Agni 4 Ballistic Missile: भारत ने 6 अगस्त 2026 को अपनी सैन्य रणनीति को एक नई और अपराजेय मजबूती देते हुए मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल अग्नि-4 का रात्रि में सफल परीक्षण संपन्न किया. ओडिशा के बालासोर स्थित चांदीपुर एकीकृत परीक्षण रेंज (ITR) से दागी गई इस मिसाइल ने अपने सभी तकनीकी और मारक मापदंडों को शत-प्रतिशत हासिल किया. 4500 किलोमीटर से अधिक की मारक क्षमता वाली यह स्वदेशी मिसाइल पारंपरिक और परमाणु दोनों तरह के हथियारों को ढोने में पूरी तरह सक्षम है. यह सफल परीक्षण एशिया महाद्वीप और आसपास के कूटनीतिक हलकों में भारत के मजबूत सामरिक प्रभुत्व को रेखांकित करता है.

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अग्नि-4 की रेंज में कितने देश?

अग्नि-4 की 4,500 किलोमीटर से अधिक की मारक क्षमता इसे एक विशाल भौगोलिक क्षेत्र पर बढ़त दिलाती है. इस मिसाइल की सीधी सीमा में चीन के सुदूर पूर्वी शहर जैसे बीजिंग, शंघाई और गुआंगझू के अलावा पूरे पाकिस्तान के सभी सैन्य ठिकाने आते हैं. इसके साथ ही नेपाल, भूटान, म्यांमार, श्रीलंका, अफगानिस्तान, मालदीव जैसे पड़ोसी देशों के अलावा मध्य एशिया के ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान, किर्गिस्तान, कजाकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान भी इसके दायरे में हैं. पश्चिमी दिशा में यह संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, कतर, ओमान, ईरान, इराक, तुर्की, मिस्र और सोमालिया तक पहुंच सकती है. इसके प्रभाव क्षेत्र में रूस और इंडोनेशिया के कुछ महत्वपूर्ण हिस्से भी शामिल हैं.

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'अग्नि-5' और 'अग्नि-6' की मारक क्षमता

यद्यपि अग्नि-4 भारत का एक बेहद अचूक हथियार है, लेकिन देश की सबसे लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल होने का गौरव अग्नि-5 को प्राप्त है. रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा विकसित अग्नि-5 की मारक क्षमता 5,000 किलोमीटर से अधिक है. इसके साथ ही विकसित की जा रही अग्नि-6 और अग्नि-5 की मुख्य विशेषता इनकी एमआईआरवी (MIRV) यानी मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टारगेटेबल री-एंट्री व्हीकल तकनीक है. यह खास तकनीक एक ही मिसाइल को एक साथ कई अलग-अलग वॉरहेड्स के जरिए कई दुश्मन ठिकानों को एक ही उड़ान में तबाह करने की अनूठी क्षमता प्रदान करती है.

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नो फर्स्ट यूज और सेकेंड स्ट्राइक की गारंटी

भारत की राष्ट्रीय परमाणु नीति नो फर्स्ट यूज यानी पहले इस्तेमाल न करने के सिद्धांत पर टिकी है. ऐसे में यदि कोई शत्रु देश भारत पर पहला परमाणु वार करने का दुस्साहस करता है, तो भारत के पास दुश्मन को पूरी तरह मिटा देने की सेकंड स्ट्राइक क्षमता होना बेहद अनिवार्य है. अग्नि-4 का रात के समय किया गया सफल परीक्षण यह सुनिश्चित करता है कि भारत 24 घंटे और साल के 365 दिन किसी भी वक्त जवाबी हमला करने के लिए तैयार है. यह क्षमता चीन और पाकिस्तान जैसे पड़ोसियों के खिलाफ एक मजबूत और भरोसेमंद क्रेडिबल डिटेरेंस खड़ा करती है.

अग्नि-4 की खासियत

तकनीकी धरातल पर अग्नि-4 दुनिया के सबसे आधुनिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम्स को भी चकमा देने में माहिर है. जब यह मिसाइल अंतरिक्ष से वापस वायुमंडल में री-एंट्री करती है, तब इसकी गति मैक 12 से मैक 20 (लगभग 24,500 किलोमीटर प्रति घंटा) तक पहुंच जाती है. इतनी तीव्र रफ्तार के कारण दुनिया का कोई भी रडार या एयर डिफेंस इसे हवा में ट्रैक करके नष्ट नहीं कर सकता है. इस गति के दौरान घर्षण से 3,000°C से 4,000°C तक की भयंकर गर्मी पैदा होती है, लेकिन इसमें लगा विशेष कार्बन-कंपोजिट हीट शील्ड अंदरूनी इलेक्ट्रॉनिक्स और वॉरहेड का तापमान 50°C से नीचे बनाए रखता है.

रिंग लेजर गायरो तकनीक और अचूक नेविगेशन

दुश्मन के जीपीएस सिग्नल को जाम करने या किसी भी बाहरी जीपीएस सपोर्ट के बिना भी अग्नि-4 अपने लक्ष्य को सटीक निशाना बना सकती है. इसमें रिंग लेजर गायरो आधारित इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम (RINS) और उन्नत माइक्रो-नेविगेशन तकनीक का इस्तेमाल किया गया है. यह तकनीक मिसाइल को हजारों किलोमीटर का सफर तय करने के बाद भी केवल कुछ ही मीटर के अंतर से सीधे लक्ष्य पर हमला करने की अद्भुत सटीकता देती है, जिससे दुश्मन के बंकर और सैन्य ठिकाने पूरी तरह जमींदोज हो जाते हैं.

मोबाइल लॉन्चिंग का त्रि-स्तरीय सुरक्षा कवच

भारत अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा को बहुस्तरीय बनाने के लिए बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलों के बेहतरीन संयोजन का उपयोग कर रहा है. जहां अग्नि-4 और अग्नि-प्राइम जैसी सॉलिड-फ्यूल चालित बैलिस्टिक मिसाइलें भारी परमाणु पेलोड ले जाने और मोबाइल ट्रेन या रोड लॉन्चर से चंद मिनटों में दागे जाने में सक्षम हैं, वहीं LRLACM जैसी लॉन्ग-रेंज लैंड अटैक क्रूज मिसाइलें जमीन से सटकर उड़ते हुए रडार को चकमा देकर हमला करती हैं. यह एकीकृत त्रि-स्तरीय ढांचा भारत को हर संभावित सैन्य खतरे के खिलाफ एक अभेद्य सुरक्षा कवच प्रदान करता है.

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