियों को मिलता है. यदि फाइनल में कोई भी टीम फ्रेंचाइजी चैंपियन बनती है, तो उसे मिलने वाले 20 करोड़ रुपये का कम से कम 50 प्रतिशत यानी 10 करोड़ रुपये अनिवार्य रूप से टीम के सभी खिलाड़ियों और कोचिंग स्टाफ के बीच वितरित करना होता है. बाकी बची 50 प्रतिशत की राशि ही फ्रेंचाइजी की मुख्य कंपनी के खाते में जमा की जाती है. 

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योगदान के आधार पर इनामी रकम का बंटवारा 

खिलाड़ियों को मिलने वाले इस 50 प्रतिशत हिस्से को टीम के भीतर उनके व्यक्तिगत योगदान, प्रदर्शन, भूमिका और फ्रेंचाइजी की अपनी आंतरिक रणनीतियों के आधार पर आपस में बांट दिया जाता है. इसके अलावा, एक महत्वपूर्ण बात यह भी है कि इस इनामी राशि का खिलाड़ियों को आईपीएल नीलामी (ऑक्शन) के दौरान मिलने वाली उनकी तय फीस या सैलरी से कोई लेना-देना नहीं होता है. सभी घरेलू और विदेशी खिलाड़ियों को फ्रेंचाइजी द्वारा एग्रीमेंट के तहत उनकी पूरी सैलरी अलग से दी जाती है, और यह बोनस प्राइज मनी उस तय सालाना वेतन के अतिरिक्त होती है. 

कहां से होती है फ्रेंचाइजी मालिकों की असली कमाई?

क्रिकेट फैंस के मन में यह सवाल आ सकता है कि क्या फ्रेंचाइजी मालिक सिर्फ 10 करोड़ रुपये की कमाई के लिए टीम पर अरबों रुपये खर्च करते हैं? असल में, आईपीएल टीमों के मालिकों की असली और सबसे बड़ी कमाई का जरिया यह प्राइज मनी बिल्कुल भी नहीं होती है. फ्रेंचाइजी कंपनियां बीसीसीआई के केंद्रीय राजस्व पूल से मिलने वाले मीडिया राइट्स (टीवी और डिजिटल ब्रॉडकास्टिंग), बड़ी कंपनियों के साथ होने वाली स्पॉन्सरशिप डील्स, एसोसिएट पार्टनर्स और घरेलू मैदानों पर होने वाले मैचों के टिकटों की बंपर बिक्री से हर साल सैकड़ों करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा कमाती हैं.

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